जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत के बाद भी स्वास्थ्य तंत्र नहीं संभला; अब सर्जरी में इस्तेमाल हो रहे सलूशन से मरीजों को गंभीर स्किन रिएक्शन, जांच के बजाय जारी है सप्लाई
आईबीएन, शहडोल। जहरीले सिरप से 20 बच्चों की मौत के बाद प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग पहले से ही सवालों के घेरे में है, लेकिन इसी बीच शहडोल मेडिकल कॉलेज में एक और गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। यहां ऑपरेशन से पहले उपयोग में लाया जाने वाला प्रोविडोन आयोडीन सॉल्यूशन मरीजों के लिए ‘जहर’ बन गया है। इस सलूशन के इस्तेमाल के बाद मरीजों की स्किन जल रही है, लाल हो रही है, फफोले पड़ रहे हैं और कई बार चमड़ी छिल जा रही है। गर्भवती महिलाओं और सर्जरी के लिए आने वाले मरीजों पर इसका असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है।
🚨 एक साल से जारी लापरवाही — विभाग प्रमुखों की आपत्ति भी अनसुनी
मेडिकल कॉलेज में यह समस्या पिछले एक साल से बनी हुई है। डॉक्टरों और विभागाध्यक्षों ने कई बार इस सॉल्यूशन को बदलने की मांग की, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। प्रबंधन का तर्क है कि “जानकारी जुटाने के लिए एक ग्रुप बनाया गया है” — लेकिन सालभर में न तो सॉल्यूशन बदला गया और न ही मरीजों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कार्रवाई हुई।
🧪 फार्माकोलॉजी विभाग होने के बावजूद जांच नहीं
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मेडिकल कॉलेज में दवाइयों की निगरानी और जांच के लिए बाकायदा फार्माकोलॉजी विभाग मौजूद है, लेकिन उसने न तो प्रोविडोन आयोडीन सलूशन की जांच की और न ही कोई आधिकारिक रिपोर्ट दी। विभागाध्यक्षों की शिकायतों के बावजूद फार्माकोलॉजी विभाग के महेंद्र जैसवाल ने सवालों पर फोन काट दिया, बाद में मुलाकात पर जवाब देने की बात कही।
📈 हर दिन दो से तीन मरीज हो रहे शिकार
अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार हर दिन दो से तीन मरीज इस सलूशन से रिएक्शन के शिकार हो रहे हैं। मरीजों की स्किन को ठीक होने में 10 से 15 दिन तक का समय लग रहा है। इतने लंबे समय से चल रही इस समस्या को दबाए रखना अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
🕸️ सप्लायर–प्रबंधन गठजोड़ पर उठे सवाल
डॉक्टरों की आपत्ति के बावजूद सलूशन की सप्लाई न रोकना और उल्टा नई खेप मंगाना अब खुले तौर पर प्रबंधन–सप्लायर गठजोड़ की ओर इशारा कर रहा है।
इस पर मेडिकल कॉलेज अधीक्षक डॉ. नागेन्द्र सिंह का कहना है—
“इस संबंध में जानकारी आई है। अन्य जिलों में भी पूछताछ की गई है कि क्या वहां भी इसी बैच में ऐसी समस्या हुई है। सभी से बैच नंबर की जानकारी ली जा रही है।”
🗣️ राजनीतिक प्रतिक्रिया — कांग्रेस ने उठाई सीबीआई जांच की मांग
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा—
“अभी 20 बच्चों की मौत की स्याही सूखी भी नहीं है और शहडोल मेडिकल कॉलेज में पेरीडोन आयोडीन सलूशन से मरीजों की चमड़ी जलने की खबर आ रही है। यह सलूशन किसने सप्लाई किया और जांच क्यों नहीं की गई? स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और डॉक्टरों की विदेश यात्राओं व कंपनी स्पॉन्सरशिप की भी जांच की जाए।”
गुप्ता ने मेडिकल सप्लाई में भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच की मांग की है और कहा कि मेडिकल कॉलेज जैसी संस्थाओं की हालत को जिला अस्पतालों से भी बदतर बना दिया गया है।
📌 प्रोविडोन आयोडीन सॉल्यूशन क्या है? 🧴
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| 🧪 कैमिकल नाम | प्रोविडोन आयोडीन (Povidone Iodine) |
| 🏥 उपयोग | ऑपरेशन और प्रसव से पहले त्वचा की सफाई और संक्रमण से बचाव के लिए |
| ⚠️ संभावित दुष्प्रभाव | स्किन पर जलन, लालपन, फफोले, त्वचा का छिलना |
| ⏳ समस्या कब से | एक साल से शहडोल मेडिकल कॉलेज में रिपोर्ट हो रही |
| 📌 जोखिम | गर्भवती महिलाओं और सर्जरी मरीजों के लिए संक्रमण और गंभीर त्वचा क्षति |
📷 नीचे चित्र में: प्रोविडोन आयोडीन सॉल्यूशन की वही बोतल, जिसके उपयोग के बाद मरीजों में स्किन रिएक्शन सामने आए हैं।

📍 मामला अब सिर्फ अस्पताल की लापरवाही नहीं, सिस्टम की नाकामी बन गया है
शहडोल मेडिकल कॉलेज में मरीजों की जान से खिलवाड़ का यह मामला प्रदेश के स्वास्थ्य सिस्टम की गहरी खामियों को उजागर करता है। जहरीले सिरप से बच्चों की मौत के बाद भी विभाग का समय पर न चेतना, लापरवाही पर परदा डालना और भ्रष्ट सप्लाई नेटवर्क का जारी रहना अब एक बड़े स्वास्थ्य घोटाले का संकेत देता है।
