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काठमांडू 

 नेपाल में तिब्बत की सीमा से लगे इलाके में अचानक आई जबरदस्त बाढ़ ने कई गांवों और प्रोजेक्ट साइट्स को तबाह दिया। इस घटना में सात लोगों की मौत हो गई और चीन सीमा के पास 9 जवान तापता हैं। अधिकारियों ने भारी जान-माल के नुकसान की आशंका जताते हुए नदी के किनारे रहने वाले लोगों से ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की।

सरकारी अधिकारियों ने बताया कि रसुवा के पहाड़ी जिले में स्याप्रु बेसी और तिमुरे इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। साथ ही उन्होंने भोटे कोशी नदी के किनारे रहने वाले लोगों से ज्यादा सावधानी बरतने को कहा है।

प्रशासन के पास अभी पक्की जानकारी नहीं
जिला प्रशासक नरेंद्र परियार ने रॉयटर्स को बताया, "हमें गांवों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट साइट्स के बह जाने की खबरें मिली हैं।" उन्होंने आगे कहा कि अभी जान-माल के नुकसान का कोई पक्का अनुमान उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा, "काफी जान-माल का नुकसान हो सकता है लेकिन अभी मैं पक्के तौर पर कुछ नहीं कह सकता।"

काठमांडू पोस्ट ने रसुवा के प्रमुख जिला अधिकारी नरेंद्र परियार के हवाले से कहा है कि बाढ़ का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि जिला मुख्यालय और आसपास के इलाकों में बिल्कुल बारिश नहीं हुई है और मौसम साफ है। आशंका जताई जा रही है कि ऊपरी क्षेत्र में कोई ग्लेशियर झील के फटने या कोई अस्थायी बांध टूटने के कारण नदी में अचानक बाढ़ आई है। प्रशासन का कहना है कि लोगों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। शुरुआती रिपोर्ट्स से भारी नुकसान की बात सामने आ रही है।

हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान
स्थानीय निवासी अजय श्रेष्ठ ने बताया कि पानी का बहाव इतना तेज था कि मानो अचानक कोई बांध टूट गया हो। इस बाढ़ में चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट समेत कई अन्य जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है। नदी के बहाव को देखते हुए नुवाकोट और धाडिंग जिलों के निचले इलाकों पर भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।

काठमांडू वापस लौटा रेस्क्यू हेलीकॉप्टर
बाढ़ और भूस्खलन के कारण तिमुरे में फंसे लोगों को बचाने के लिए भेजा गया एल्टीट्यूड एयर का एक हेलीकॉप्टर बिना लैंड किए ही वापस काठमांडू लौट आया। पायलट ने बताया कि बाढ़ के तेज बहाव में तिमुरे का स्थानीय हेलीपैड पूरी तरह बह गया है, जिससे वहां उतरने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं बची। आसमान से देखने पर पूरा तिमुरे गांव बाढ़ और मलबे के कारण लगभग दिखाई ही नहीं दे रहा था।

पुलिस और सेना की टीमें राहत और बचाव कार्य में लगीं
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने कहा कि बचाव और राहत टीमों के साथ-साथ पुलिस और सेना को भी मदद के काम में लगाया गया है। उन्होंने कहा, "निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाने के निर्देश दिए गए हैं।" सरकार ने अपने बयान में कहा, "नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सलाह दी जाती है कि वे ज्यादा सावधानी बरतें और सतर्क रहें।"

28 पुलिसकर्मी लापता
इस बाढ़ के कारण सुरक्षा बल के 28 जवान लापता हो गए हैं। जिन 28 सुरक्षाकर्मियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है, उनमें से 19 नेपाल पुलिस के हैं और नौ आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) के हैं।

बागमती प्रांत पुलिस कार्यालय के अनुसार, रसुवागढ़ी पुलिस पोस्ट पर तैनात 22 पुलिसकर्मियों में से 13 से संपर्क नहीं हो पा रहा है, जबकि नौ से संपर्क हो गया है। स्याब्रूबेसी इलाके में नौ पुलिसकर्मियों में से तीन से संपर्क हो गया है, जबकि छह से अभी भी संपर्क नहीं हो पाया है।

इसी तरह तिमुरे बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) पर तैनात एपीएफ के नौ जवान भी संपर्क से बाहर हैं।

भोटे कोशी नदी तिब्बत से निकलती है और नेपाल की त्रिशूली नदी में मिलती है, जो आगे चलकर भारत में गंडक नदी के रूप में बहती है। पिछले साल भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ से नौ लोगों की मौत हो गई थी और 24 लोग लापता हो गए थे। साथ ही नेपाल और चीन को जोड़ने वाला फ्रेंडशिप ब्रिज भी बह गया था, जिससे कई महीनों तक ट्रांसपोर्ट और व्यापार ठप रहा था।

बचाव अभियान शुरू
नेपाल सेना ने त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में खोज एवं बचाव अभियान चलाने के लिए दो हेलीकॉप्टर भेजे हैं। सेना ने एक बयान में बताया कि इमरजेंसी मेडिकल बचाव दल से लैस एक MI-17 हेलीकॉप्टर को त्रिशूली स्थित जिला अस्पताल की ओर रवाना किया गया है। हालांकि, नेपाल सेना ने कहा कि भीषण बाढ़ से हुए नुकसान का पूरा ब्योरा अभी उपलब्ध नहीं हुआ है। नुकसान से संबंधित आंकड़े जुटाने का काम जारी है।

नेपाल सरकार ने बचाव कार्यों को तेज कर दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, बचाव और राहत कार्यों में मदद के लिए नेपाल सेना, आर्म्ड पुलिस फोर्स और नेपाल पुलिस के जवानों को रसुवा और आसपास के जिलों में तैनात किया गया है। आपको बता दें कि इससे ठीक एक साल पहले भोटेकोशी में आई बाढ़ में भारी तबाही हुई थी। रसुवा में कम से कम 10 लोगों की मौत हुई थी।

शांत नदी ने अचानक लिया रौद्र रूप

पहले वीडियो में नदी का बहाव शुरुआत में बेहद सामान्य और शांत नजर आता है. पहाड़ों के बीच बह रही नदी को देखकर अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता कि कुछ ही देर में यहां कितना खतरनाक सैलाब आने वाला है.अचानक नदी का जलस्तर और बहाव तेजी से बढ़ता दिखाई देता है. देखते ही देखते पानी का वेग इतना बढ़ जाता है कि उसके रास्ते में आने वाली चीजें टिक नहीं पातीं। 

पहाड़ों से निकला ‘धुआं’ और फिर सैलाब
दूसरे वीडियो में पहाड़ों के बीच का इलाका दिखाई देता है. शुरुआत में सब कुछ शांत नजर आता है, लेकिन अचानक पहाड़ों के बीच से धुएं जैसी सफेद परत निकलती दिखाई देती है. कुछ ही पलों में यह धुंधनुमा दृश्य तेज पानी के बहाव में बदल जाता है. पानी तेजी से नीचे की ओर आता है और अपने रास्ते में मौजूद क्षेत्र को अपनी चपेट में लेता दिखाई देता है. वीडियो बाढ़ की अचानक शुरुआत और उसकी रफ्तार को बेहद करीब से दिखाता है। 

ताश के पत्तों की तरह बहती इमारतें
इस वीडियो में बाढ़ के बाद की तबाही दिखाई देती है. तेज पानी के बीच घर और दूसरी इमारतें बुरी तरह क्षतिग्रस्त नजर आती हैं. कुछ संरचनाएं ऐसे बहती दिखाई देती हैं, जैसे वे ताश के पत्तों से बनी हों. आवाज से ऐसा प्रतीत होता है कि आसपास मौजूद लोग घबराए हुए हैं. पानी के तेज बहाव के कारण पूरा इलाका मलबे में तब्दील होता नजर आता है. ये दृश्य बताते हैं कि अचानक आई बाढ़ ने सिर्फ नदी किनारे के इलाकों को ही नहीं, बल्कि बाजार और रिहायशी क्षेत्रों को भी प्रभावित किया है। 

 

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