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पटना.

बिहार सरकार ने पड़ोसी राज्यों से होने वाली पत्थर आपूर्ति पर निर्भरता कम करने का निर्णय लिया है। सरकार ने राज्य के कई पहाड़ी जिलों में बड़े पैमाने पर पत्थर खनन की योजना बनाई है। लक्ष्य है कि निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक कच्चा माल स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो, जिससे लागत कम हो और विकास की रफ्तार तेज हो सके, लेकिन इसके पूर्व संबंधित जिलों में स्थित पहाड़ों का सर्वेक्षण होगा।

सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर आगे योजना अमल में लाई जाएगी। खान एवं भू-तत्व विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी क अनुसार, खनन विभाग ने बीते दिनों नवादा, शेखपुरा, औरंगाबाद और कैमूर के अलावा बांका और गया जिले में सर्वे कराया था। जिसमें यह जानकारी सामने आई है कि इन जिलों की पहाडिय़ों में पर्याप्त मात्रा में पत्थर उपलब्ध हैं।

विभाग ने इन जिलों को खनन की दृष्टि से उपयुक्त मानते हुए आगे की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। निर्णय अमल में आने पर न सिर्फ राज्य की निर्माण परियोजनाओं को गति मिलेगी, बल्कि खनन से जुड़े रोजगार के अवसर भी स्थानीय लोगों को मिल सकेंगे। जानकारी के अनुसार, अकेले बांका के शंभूगंज अंचल में लगभग 20 एकड़ पहाड़ी क्षेत्र को विशेष रूप से चिह्नित किया गया है। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षेत्र से लाखों टन पत्थर निकलने की संभावना है। यदि पर्यावरणीय स्वीकृति और अन्य औपचारिकताएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो यहां जल्द ही खनन कार्य शुरू किया जा सकता है।

स्थानीय स्तर पर पत्थर उपलब्ध होने से सड़क, पुल, भवन और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की लागत में कमी आएगी। साथ ही, खनन से मिलने वाली रायल्टी और अन्य शुल्क राज्य से राजस्व में बढ़ोत्तरी भी होगी। अधिकारियों का कहना है कि खनन कार्य पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए किया जाएगा, ताकि प्राकृतिक संतुलन बना रहे।

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