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गणेश पाण्डेय, भोपालमध्यप्रदेश के दक्षिण पन्ना वनमण्डल में वन अग्नि प्रबंधन के क्षेत्र में देश का एक अभिनव और आधुनिक प्रयोग सामने आया है। शाहनगर वन परिक्षेत्र में पहली बार ड्रोन और फायर रिटार्डेंट के जरिए “एरियल फायर फाइटिंग” का प्रायोगिक प्रदर्शन किया गया। इस प्रयोग में ड्रोन की मदद से जंगल के ऊपर से विशेष रसायन का छिड़काव कर आग की तीव्रता कम करने की तकनीक का परीक्षण किया गया। वन विभाग के अनुसार यह देश में अपनी तरह के शुरुआती प्रयासों में शामिल है, जो भविष्य में जंगलों में लगने वाली भीषण आग से निपटने की दिशा बदल सकता है।

इस महत्वाकांक्षी पहल में राज्य वन अनुसंधान संस्थान (SFRI) ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया। अधिकारियों का कहना है कि ग्रीष्मकाल में दुर्गम और घने वन क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ती हैं, जहां समय पर वन अमले का पहुंचना बेहद कठिन हो जाता है। कई बार कर्मचारियों को सीधे आग के बीच जाकर काम करना पड़ता है, जिससे उनकी जान तक जोखिम में पड़ जाती है। ऐसे में ड्रोन आधारित तकनीक वन कर्मियों के लिए सुरक्षित और त्वरित विकल्प साबित हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान में अधिकांश वन क्षेत्रों में आग बुझाने के लिए फायर बीटिंग, काउंटर फायर और लीफ ब्लोअर जैसे पारंपरिक तरीकों का उपयोग किया जाता है। हालांकि इन तरीकों में समय अधिक लगता है और दुर्गम क्षेत्रों में प्रभाव सीमित रहता है। इसी चुनौती को देखते हुए वन विभाग ने आधुनिक तकनीक आधारित समाधान की दिशा में यह प्रयोग शुरू किया है।

ड्रोन से किया गया फायर रिटार्डेंट का छिड़काव

प्रयोग के दौरान ड्रोन के जरिए करीब 0.1 हेक्टेयर क्षेत्र में “मोनो अमोनियम फॉस्फेट” (MAP) आधारित फायर रिटार्डेंट का नियंत्रित छिड़काव किया गया। यह रसायन आग की तीव्रता कम करने और उसके फैलाव को रोकने में प्रभावी माना जाता है। अधिकारियों के मुताबिक ड्रोन तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह कम समय में दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचकर प्रारंभिक स्तर पर ही आग पर नियंत्रण स्थापित कर सकती है।

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वन विभाग ने स्पष्ट किया कि यह केवल तकनीकी प्रदर्शन नहीं बल्कि एक व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन का हिस्सा है। इसके अंतर्गत विभिन्न मौसमों में परीक्षण, फील्ड विजिट, मिट्टी और जल के नमूनों का विश्लेषण तथा पर्यावरणीय प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद ही इस तकनीक की वास्तविक उपयोगिता और व्यवहारिकता पर अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा।

वन कर्मियों की सुरक्षा बढ़ाने में मिल सकती है मदद

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ड्रोन अथवा हेलीकॉप्टर आधारित एरियल फायर फाइटिंग तकनीक वन कर्मियों के लिए सुरक्षा कवच साबित हो सकती है। वर्तमान में कई बार आग इतनी तेजी से फैलती है कि कर्मचारियों को सीधे लपटों के करीब पहुंचना पड़ता है। नई तकनीक से बिना जोखिम के ऊपर से आग नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है।

वन अधिकारियों के अनुसार यदि यह तकनीक वैज्ञानिक अध्ययन में सफल साबित होती है, तो इसका उपयोग दूरस्थ वन क्षेत्रों, तीव्र वनाग्नि परिस्थितियों और संवेदनशील वन्यजीव आवासों में बड़े स्तर पर किया जा सकेगा। इससे वन संपदा और जैव विविधता को होने वाले नुकसान को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

वन्यजीव संरक्षण में भी अहम साबित हो सकती है तकनीक

विशेषज्ञों के मुताबिक जंगलों में लगने वाली आग केवल पेड़ों को ही नहीं बल्कि वन्यजीवों के आवास, घास क्षेत्रों और जल स्रोतों को भी भारी नुकसान पहुंचाती है। कई बार दुर्लभ वन्यजीव आग की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में एरियल फायर फाइटिंग तकनीक संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।

वन विभाग ने इसे आधुनिक, वैज्ञानिक और उत्तरदायी वन अग्नि प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। विभाग का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है तो आने वाले वर्षों में देश के अन्य वन क्षेत्रों में भी इसे अपनाया जा सकता है।

प्रमुख बातें

  • देश में पहली बार ड्रोन आधारित एरियल फायर फाइटिंग का परीक्षण
  • शाहनगर वन परिक्षेत्र में किया गया प्रायोगिक प्रदर्शन
  • मोनो अमोनियम फॉस्फेट आधारित फायर रिटार्डेंट का उपयोग
  • 0.1 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रोन से छिड़काव
  • SFRI ने दिया तकनीकी सहयोग
  • वन कर्मियों की सुरक्षा और त्वरित प्रतिक्रिया पर फोकस
  • भविष्य में वन्यजीव आवासों में भी उपयोग की संभावना