वन्य प्राणी एक्टिविस्ट ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, नियुक्ति पर पुनर्विचार की मांग
पीसीसीएफ (वन्यजीव) पद से हटाकर एपीओ में रखने की अपील, अवैध निर्माण से लेकर शिकार मामलों तक लगाए आरोप
गणेश पाण्डेय, भोपाल। राज्य सरकार द्वारा वन विभाग में शीर्ष पद पर प्रस्तावित नियुक्ति से पहले ही विवाद गहरा गया है। वन्य प्राणी एक्टिविस्ट अजय दुबे ने मुख्यमंत्री को विस्तृत पत्र लिखकर 1991 बैच के आईएफएस अधिकारी शुभ रंजन सेन के नाम पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया है कि सेन को तत्काल प्रभाव से पीसीसीएफ (वन्यजीव) पद से हटाकर “पोस्टिंग आदेश की प्रतीक्षा” (एपीओ) में रखा जाए, ताकि आरोपों की निष्पक्ष जांच संभव हो सके।
पत्र में कहा गया है कि सेन का वर्तमान पद पर बने रहना वन्यजीव संरक्षण तंत्र की विश्वसनीयता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। दुबे ने अपने आरोपों के समर्थन में विस्तृत तथ्यों और दस्तावेज उपलब्ध कराने की बात भी कही है।
पेंच टाइगर रिजर्व में कथित अनियमितताएं
पत्र में वर्ष 2015 के उस प्रकरण का उल्लेख किया गया है, जब सेन क्षेत्रीय निदेशक के रूप में पदस्थ थे। आरोप है कि टाइगर सफारी निर्माण कार्य केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की पूर्व अनुमति के बिना प्रारंभ किया गया। बाद में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की जांच में कोर और बफर क्षेत्र में निर्माण संबंधी अनियमितताओं की पुष्टि होने का दावा किया गया है।
दुबे ने यह भी कहा है कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश और राज्य स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं को स्वीकार किए जाने के बावजूद दोषियों के विरुद्ध अपेक्षित दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई।
वन्यजीवों की मौत और शिकार मामलों पर सवाल
पत्र में 2024 से 2026 के बीच बाघ, तेंदुए, हाथी और अन्य संरक्षित प्रजातियों की कथित रिकॉर्ड मृत्यु का हवाला दिया गया है। बालाघाट में शिकार किए गए बाघ के कथित साक्ष्य नष्ट करने तथा नर्मदापुरम में काले हिरण प्रकरण में गलत रिपोर्टिंग के आरोपों का उल्लेख किया गया है।
उमरिया और बांधवगढ़ से जुड़े मामलों में प्रशासनिक निगरानी की कमी और कानूनी प्रक्रियाओं में खामियों की बात भी कही गई है।
प्रशासनिक कदाचार और पदस्थापनाओं पर आपत्ति
एक्टिविस्ट ने आरोप लगाया है कि कुछ अधिकारियों को लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रखा गया तथा सेवा विस्तार और वित्तीय स्वीकृतियों में प्रक्रियागत पारदर्शिता नहीं बरती गई। टाइगर स्ट्राइक फोर्स की कार्यप्रणाली और अंतरराज्यीय तस्करी मामलों में निगरानी की कमी को भी गंभीर मुद्दा बताया गया है।
इसके अतिरिक्त, पेंच टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में कथित रूप से विशेष अनुमति देकर फिल्मांकन की अनुमति देने तथा अतिक्रमण मामलों में हस्तक्षेप जैसे आरोप भी पत्र में शामिल हैं।
निष्पक्ष जांच की मांग, सरकारी प्रतिक्रिया शेष
अजय दुबे ने प्रधानमंत्री की भ्रष्टाचार के प्रति ‘शून्य सहिष्णुता’ नीति का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार से निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यदि आरोप असत्य सिद्ध होते हैं तो वे परिणाम स्वीकार करेंगे, किंतु जांच आवश्यक है।
उधर, इन आरोपों पर शुभ रंजन सेन या वन विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि सरकार द्वारा लिया जाने वाला निर्णय तथ्यों और नियमों के अनुरूप होगा।
वन विभाग में शीर्ष स्तर पर संभावित नियुक्ति के बीच उठे ये आरोप प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र बन गए हैं। अब देखना यह है कि सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है।
