गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश कैडर के 1987 बैच के रिटायर्ड पीसीसीएफ अजीत श्रीवास्तव के लिए राहत भरी खबर आई है। राज्य शासन ने उन्हें दिया गया कारण बताओ नोटिस निरस्त कर दिया है, जिससे अब उन्हें पेंशन और ग्रेच्युटी का लाभ मिल सकेगा।
पुराने आरोप, लेकिन कोई स्पष्ट अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं
जब अजीत श्रीवास्तव जबलपुर वन वृत्त के सीसीएफ थे, तब उन पर टिम्बर व्यापारी से कथित रूप से रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। इस मामले में सरकार ने दो सदस्यीय जांच समिति गठित की थी, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर अप्रैल 2016 में उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया गया। इसके जवाब और विभागीय राय के बाद उनकी एक वेतनवृद्धि रोकने की सजा दी गई थी।
लेकिन, इस मामले में अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के तहत कोई स्पष्ट अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं हुई थी। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने इस पर आपत्ति जताई और पूछा कि कार्रवाई किस नियम के तहत हो रही है।
कैट से मिली राहत, सरकार ने बंद किया मामला
श्रीवास्तव ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) में याचिका दायर की थी, जिसके बाद अंतरिम आदेश में सरकार को यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश मिले। उनके खिलाफ चार साल से अधिक पुराने मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई संभव नहीं थी, इसलिए राज्य शासन ने कारण बताओ नोटिस को समाप्त कर दिया और मामला नस्तीबद्ध कर दिया।
इस फैसले से अजीत श्रीवास्तव को बड़ी राहत मिली है और अब वे अपने सेवानिवृत्ति लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
