गणेश पाण्डेय, भोपाल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की “डिजिटल इंडिया” एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित सुशासन की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में म.प्र. वन विभाग ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। इसी कड़ी में धार में प्रदेश की पहली ‘एआई’ ट्रेनिंग शुरू की गई है। इससे वन कर्मचारियों की कार्यक्षमता में प्रतिदिन 3 घंटे तक की वृद्धि होगी।
धार वन मंडल द्वारा प्रदेश का पहला एआई फ्लुएंसी एंड एफिशिएंसी एनहांसमेंट प्रोग्राम (Al Fluency & Efficiency Enhancement Program) सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। तकनीक आधारित प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने वाला यह अपनी तरह का अभिनव प्रशिक्षण कार्यक्रम था, जिसका उद्देश्य शासकीय कार्यों को अधिक तेज, सरल एवं त्रुटिरहित बनाना है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस पहल से प्रतिवर्ष लगभग 8800 मानव-घंटों की बचत होने की संभावना है। इससे अधिकारी एवं कर्मचारी अपना बहुमूल्य समय आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान एवं बेहतर जनसेवा में लगा सकेंगे।कलेक्टर जिला धार एवं विजयानंथम टी.आर., वन मंडल अधिकारी धार के नेतृत्व में आयोजित इस 4 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में वन विभाग के 40 कर्मचारियों एवं कंप्यूटर ऑपरेटरों ने भाग लिया।

आयोजित प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को आधुनिक एआई (AI) तकनीकों का व्यावहारिक (Practical) प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को ChatGPT, Google Gemini, भारत सरकार के ‘भाषिणी’ ऐप, Google Workspace Al, Gamma एवं Google Studio जैसे उन्नत AI टूल्स के उपयोग से परिचित कराया गया। साथ ही शासकीय पत्राचार की ड्राफ्टिंग, फाइल नोटिंग, मीटिंग मिनटस तैयार करना, डेटा विश्लेषण, एक्सेल ऑटोमेशन एवं रिपोर्ट निर्माण जैसे कार्यों का लाइव प्रैक्टिकल अभ्यास भी कराया गया।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में कार्यप्रणाली की उत्पादकता
समापन समारोह को संबोधित करते हुए धार डीएफओ विजयानंथम टी.आर. ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में शासकीय कार्यप्रणाली की उत्पादकता बढ़ाने की अपार क्षमता है। हालांकि इसका उपयोग पूर्णतः नैतिक, सुरक्षित एवं जिम्मेदार तरीके से किया जाना आवश्यक है। अधिकारी एवं कर्मचारी इन तकनीकों को अपनाकर न केवल अपनी कार्यक्षमता बढ़ाएं, बल्कि विभागीय लक्ष्यों की प्राप्ति में भी अधिक प्रभावी योगदान दें। यह पहल म.प्र. वन विभाग में डिजिटल परिवर्तन एवं तकनीक संचालित सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी।
