अड़ानी समूह को 1400 हेक्टेयर वन भूमि आवंटन के बाद तेज़ी से हो रही पेड़ों की कटाई, स्थानीय आदिवासी समुदाय की आजीविका संकट में
गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के दूरस्थ देवसर विकासखंड में स्थित धिरौली जंगल इन दिनों भारी संकट में है। सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी डॉ. एसपीएस तिवारी ने आरोप लगाया है कि अड़ानी समूह को कोयला उत्खनन के लिए 1400 हेक्टेयर वन भूमि आवंटित करने के बाद यहाँ लगभग 6 लाख परिपक्व पेड़ों की कटाई का रास्ता खोल दिया गया है।
अब तक 40,000 पेड़ काटे जा चुके हैं, जिन्हें तिवारी ने “जघन्य हत्या” बताया।
साल वनों का विनाश—आदिवासी आजीविका पर सीधा प्रहार
धिरौली का जंगल विंध्य क्षेत्र का प्राकृतिक ऑक्सीजन बैंक माना जाता है। यहाँ के पेड़ों में—
- साल,
- महुआ,
- चिरौंजी,
- आंवला,
- तेंदू,
- बीजा,
- हर्रा–बहेड़ा
जैसी प्रजातियाँ शामिल हैं, जो स्थानीय आदिवासी और वनवासी समुदायों की आजीविका का मुख्य आधार हैं।
तिवारी का कहना है कि “इन वनों ने हजारों वर्षों में एक समृद्ध इकोसिस्टम का रूप लिया है, जिसे किसी भी कीमत पर दोबारा नहीं बनाया जा सकता।”
जंगल की जैव विविधता में विभिन्न कीट-पतंगे, पक्षी, सरीसृप, शाकाहारी जीव, और बाघ तक मौजूद हैं। कटाई के बाद हजारों जीवों का घर उजड़ गया है।
“जंगल में उदासी थी… परिवार के सदस्य काटे जा रहे थे”—तिवारी की जमीनी रिपोर्ट
डॉ. तिवारी 10 दिसंबर को कांग्रेस की फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी के साथ मौके पर पहुँचे।
वे बताते हैं—
“जंगल के रास्ते जाते समय पेड़ों में अजीब उदासी महसूस हुई। शायद इसलिए कि उनके परिवार के सदस्य काटे जा रहे थे। मूक जीव-जंतु सन्नाटे में अपना दुख बयां कर रहे थे।”
स्थानीय लोगों ने बताया कि कोयला धूल के कारण—
- खाना-पीना दूभर हो गया है,
- खेतों की फसलें सूख चुकी हैं।
नियमों का उल्लंघन?—PAESA अधिनियम और 5वीं अनुसूची पर सवाल
डॉ. तिवारी का आरोप है कि आदिवासी हितों की रक्षा के लिए बने
- पेसा अधिनियम,
- वनाधिकार अधिनियम,
- 5वीं अनुसूची
को दरकिनार कर खदान स्वीकृत की गई।
लोकसभा में 9 अगस्त 2023 को बताया गया था कि धिरौली–बांधा क्षेत्र 5वीं अनुसूची में शामिल है और खदान का निर्णय ग्राम सभा की सहमति के बाद ही लिया जा सकता है।
लेकिन बाद में विधानसभा में बताया गया कि यह क्षेत्र अब 5वीं अनुसूची में नहीं है—
तिवारी पूछते हैं:
- ग्राम सभा में प्रस्ताव कहाँ पारित हुआ?
- डीनोटिफिकेशन आदेश कहाँ है?
- किस नियम के तहत अनुसूची बदली गई?
तिवारी का सवाल—“सत्ता में आ भी गए, तो आने वाली पीढ़ी को क्या दे कर जाएँगे?”
उनका कहना है—
“मानवजाति ने कोरोना में सीखा था कि ऑक्सीजन का महत्व क्या है। लेकिन सत्ता का नशा एक बार फिर जंगल काटकर अपने ही पैरों में कुल्हाड़ी मारने को तैयार है।”

