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 पटना

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की नई सरकार बनने से इसका सीधा और सकारात्मक असर पड़ोसी राज्य बिहार पर देखने को मिलेगा। देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में बंगाल फतह को केवल एक राजनीतिक जीत नहीं, बल्कि बिहार के दूरगामी हितों की जीत के रूप में भी देखा जा रहा है। बिहार में एनडीए की सरकार है और अब बंगाल में भी बीजेपी का मुख्यमंत्री होने से दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादित मुद्दों पर आसानी से सहमति बन सकेगी। इसका सबसे बड़ा फायदा बिहार के सीमावर्ती जिलों को मिलेगा।

घुसपैठ और तस्करी पर लगेगी रोक
बंगाल की ममता सरकार के दौरान बिहार को घुसपैठ के मुद्दे पर सहयोग नहीं मिल पा रहा था। इसी के कारण सीमावर्ती इलाकों में यह समस्या लगातार गंभीर हो रही थी। लेकिन अब केंद्र, बिहार और बंगाल- तीनों जगह समान विचारधारा वाली सरकार होने से घुसपैठियों के खिलाफ ठोस और संयुक्त कार्रवाई की जा सकेगी। इससे न केवल अवैध रूप से आने वाले लोगों पर नकेल कसेगी, बल्कि सीमा पर होने वाली तस्करी पर भी पूर्ण रूप से रोक लगेगी।

वाराणसी-कोलकाता सिक्स लेन परियोजना पकड़ेगी रफ्तार
उत्तर प्रदेश के वाराणसी से बिहार और झारखंड होते हुए कोलकाता तक बनने वाले महत्वाकांक्षी 'सिक्स लेन राष्ट्रीय राजमार्ग' को भी अब नई गति मिलेगी। ममता सरकार के कारण बंगाल की लगभग 285 किलोमीटर की इस परियोजना पर कोई ठोस काम नहीं हो सका था, जबकि यूपी, बिहार और झारखंड में प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। नई सरकार के आने से यह बाधा दूर होगी, जिसके बाद सड़क बनने पर बिहार से बंगाल का सफर सिर्फ 7 घंटे में तय किया जा सकेगा।

अपर महानंदा सिंचाई और फरक्का बराज पर सकारात्मक पहल
इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा जल बंटवारे के मामले में भी बिहार को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। 1978 के समझौते के तहत 'अपर महानंदा सिंचाई परियोजना' से जुड़ी 8 किलोमीटर लंबी नहर का काम अब रफ्तार पकड़ेगा। इससे 67 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई का पानी मिल सकेगा। वहीं, 1996 के समझौते के तहत फरक्का बराज से बांग्लादेश को पानी देने की बाध्यता पर भी राज्य सरकार ने पुनर्विचार का अनुरोध किया था। अब इस दिशा में अच्छी पहल होने की उम्मीद है, जिससे गंगा के पानी में बिहार की भागीदारी बढ़ सकेगी।

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