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गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश में इस बार तबादला सीजन अफसरशाही के अधीन नजर आया। मंत्रियों को दी गई छूट के बावजूद उनके प्रस्तावों की उपेक्षा करते हुए प्रमुख सचिवों (पीएस) और अपर मुख्य सचिवों (एसीएस) ने मनमाने ढंग से ट्रांसफर-पोस्टिंग की फाइलें निपटाईं। इससे न सिर्फ मंत्रियों में नाराजगी है, बल्कि कर्मचारी वर्ग भी गहरी असंतुष्टि में है। खास बात यह है कि गंभीर बीमारियों, पति-पत्नी को एक साथ पदस्थ करने और पारिवारिक मजबूरियों जैसे संवेदनशील मामलों में भी ट्रांसफर नीति का पालन नहीं किया गया।

मंत्रियों की चली नहीं, अफसरों की मनमानी हावी

प्रदेश सरकार ने एक माह 17 दिनों के ट्रांसफर सीजन में मंत्रियों को विभागीय तबादलों पर छूट दी थी। लेकिन हकीकत यह रही कि कई विभागों में मंत्रियों की अनुशंसाएं नजरअंदाज कर दी गईं। वन विभाग इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां ‘ए-प्लस’ नोटशीट सहित मैनेजमेंट कोटे से की गई सिफारिशें दरकिनार कर दी गईं। मंत्रियों और अफसरों के बीच समन्वय की भारी कमी रही, जिससे अधिकांश विभागों में आठ फीसदी तक भी तबादले नहीं हो सके।

वन मंत्रालय में देर रात तक नामों की जोड़-घटाव चलती रही। पोस्टिंग आदेशों में कुछ अधिकारियों के नाम दो जगह दर्ज हो गए, वहीं कुछ को ऐसे रेंज में भेज दिया गया जो अस्तित्व में ही नहीं है। रेंजर स्वस्ति श्री जैन का नाम दो स्थानों पर, दो अलग-अलग शर्तों पर तबादले की सूची में दर्ज किया गया—एक ‘स्ववित्तपोषित’ और दूसरा ‘प्रशासनिक’ आधार पर।

मुख्यमंत्री के विभागों में एसीएस-पीएस की ‘फ्री हैंड’ कार्यशैली

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास गृह, जेल, वन, उद्योग, विमानन और नर्मदा घाटी जैसे 10 से अधिक विभाग हैं। इन विभागों में तबादलों की सूची तैयार करने और अनुमोदन में मंत्रियों की भूमिका नगण्य रही। नाम मात्र के हस्ताक्षर और पूरी स्क्रिप्ट मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा लिखी गई। वन विभाग में तो कई मंत्रियों की अनुशंसाएं डस्टबिन में डाल दी गईं।

दावा किया जा रहा है कि मुख्यमंत्री की व्यस्तताओं और अनेक विभागों के जिम्मे होने से वे तबादला नीति की निगरानी नहीं कर पाए, जिसका लाभ वरिष्ठ अधिकारियों ने उठा लिया। उद्योग विभाग की तबादला सूची की जानकारी न तो सार्वजनिक हुई, न ही उसमें किसी मंत्री की राय ली गई।

प्रहलाद पटेल जैसे कद्दावर मंत्री भी बेअसर

कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल, जिन्हें सरकार में महत्वपूर्ण और प्रभावशाली चेहरा माना जाता है, उनके तबादला प्रस्तावों को भी दरकिनार कर दिया गया। अधिकारियों ने यह कहते हुए सूची लौटा दी कि उनके प्रस्ताव विभागीय फार्मूले में फिट नहीं बैठते। ये फार्मूले पारस्परिक तबादला, गंभीर बीमारी (कैंसर, ब्रेन ट्यूमर), और महिला कर्मी की पारिवारिक दूरी को लेकर निर्धारित किए गए थे। मंत्री पटेल की ओर से भेजी गई सूची को पूर्णतः अस्वीकार कर दिया गया।

इसी प्रकार आजीविका मिशन, पंचायत राज, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) सहित अन्य विभागों में विभागाध्यक्षों ने अपने स्तर पर तबादले किए और मंत्रियों की राय को नकारा।

राजस्व विभाग में भी अफसरों की मनमानी

राजस्व विभाग की कहानी भी अलग नहीं रही। पीएस विवेक पोरवाल ने मंत्री करण सिंह वर्मा की सूची पर भी कोई ध्यान नहीं दिया। उनकी सिफारिशों में भारी कटौती करते हुए केवल औपचारिक नाम ही ट्रांसफर किए गए। दिलचस्प बात यह है कि विभाग ने 509 पटवारियों के तबादले के बाद दूसरी सूची 18 जून की आधी रात को जारी की, और अभी और सूची आने की संभावना है।

विवादों से भरे ट्रांसफर आदेश

  • वन विभाग: 17 और 18 जून तक फॉरेस्ट गार्ड से लेकर एसडीओ स्तर तक के अधिकारियों की सूची जारी हुई, जिसमें कई विरोधाभासी आदेश सामने आए।
  • स्वस्ति श्री जैन प्रकरण: दो स्थानों पर अलग-अलग आधार पर तबादले किए गए। एक स्थान ऐसा भी है जो वर्तमान में अस्तित्व में नहीं है।
  • एमएसएमई विभाग: मंत्री चेतन्य काश्यप की सिफारिशों को भी तवज्जो नहीं दी गई।
  • पीएचई विभाग: विभाग की मंत्री की अनुशंसाओं को नजरअंदाज कर फील्ड अधिकारियों के तबादले कर दिए गए। कर्मचारियों ने विभागाध्यक्षों पर लेनदेन के आरोप तक लगाए हैं।

मंत्रियों और सरकार के बीच खींचतान का नतीजा

पूरे ट्रांसफर सीजन में यह स्पष्ट दिखा कि मंत्रियों और प्रमुख सचिवों के बीच समन्वय का अभाव है। जिन मंत्रियों ने स्वयं बैन हटवाने की पहल की, उन्हें ही मनचाहे ट्रांसफर आदेशों से वंचित रखा गया। अफसरशाही का दबदबा इतना बढ़ गया कि सरकारी नीतियां भी ताक पर रख दी गईं।

प्रदेश में तबादलों को लेकर जिस पारदर्शिता और न्यायप्रियता की अपेक्षा थी, वह इस बार नदारद रही। शासन की नीतियां तो थीं, पर अमल में अफसरों की मनमानी और मंत्री-अफसर के बीच बढ़ते अंतर ने इसे मजाक बना दिया। यदि यह स्थिति बनी रही तो ना सिर्फ प्रशासनिक विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे, बल्कि यह सरकार के भीतर गहराते असंतुलन को भी उजागर करेगा।