2025 में 23 वन अधिकारी होंगे रिटायर

वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव का अफसरों को सख्त संदेश – जनता की अवहेलना अस्वीकार्य

गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश के वन विभाग में वर्षों से चली आ रही व्यवस्था की एक और परत खुली है। वन बल प्रमुख (हॉफ) असीम श्रीवास्तव ने रिटायरमेंट से ठीक दो महीने पहले एक ऐसा मुद्दा उठाया, जो जनता से जुड़ी जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है। गुरुवार को हॉफ ने आईएफएस अफसरों के व्हाट्सएप ग्रुप में एक सख्त चेतावनी भरा संदेश पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने कहा कि कई डीएफओ, एसडीओ और आरओ जनता के फोन नहीं उठाते, जो अत्यंत आपत्तिजनक और अस्वीकार्य है।

हॉफ असीम श्रीवास्तव
हॉफ असीम श्रीवास्तव

हॉफ का सख्त संदेश

Time and again it is being brought to my notice that certain DFOs and subordinate SDOs and ROs do not pick the call from the public.
This is highly objectionable and undesirable.
Please ensure that this doesn’t happen in your Division.

इंग्लिश में पोस्ट किए गए इस संदेश में वन बल प्रमुख ने लिखा –
“बार-बार यह संज्ञान में लाया जा रहा है कि कुछ डीएफओ और उनके अधीनस्थ अधिकारी जनता के कॉल रिसीव नहीं करते। यह अत्यंत आपत्तिजनक और अवांछनीय है। कृपया सुनिश्चित करें कि आपके डिवीजन में ऐसा न हो।”

संदेश सामने आते ही कुछ आईएफएस अधिकारियों ने “जी” लिखकर और हाथ जोड़ने वाले इमोजी के साथ प्रतिक्रिया दी, लेकिन ज्यादातर सीनियर अधिकारियों ने इसे अनदेखा कर दिया। यह स्थिति दर्शाती है कि विभाग के भीतर अनुशासन और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

ठसक में डूबे अफसर, सीनियर का भी नहीं उठाते फोन
वन विभाग के फील्ड अफसरों की कार्यशैली पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। आम जनता तो दूर, कई अफसर अपने सीनियर का भी फोन नहीं उठाते। पोस्टिंग और क्षेत्रीय प्रभुत्व के साथ इन अधिकारियों में एक तरह की अकड़ आ जाती है, जो व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रही है।

रिटायरमेंट से ठीक पहले जागे हॉफ!
1988 बैच के आईएफएस असीम श्रीवास्तव जनवरी 2024 में वन बल प्रमुख बने थे और जुलाई 2025 में वे सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि पूरे कार्यकाल के दौरान क्या यह व्यवहार कभी नोटिस नहीं किया गया? क्या अब जब कार्यकाल समाप्त होने वाला है, तब इस सच्चाई से रूबरू हुए हैं?

प्रोटोकॉल की भी धज्जियां
वन विभाग में प्रोटोकॉल का ह्रास कोई नई बात नहीं है। वर्ष 2021 के बाद से ही वरिष्ठता और अधिकार की परंपराएं टूटने लगी हैं। शुरुआत एसीएस फॉरेस्ट द्वारा की गई, जो वन बल प्रमुख को दरकिनार कर सीधे फील्ड अधिकारियों से संवाद करने लगे। इसके बाद कैम्पा, विकास और संरक्षण के प्रमुखों ने भी यही तरीका अपनाया। इस बाईपासिंग कल्चर ने न सिर्फ प्रोटोकॉल को खत्म किया बल्कि अफसरशाही में व्यक्तिगत हित साधने का मार्ग खोल दिया।

शिकायतें धूल खा रहीं, अधिकारी बचे बैठे हैं
कुछ महीने पहले कई सर्किल के वन संरक्षकों ने डीएफओ की मनमानी के खिलाफ लिखित शिकायतें मुख्यालय भेजी थीं, लेकिन वे फाइलें प्रशासनिक मेज पर ही धूल खा रही हैं। बाबू या अधिकारी उन्हें देखना भी जरूरी नहीं समझते। ऐसे में सवाल उठता है कि हॉफ के दो महीने के शेष कार्यकाल में वह इस ढांचे को कितना सुधार पाएंगे?

हॉफ असीम श्रीवास्तव का संदेश विभागीय संस्कृति में एक हलचल की शुरुआत हो सकती है, लेकिन वास्तविक बदलाव तब ही आएगा जब संदेश कागजों और स्क्रीन से निकलकर जमीनी हकीकत में दिखेगा। अब यह देखना बाकी है कि इस चेतावनी के बाद विभाग के अधिकारी जनता के फोन उठाना शुरू करते हैं या यह चेतावनी भी अन्य अनदेखी फाइलों की तरह भुला दी जाएगी।