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असम, बंगाल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और केरल की रामकथा आधारित लोककलाओं का भी होगा प्रदर्शन, स्थानीय लोक संस्कृति में करेंगे रामलीला का चित्रण

अयोध्या
रामनगरी अयोध्या के दसवें दीपोत्सव में दुनिया के अलग-अलग देशों की सांस्कृतिक विरासत और रामकथा की वैश्विक स्वीकार्यता की झलक देखने को मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में आयोजित होने वाले इस दीपोत्सव में तीन देशों की चार रामलीला टीमें अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक शैलियों में भगवान श्रीराम की कथा का मंचन करने के लिए तैयार हैं। दक्षिण अफ्रीका की दो टीमों के अलावा श्रीलंका और लाओस के कलाकार रामलीला की प्रस्तुति देंगे। वहीं, देश-विदेश के लगभग 2500 कलाकार 12 मंचों पर अपनी कला और सांस्कृतिक परंपराओं से दर्शकों को परिचित कराएंगे।

इस बार दक्षिण अफ्रीका की रामलीला विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। वर्षों पहले गिरमिटिया मजदूर के रूप में भारत से दक्षिण अफ्रीका गए लोगों ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी संस्कृति, परंपराओं और रामकथा से जुड़ाव बनाए रखा। उन्होंने न केवल अपनी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाया, बल्कि वहां के स्थानीय समाज को भी भारतीय परंपराओं और रामकथा से जोड़ा। लंबे समय तक अभ्यास और सांस्कृतिक साधना के बाद दक्षिण अफ्रीका के कलाकार अब अयोध्या पहुंचकर अपनी कला के माध्यम से रामलीला का मंचन करेंगे। यह प्रस्तुति भारतवंशियों के सांस्कृतिक जुड़ाव और रामकथा की सीमाओं से परे पहुंच को प्रदर्शित करेगी। एक टीम रामचरितमानस का गायन करेगी तो दूसरी टीम रामलीला का मंचन करेगी।

अलग-अलग देशों की संस्कृति और रामलीला शैली का दिखेगा संगम
दीपोत्सव में श्रीलंका और लाओस के कलाकार भी अपनी-अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के अनुरूप रामलीला प्रस्तुत करेंगे। अलग-अलग देशों की भाषाओं, वेशभूषा, संगीत, नृत्य और अभिनय शैलियों में रामकथा का स्वरूप दर्शकों के लिए खास अनुभव होगा। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से यह देखने का अवसर मिलेगा कि भगवान श्रीराम की कथा ने विभिन्न देशों की लोकसंस्कृतियों में किस तरह अपनी जगह बनाई है। दक्षिण अफ्रीका की दो टीमों की भागीदारी इस अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आयोजन को और विशिष्ट बनाएगी।

12 मंचों पर 2500 कलाकार बिखेरेंगे सांस्कृतिक छटा
संस्कृति विभाग की ओर से दीपोत्सव के लिए छह लघु, चार मध्यम और दो दीर्घ मंच तैयार कराए जा रहे हैं। कुल 12 मंचों पर लगभग 2500 भारतीय और विदेशी कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। पांच राज्यों के कलाकार भी आयोजन में सहभागिता करेंगे। असम, बंगाल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और केरल के कलाकार श्रीराम चरित्र एवं रामकथा पर आधारित लोकनृत्य, संगीत और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। राज्यों से आए कलाकार स्थानीय लोक संस्कृति में रामलीला का चित्रण करेंगे। इस प्रकार दीपोत्सव में देश के विभिन्न क्षेत्रों की लोककलाओं और अंतरराष्ट्रीय रामलीला परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

अंतरराष्ट्रीय पहचान के साथ स्थानीय कलाकारों को भी मिलेगा अवसर
अयोध्या अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के सलाहकार एवं विशेष कार्याधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि देश-विदेश के कलाकारों की भागीदारी से दीपोत्सव की सांस्कृतिक विविधता और आकर्षण बढ़ेगा। विभिन्न देशों की रामलीला और राज्यों की रामकथा आधारित प्रस्तुतियां आयोजन को व्यापक सांस्कृतिक मंच प्रदान करेंगी। लगभग 2500 कलाकारों की सहभागिता से रामनगरी में विविध संस्कृतियों का जीवंत स्वरूप दिखाई देगा। इससे स्थानीय कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर मिलेगा। साथ ही, विदेशी कलाकारों की भागीदारी से अयोध्या की अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी तथा पर्यटन से जुड़े कारोबारियों को लाभ मिलने की संभावना है।

धार्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र
राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या की पहचान धार्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में भी तेजी से व्यापक हुई है। विभिन्न देशों की रामलीला के जरिए भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा और जीवन दर्शन को अलग-अलग सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों में प्रस्तुत किया जाएगा।

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