छिंदवाड़ा–सिवनी में 12 किमी से अधिक मार्ग पर वृक्षारोपण, अयोध्या बायपास पर 81 हजार पौधे लगेंगे, 5 से 15 साल तक होगी देखरेख
गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश वन विकास निगम को आर्थिक संक्रमण के दौर में नई संजीवनी मिली है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने छिंदवाड़ा और सिवनी जिलों में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और उनके रख-रखाव की जिम्मेदारी निगम को सौंपी है। इस परियोजना से निगम को लगभग 7 से 8 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी।
इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे हरियाली बढ़ाना, प्रदूषण कम करना और पर्यावरणीय संतुलन को सुदृढ़ करना है। यह परियोजना केंद्र सरकार के ‘ग्रीन नेशनल हाइवे’ लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
किन मार्गों पर होगा वृक्षारोपण
वन विकास निगम के प्रबंध संचालक एच.यू. खान ने बताया कि निगम सड़क किनारे, मीडियन और एनएचएआई की खाली भूमि पर पौधारोपण करेगा। इसके तहत—
राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 347 (मुलताई–छिंदवाड़ा खंड),
राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 547 (सावनेर–छिंदवाड़ा एवं छिंदवाड़ा रिंग रोड),
छिंदवाड़ा–नरसिंहपुर खंड (एनएच-44),
सिवनी राउंडअबाउट,
बालाघाट–गोंदिया राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 543 के टोल प्लाजा एवं रोटरी क्षेत्र
में वृक्षारोपण किया जाएगा। कुल मिलाकर 12 किलोमीटर से अधिक मार्ग पर पौधे लगाए जाएंगे और उनकी देखरेख की जाएगी।
पांच साल तक निगम करेगा संरक्षण
इस परियोजना की अवधि पांच वर्ष निर्धारित की गई है। निगम न केवल पौधारोपण करेगा, बल्कि पौधों की सुरक्षा, सिंचाई, खाद और संरक्षण की पूरी जिम्मेदारी भी निभाएगा, ताकि अधिकतम पौधे जीवित रह सकें और हरित पट्टी का स्थायी विकास हो सके।
अयोध्या बायपास पर 81 हजार पौधे
भोपाल में अयोध्या बायपास के चौड़ीकरण के दौरान काटे जाने वाले पेड़ों की क्षतिपूर्ति के लिए एनएचएआई ने विशेष वृक्षारोपण योजना तैयार की है। इसके तहत—
अयोध्या बायपास के दोनों ओर 10,000 पौधे,
और आसपास के क्षेत्रों में कुल 81,000 से अधिक पौधे लगाए जाएंगे।
इन पौधों की 15 वर्षों तक देखरेख की जिम्मेदारी एनएचएआई स्वयं उठाएगा, जिससे दीर्घकालीन हरियाली सुनिश्चित की जा सके।
पर्यावरण और रोजगार दोनों को लाभ
इस परियोजना से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। नर्सरी, रख-रखाव, सिंचाई और सुरक्षा कार्यों में बड़ी संख्या में श्रमिकों को काम मिलेगा।
राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे हरियाली बढ़ाने की यह पहल मध्यप्रदेश को ‘ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर’ की दिशा में आगे बढ़ाएगी। वन विकास निगम और एनएचएआई की साझेदारी से सड़कें केवल यातायात मार्ग नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की जीवंत मिसाल बनेंगी।
