InShot 20260927

गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश में 5,935 वनरक्षकों की भर्ती के दूसरे चरण में अभ्यर्थियों की पहचान सत्यापन व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं। वन मुख्यालय ने 23 से 25 अक्टूबर तक होने वाले अभिलेख परीक्षण, शारीरिक माप और पैदल चाल के दौरान आधार आधारित बायोमीट्रिक सत्यापन के लिए मेसर्स इन्नोवेटिव्यू इंडिया लिमिटेड की सेवाएं लेने की सिफारिश की है। वन मुख्यालय की प्रशासन शाखा-2 के एपीसीसीएफ अजय कुमार यादव ने क्षेत्रीय सीसीएफ और डीएफओ को भेजे पत्र में कंपनी के कोटेशन का उल्लेख किया है। इसमें बायोमीट्रिक परीक्षण के लिए प्रति ऑपरेटर 5 हजार रुपये की दर प्रस्तावित की गई है। पत्र में कंपनी के मध्यप्रदेश पुलिस भर्ती में काम करने का भी उल्लेख है। भर्ती के दूसरे चरण में बायोमीट्रिक सत्यापन के बाद दस्तावेजों की जांच, शारीरिक माप और पैदल चाल परीक्षण किया जाना है।

कंपनी का नाम एनईईटी से जुड़े परीक्षा सुरक्षा और बायोमीट्रिक प्रक्रिया संबंधी विवादों के संदर्भ में भी सामने आया था। हालांकि उपलब्ध जांच-संदर्भों से कंपनी या उसके वरिष्ठ अधिकारियों को किसी मामले में दोषी ठहराए जाने का निष्कर्ष नहीं निकलता है। ऐसे में वनरक्षक भर्ती में कंपनी की प्रस्तावित भूमिका को लेकर मुख्य सवाल उसकी पूर्व गतिविधियों से अधिक चयन प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों का है। विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि एजेंसी का चयन करते समय उसकी तकनीकी क्षमता, पूर्व कार्यों का सुरक्षा परीक्षण, ऑपरेटरों का सत्यापन, डेटा सुरक्षा और बायोमीट्रिक रिकॉर्ड के डिजिटल ऑडिट की व्यवस्था किस तरह सुनिश्चित की गई है। 5,935 अभ्यर्थियों की पहचान से जुड़ी इस प्रक्रिया में किसी गड़बड़ी की स्थिति में स्वतंत्र सत्यापन का प्रावधान भी महत्वपूर्ण होगा।

5,935 अभ्यर्थियों की पहचान होगी सत्यापित

वनरक्षक भर्ती के दूसरे चरण में 5,935 अभ्यर्थियों का बायोमीट्रिक सत्यापन प्रस्तावित है। इसके बाद अभिलेख परीक्षण, शारीरिक माप और पैदल चाल की प्रक्रिया होगी। जिन जिलों में 200 से अधिक अभ्यर्थी हैं, वहां प्रक्रिया 23, 24 और 25 अक्टूबर को और अन्य जिलों में 23 और 24 अक्टूबर को प्रक्रिया पूरी किए जाने की जानकारी दी गई है। इस पूरी प्रक्रिया में अभ्यर्थी की पहचान का सही मिलान महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि बायोमीट्रिक सत्यापन के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया में वास्तविक अभ्यर्थी की उपस्थिति सुनिश्चित की जानी है।

प्रति ऑपरेटर 5 हजार रुपये का कोटेशन

वन मुख्यालय के पत्र में बायोमीट्रिक परीक्षण के लिए प्रति ऑपरेटर 5 हजार रुपये की दर का उल्लेख किया गया है। ऐसे में विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि कुल कितने ऑपरेटर तैनात किए जाएंगे, कितने दिनों तक उनकी सेवाएं ली जाएंगी और इस आधार पर सरकार पर कितना वित्तीय भार आएगा। भुगतान केवल ऑपरेटर उपलब्ध कराने के आधार पर होगा या बायोमीट्रिक सत्यापन की निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के आधार पर, यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है।

कंपनी का पूर्व परीक्षा संबंधी काम

सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कंपनी से संबंधित परियोजना विवरणों में इन्नोवेटिव्यू के परीक्षा और तकनीकी सेवाओं से जुड़े पूर्व कार्यों का उल्लेख मिलता है। कंपनी के नाम से मध्यप्रदेश और राजस्थान में एनईईटी परीक्षा के दौरान तकनीकी और निगरानी संबंधी काम किए जाने की जानकारी भी सार्वजनिक सामग्री में सामने आती है। पूर्व में सरकारी भर्ती या परीक्षा संबंधी काम किया जाना अपने आप में वर्तमान भर्ती के लिए सुरक्षा पात्रता का प्रमाण नहीं है। इसी तरह किसी विवाद में कंपनी का नाम आना भी अपने आप में दोष सिद्ध नहीं करता। इसलिए वन विभाग द्वारा किए गए चयन परीक्षण और सुरक्षा जांच की जानकारी महत्वपूर्ण हो जाती है।

एनईईटी विवाद का संदर्भ

इन्नोवेटिव्यू का नाम एनईईटी से जुड़ी परीक्षा सुरक्षा और बायोमीट्रिक व्यवस्था पर उठे सवालों के संदर्भ में सामने आया था। कुछ रिपोर्टों में परीक्षा केंद्रों पर पहचान सत्यापन और बायोमीट्रिक व्यवस्था से जुड़े निचले स्तर के कर्मचारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए थे। इन रिपोर्टों के आधार पर कंपनी को एनईईटी मामले में दोषी बताना उचित नहीं होगा, क्योंकि उपलब्ध सामग्री में कंपनी या उसके वरिष्ठ अधिकारियों की प्रत्यक्ष आपराधिक संलिप्तता का अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आता। इसलिए वर्तमान भर्ती में एजेंसी के चयन के संदर्भ में पूर्व विवादों की स्वतंत्र समीक्षा और सुरक्षा ऑडिट का सवाल अधिक महत्वपूर्ण है।

बायोमीट्रिक व्यवस्था में इन सुरक्षा बिंदुओं की जरूरत

बायोमीट्रिक सत्यापन की विश्वसनीयता केवल मशीन या ऑपरेटर तक सीमित नहीं होती। अभ्यर्थी की पहचान, आधार आधारित मिलान, असफल मिलान की स्थिति में दोबारा जांच, उपकरण और सॉफ्टवेयर तक पहुंच तथा सत्यापन का डिजिटल रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हैं। प्रत्येक सत्यापन का समय, केंद्र, ऑपरेटर और परिणाम दर्ज करने वाला डिजिटल ऑडिट ट्रेल सुरक्षित रखा जाना चाहिए। किसी अभ्यर्थी का बायोमीट्रिक मिलान नहीं होने पर स्वतंत्र सत्यापन की व्यवस्था भी पहले से तय होना जरूरी है।

ऑपरेटरों के सत्यापन और डेटा सुरक्षा पर भी सवाल

बायोमीट्रिक प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की पहचान संबंधी संवेदनशील जानकारी संभाली जाएगी। ऐसे में ऑपरेटरों की पहचान और पृष्ठभूमि जांच, सिस्टम में उनकी पहुंच की सीमा, लॉगिन नियंत्रण और डेटा की सुरक्षा जैसे प्रावधान महत्वपूर्ण होंगे। विभाग को यह भी स्पष्ट करना होगा कि बायोमीट्रिक आंकड़ों तक किस स्तर के अधिकारियों या कर्मचारियों की पहुंच होगी और भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन आंकड़ों के संरक्षण अथवा निस्तारण के लिए क्या व्यवस्था लागू होगी।

शारीरिक परीक्षण में बायोमीट्रिक के बाद आगे की प्रक्रिया

वनरक्षक भर्ती के दूसरे चरण में बायोमीट्रिक सत्यापन के बाद शारीरिक माप और पैदल चाल परीक्षण किया जाना है। पुरुष अभ्यर्थियों को चार घंटे में 25 किलोमीटर और महिला अभ्यर्थियों को चार घंटे में 14 किलोमीटर की पैदल चाल पूरी करनी होगी। शारीरिक माप को लेकर आपत्ति होने पर मौके पर अपील की व्यवस्था और पात्रता से जुड़े अन्य प्रावधान भी प्रक्रिया का हिस्सा होंगे। ऐसे में बायोमीट्रिक सत्यापन से लेकर शारीरिक परीक्षण तक प्रत्येक चरण में अभ्यर्थी की पहचान सुरक्षित तरीके से दर्ज होना जरूरी है।

वन मुख्यालय की सिफारिश पर अब नजर

एजेंसी की पूर्व भूमिका या किसी रिपोर्ट में उठे सवाल अपने आप में कंपनी को दोषी साबित नहीं करते, लेकिन संवेदनशील सरकारी भर्ती में एजेंसी चयन की प्रक्रिया पारदर्शी और जांच योग्य होना जरूरी है। वन मुख्यालय की सिफारिश के बाद यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है कि अंतिम स्वीकृति किस स्तर पर दी जाएगी, कंपनी की तकनीकी और सुरक्षा क्षमता का कितना स्वतंत्र परीक्षण किया गया है, कितने ऑपरेटर लगाए जाएंगे और बायोमीट्रिक सत्यापन की निगरानी किस स्तर से होगी। 5,935 अभ्यर्थियों से जुड़ी इस प्रक्रिया में इन बिंदुओं की स्पष्टता भर्ती की विश्वसनीयता और अभ्यर्थियों की पहचान की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होगी।