वन्यजीवों पर संकट, दो रिजर्व में मौत से चिंता
गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्य प्रदेश के वन्य अभयारण्यों से एक बार फिर चिंताजनक खबर सामने आई है। कान्हा टाइगर रिजर्व में एक नर तेंदुए की मौत हो गई, वहीं रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में ‘कान्हा’ नामक नर बाघ मृत पाया गया। लगातार हो रही वन्य प्राणियों की मौत ने वन प्रबंधन और संरक्षण प्रयासों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कान्हा में घायल तेंदुए की उपचार के दौरान मौत
कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अनुसार 14 फरवरी को दलदला बीट के कक्ष क्रमांक 729 में एक घायल नर तेंदुआ मिला था। उसे उपचार के लिए ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। तेंदुए की उम्र लगभग 12 वर्ष बताई जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि मृत तेंदुए के सभी अंग सुरक्षित पाए गए हैं।
गौरतलब है कि पिछले छह महीनों में कान्हा में करीब छह बाघों और यह चौथे तेंदुए की मौत का मामला सामने आया है, जिससे वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ी है।
जंगल की जंग में हारा ‘कान्हा’ बाघ
सागर स्थित रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के मोहली रेंज अंतर्गत मानेगांव बीट के कोर क्षेत्र में एक नर बाघ मृत अवस्था में मिला। प्रारंभिक जांच में टेरिटोरियल फाइट, यानी क्षेत्रीय संघर्ष में उसकी मौत की आशंका जताई जा रही है। हालांकि वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगा।
मृत बाघ की उम्र लगभग 3 से 4 वर्ष थी। जानकारी के अनुसार यह वही बाघ था जिसे कुछ समय पूर्व कान्हा से लाकर यहां छोड़ा गया था। बचपन में मां से बिछड़ने के बाद उसका रेस्क्यू किया गया और पुनर्वन्यीकरण प्रशिक्षण दिया गया। 18-19 जनवरी की दरमियानी रात उसे रेडियो कॉलर लगाकर कोर एरिया में छोड़ा गया था। वन विभाग के अनुसार पिछले दो दिनों से बाघ की लोकेशन एक ही स्थान पर मिल रही थी, जिससे संदेह गहराया। सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और जांच प्रारंभ की।
संरक्षण पर उठे सवाल
दोनों घटनाओं ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रही मौतों के कारणों की गहन समीक्षा आवश्यक है। वन विभाग ने दोनों मामलों में जांच और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।
