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विधानसभा में मनरेगा पर तीखी बहस, प्रताप ग्रेवाल ने रोजगार, बजट कटौती और नाम परिवर्तन पर उठाए सवाल

गणेश पाण्डेय, भोपाल। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को लेकर विधानसभा में विस्तृत चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने सरकार पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पिछले छह वर्षों में एक प्रतिशत मजदूरों को भी पूरे 100 दिन का रोजगार नहीं मिल पाया है, जबकि योजना का मूल उद्देश्य ग्रामीण बेरोजगारी को कम करना था।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल द्वारा सदन में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार:

  • वर्ष 2021 में 1 करोड़ 70 लाख 19 हजार 681 मजदूर पंजीकृत थे, लेकिन केवल 1 लाख 23 हजार 624 परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिला।
  • वर्ष 2022 में 1 करोड़ 81 लाख 42 हजार 207 मजदूर पंजीकृत, जिनमें से सिर्फ 63 हजार 898 परिवार 100 दिन तक काम कर सके।
  • वर्ष 2023 में 40 हजार 588 परिवार,
  • वर्ष 2024 में 30 हजार 420 परिवार,
  • और वर्ष 2025 में मात्र 32 हजार 560 परिवारों को ही 100 दिन रोजगार मिला।

ग्रेवाल ने कहा कि जब प्रदेश में 98 लाख से अधिक जॉब कार्डधारी परिवार पंजीकृत हैं, तब 100 दिन रोजगार पाने वालों की संख्या बेहद कम होना चिंताजनक है।

150 दिन रोजगार का प्रावधान, जमीनी हकीकत अलग

वनाधिकार पट्टा धारकों को वर्ष में 150 दिन रोजगार देने का प्रावधान है, लेकिन वर्ष 2025-26 में 24 जिलों में एक भी मजदूर को 150 दिन का रोजगार नहीं मिला।

  • झाबुआ में 150 दिन रोजगार का आंकड़ा शून्य रहा।
  • अलीराजपुर में 112 परिवार,
  • छिंदवाड़ा में 28,
  • धार में 21,
  • मंडला में 17,
  • दमोह में 16 परिवारों को ही यह अवसर मिला।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में 33.72 प्रतिशत मनरेगा मजदूर आदिवासी वर्ग से हैं, लेकिन आदिवासी बहुल जिलों में ही रोजगार का संकट गहरा है।

रोजगार की मांग घटी नहीं, अवसर घटे

कोविड काल के दौरान वर्ष 2021-22 में 61 लाख 66 हजार 780 परिवारों के 1 करोड़ 21 लाख 95 हजार 233 श्रमिकों ने रोजगार की मांग की थी।
इसके बाद भी लाखों परिवारों को अपेक्षित कार्य नहीं मिला।

  • वर्ष 2022-23 में 53 लाख परिवारों ने मांग रखी,
  • वर्ष 2023-24 में 46 लाख से अधिक परिवारों ने,
  • वर्ष 2024-25 में 44 लाख से अधिक परिवारों ने,
  • वर्ष 2025-26 में 42 लाख से अधिक परिवारों ने रोजगार मांगा।

इसके बावजूद औसत कार्य दिवस लगातार घटे।

मानव दिवस और बजट में गिरावट

  • वर्ष 2020-21 में 34.17 करोड़ मानव दिवस सृजित हुए थे, जो वर्ष 2024-25 में घटकर 18.96 करोड़ रह गए।
  • प्रति जॉब कार्डधारी परिवार को औसतन 61.84 दिन से घटकर 49.13 दिन ही रोजगार मिला।
  • योजना पर व्यय राशि 9338.68 करोड़ से घटकर 6731.57 करोड़ हो गई।
  • केंद्रांश भी 8453 करोड़ से घटकर 6226 करोड़ रह गया।

ग्रेवाल ने आरोप लगाया कि जो सीमित रोजगार मिल रहा है, उसका भुगतान भी समय पर नहीं किया जा रहा।

कोविड काल में जॉब कार्ड से नाम विलोपन

ग्रेवाल ने कहा कि कोविड के समय जब रोजगार की सर्वाधिक आवश्यकता थी, तब बड़ी संख्या में नाम जॉब कार्ड से हटाए गए। मंत्री द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार:

  • वर्ष 2021 में 10 लाख 46 हजार 786 परिवारों के नाम हटाए गए।
  • वर्ष 2022 में 1 लाख 71 हजार,
  • वर्ष 2023 में 5 लाख 28 हजार,
  • वर्ष 2024 में 45 हजार,
  • वर्ष 2025 में 25 हजार से अधिक परिवारों के नाम सूची से हटाए गए।

नाम परिवर्तन और 125 दिन का वादा

ग्रेवाल ने कहा कि योजना का नाम बदलकर ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ करना और 100 दिन के स्थान पर 125 दिन रोजगार का वादा करना वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता। उन्होंने आरोप लगाया कि जब 100 दिन का लक्ष्य ही पूरा नहीं हुआ, तब 125 दिन का दावा जनता के साथ छलावा है। सदन में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विपक्ष ने कहा कि रोजगार की मांग लगातार बनी हुई है, लेकिन सरकार पर्याप्त काम उपलब्ध कराने में असफल है और ग्रामीण मजदूर पलायन को मजबूर हैं।