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पटना
पटना से मुजफ्फरपुर के बीच सफर को तेज और सुगम बनाने की दिशा में काम शुरू हो गया है। दोनों शहरों के बीच हाजीपुर के रास्ते क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी है। इसके लिए वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट (एएआर) और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है।

इसकी जिम्मेदारी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) को दी गई है। एनसीआरटीसी की टीम ने अध्ययन शुरू कर दिया है।

प्रस्तावित आरआरटीएस दिल्ली-एनसीआर में संचालित क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट व्यवस्था की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। यह मेट्रो से अलग व्यवस्था होगी, जिसका उद्देश्य लंबी दूरी के यात्रियों को कम समय में एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचाना है

कॉरिडोर बनने से पटना, हाजीपुर और मुजफ्फरपुर के बीच आवागमन आसान होने के साथ ही तीनों क्षेत्रों के प्रमुख औद्योगिक इलाकों को भी बेहतर परिवहन सुविधा मिल सकेगी।

यात्रियों की संख्या के आधार पर तय होगा रूट
एएआर तैयार करने के दौरान सबसे पहले पटना, हाजीपुर और मुजफ्फरपुर के बीच रोजाना आवागमन करने वाले यात्रियों की संख्या का आकलन किया जाएगा।

यह भी देखा जाएगा कि किन क्षेत्रों से सबसे अधिक यात्री मिल सकते हैं। यात्रियों की संभावित संख्या के आधार पर आरआरटीएस के रूट और स्टेशन तय किए जाएंगे।

इसके साथ ही जमीन की उपलब्धता, निर्माण लागत, तकनीकी विकल्प और मौजूदा यातायात दबाव का भी अध्ययन किया जाएगा। प्रस्तावित सोनपुर एयरपोर्ट तक आरआरटीएस की कनेक्टिविटी की संभावना का भी अध्ययन रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।

मेट्रो और रेलवे से जुड़ेगा आरआरटीएस
नगर विकास विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार आरआरटीएस के स्टेशनों को पटना मेट्रो, रेलवे स्टेशनों, बस टर्मिनल और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों से जोड़ने की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।

इसका उद्देश्य एक ऐसा एकीकृत परिवहन नेटवर्क तैयार करना है, जहां यात्री आसानी से एक परिवहन माध्यम से दूसरे माध्यम पर पहुंच सकें।

बिहार में चार आरआरटीएस कॉरिडोर की योजना
राज्य सरकार ने बिहार में आरआरटीएस के चार कॉरिडोर विकसित करने की दिशा में जुलाई में निर्णय लिया था। राज्य मंत्रिमंडल ने आठ जुलाई की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

इसी दौरान एएआर और डीपीआर तैयार कराने की भी स्वीकृति दी गई थी। दोनों रिपोर्ट तैयार करने पर करीब 31.59 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

पटना-मुजफ्फरपुर कॉरिडोर इसी व्यापक योजना का हिस्सा है। आरआरटीएस की औसत परिचालन गति करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटा और अधिकतम गति 160 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है।

परियोजना पूरी होने के बाद पटना से मुजफ्फरपुर का सफर मौजूदा समय की तुलना में करीब आधा रह जाने की उम्मीद है।

 

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