गणेश पाण्डेय, भोपाल। देश के प्रतिष्ठित बाघ अभयारण्यों में गिने जाने वाले बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में टाइगर मैनेजमेंट एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पतौर स्थित बठान एंक्लोजर में रखी गई बिन मां की 8 महीने की मादा बाघ शावक मंगलवार को अचानक फरार हो गई। घटना के बाद टाइगर रिजर्व प्रशासन में हड़कंप मच गया है और हाथियों के दल के जरिए जंगल में शावक की तलाश की जा रही है।
बताया गया है कि इस शावक की मां की अक्टूबर में खतौली क्षेत्र में करंट लगने से मौत हो चुकी थी। इसके बाद दोनों अनाथ शावकों को पतौर के छोटे एंक्लोजर में रखा गया था। अब यही एंक्लोजर प्रबंधन की सबसे बड़ी कमजोरी बनकर सामने आया है।
अधिकारियों के निर्देश और उसी दौरान चूक
सूत्रों के अनुसार, एपीसीसीएफ एल. कृष्णामूर्ति तीन दिन पहले ही बांधवगढ़ दौरे पर आए थे। उन्होंने फील्ड डायरेक्टर डॉ. अनुपम सहाय को निर्देश दिए थे कि दोनों शावकों को छोटे एंक्लोजर से हटाकर बड़े बाड़े में शिफ्ट किया जाए, क्योंकि सीमित जगह में शावक घुटन और बेचैनी महसूस कर रहे थे।
विडंबना यह रही कि शिफ्टिंग की तैयारी के दौरान ही मादा शावक फरार हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शावक पहले पिंजरे (केज) पर चढ़ा, फिर उसकी छत पर पहुंचा और वहां से छलांग लगाकर जंगल में चला गया। निगरानी में तैनात कर्मचारी देखते ही रह गए।
मौत का मंडराता खतरा: सोन कुत्ते और नर बाघ
एंक्लोजर से बाहर निकलते ही इस नन्ही शावक पर मौत का साया मंडराने लगा है। सबसे बड़ा खतरा सोन कुत्तों (वाइल्ड डॉग्स) से है। महज दो दिन पहले ही ताला रेंज के इसी पतौर क्षेत्र के आसपास सोन कुत्तों का आक्रामक झुंड देखा गया था, जो झुंड में हमला करने के लिए कुख्यात हैं।
इसके अलावा रिजर्व में मौजूद वयस्क नर बाघ (टेरिटोरियल मेल्स) भी इस शावक के लिए खतरा बन सकते हैं। भूख, शिकार करने में अक्षम होना और जंगल का अनुभव न होना—ये तीनों स्थितियां इस 8 माह की शावक को सीधे मौत के मुहाने पर ले जाती दिख रही हैं।
सुरक्षा घेरा या लापरवाही का कफन?
जिस एंक्लोजर को इस अनाथ शावक की सुरक्षा का कवच माना जा रहा था, वही अब प्रबंधन की लापरवाही का प्रतीक बन गया है। रेंजर स्तर के अधिकारी मान रहे हैं कि फेंसिंग महज 5 फीट ऊंची थी और केज को बाड़े के बेहद पास रख दिया गया, जिससे शावक को बाहर निकलने का रास्ता मिल गया।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि पूरी तरह शिकार करना न सीख पाने वाले शावक को खुले जंगल में छोड़ देना उसे मौत की ओर धकेलने जैसा है।
क्या कहते हैं अधिकारी
एपीसीसीएफ एल. कृष्णामूर्ति ने कहा,
“मैं तीन दिन पहले ही लौट चुका हूं। मैंने फील्ड डायरेक्टर को शावकों को जल्द शिफ्ट करने के निर्देश दिए थे।”
वहीं, डिप्टी डायरेक्टर प्रकाश वर्मा ने कहा,
“शावक की शिफ्टिंग की प्रक्रिया चल रही थी। जहां शिफ्ट किया जाना था, वहां सफाई कराई जा रही थी। उससे पहले ही शावक कैज पर चढ़ा और छत से होते हुए जंगल में कूद गया। हाथियों के दल से तलाश जारी है, पगमार्क मिले हैं और जल्द ही उसे सुरक्षित पकड़ लिया जाएगा।”
सवालों के घेरे में टाइगर मैनेजमेंट
लगातार हो रही घटनाओं ने एक बार फिर बांधवगढ़ के टाइगर मैनेजमेंट की तैयारियों और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस नन्ही शावक को समय रहते सुरक्षित बचा पाता है या नहीं—क्योंकि हर गुजरता घंटा उसके लिए खतरा बढ़ा रहा है।
