सघन वन एवं समृद्ध वन्यप्राणी संरक्षण की प्रस्तुति से प्रभावित हुए राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, डीएफओ भोपाल व टीम पुरस्कृत
गणेश पाण्डेय, भोपाल। गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर मध्यप्रदेश की सघन वन संपदा और समृद्ध वन्यप्राणी विरासत पर आधारित झांकी को विशेष सम्मान मिला। वन मंडल भोपाल के डीएफओ लोकप्रिय भारती के नेतृत्व में प्रस्तुत इस झांकी की सराहना करते हुए राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संयुक्त रूप से डीएफओ भोपाल और उनकी टीम को सम्मानित किया।
झांकी की विषयवस्तु, प्रस्तुति और संदेश से दोनों संवैधानिक पदों पर आसीन नेतृत्व अभिभूत नजर आया। इसे मध्यप्रदेश की वैज्ञानिक वन प्रबंधन व्यवस्था और प्रभावी वन्यजीव संरक्षण नीति का सशक्त उदाहरण बताया गया।
सघन वन और समृद्ध वन्यप्राणी की प्रभावी प्रस्तुति
झांकी के प्रथम भाग में मध्यप्रदेश में स्थापित सघन वन क्षेत्रों और समृद्ध वन्यप्राणी संपदा को दर्शाया गया। बेहतर वैज्ञानिक प्रबंधन और आधुनिक निगरानी प्रणाली के चलते मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट के साथ-साथ लेपर्ड स्टेट, वल्चर स्टेट, वॉल्फ स्टेट, चीता स्टेट और घड़ियाल स्टेट का दर्जा प्राप्त हुआ है। इस भाग में मध्यप्रदेश को देश में वन एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में प्रस्तुत किया गया।
विकसित मध्यप्रदेश @2047 की परिकल्पना
झांकी के द्वितीय भाग में विकसित एवं समृद्ध मध्यप्रदेश @2047 की परिकल्पना को उकेरा गया। इसमें बीते दो वर्षों में राज्य सरकार की दूरदर्शी नीतियों के परिणामस्वरूप स्थापित और अधिसूचित किए गए प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों को दर्शाया गया। इनमें डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर टाइगर रिजर्व (रातापानी, रायसेन), माधव टाइगर रिजर्व (शिवपुरी), रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही, सागर) के साथ-साथ डॉ. भीमराव अंबेडकर अभयारण्य (सागर), जहानगढ़ अभयारण्य (श्योपुर) और ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व (बैतूल) शामिल हैं।
वन संरक्षण और विकास का संतुलन
राज्यपाल और मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया यह सम्मान इस बात का संकेत है कि मध्यप्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और विकास को साथ-साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। झांकी ने यह संदेश दिया कि जैव विविधता का संरक्षण राज्य की प्राथमिकता है और इसी सोच के साथ मध्यप्रदेश भविष्य की ओर अग्रसर है। गणतंत्र दिवस पर मिला यह सम्मान राज्य की वन नीति, संरक्षण प्रयासों और दूरदर्शी दृष्टिकोण की सार्वजनिक मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।
