गणेश पाण्डेय, भोपाल। वन्य प्राणी विशेषज्ञ एवं रिटायर्ड आईएफएस राम गोपाल सोनी का मत है कि राज्य वन्य प्राणी बोर्ड का निर्णय बगदरा अभ्यारण्य 478 वर्ग किलोमीटर को सेंचुरी का दर्जा खत्म कर सामान्य वन में बदलने के निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। यह बांधवगढ़ से संजय दुबरी कारिडोर है। इधर चित्रकूट से लगे वनों की विस्तृत श्रृंखला से भी जुड़ता है सोन नदी के किनारे है।
वन्य प्राणी विशेषज्ञ सोनी का कहना है कि काला हिरण का महत्वपूर्ण क्षेत्र है जैव विविधता से सम्रद्ध है। यहां से बनारस और प्रयागराज 150 से 170 किलोमीटर दूर है बेहतरीन मार्ग बन गए है । इसे सुरक्षा दिया जाए तो यहां से बांधवगढ़ और संजय दोनों तरफ जा सकते है। रिवराइन वनस्पति है। सरकार को इसका विस्तृत अध्ययन कराना चाहिए कि क्यों अभ्यारण्य नही होना चाहिए। वैसे तो इसको भारत सरकार डीनोटिफाई नही कर पायेगी। सोनी का मानना है कि इसको अधिक सुरक्षित रखने के बजाय इसको समाप्त करने का निर्णय उचित नही है। मेरे मत में तो बगदरा को संजय टाइगर रिज़र्व में जोड़ना चाहिए और यह क्षेत्र कृष्ण मृग का क्षेत्र है तो नौरादेही के बजाय यहां पर चीते लाना चाहिए। चीतों का क्षेत्र संजय टाइगर रिजर्व से ही तो लगा था जहां अंतिम चीते पाए गए थे। बगदरा में शिकार के कारण वन्य प्राणी कम हुए होंगे लेकिन यह सम्रद्ध क्षेत्र है। इस पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। यह भी कथन उचित नही है कि अन्य क्षेत्रों में काले हिरण बहुत है तो इसकी जरूरत नही है । हर क्षेत्र की जैव विविधता जरूरी है।
