8-9 साल के दबंग बाघ का मिला शव, युवा टाइगर डीएम या डी-1 से लड़ाई की आशंका
गणेश पाण्डेय, भोपाल। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से सोमवार को एक दुखद और चौंकाने वाली खबर आई। सैलानियों का चहेता और इलाके का दबंग टाइगर पुजारा की टेरिटरी फाइट में मौत हो गई। वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय रहा यह बाघ अब नहीं रहा। मृत बाघ की उम्र 8 से 9 वर्ष बताई जा रही है। जिस इलाके में पुजारा की मौत हुई, वहां डीएम और डी-1 नामक दो युवा और आक्रामक टाइगरों का भी मूवमेंट रहता है। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इन दोनों में से किसी एक के साथ पुजारा की भीषण भिड़ंत हुई और इस जानलेवा संघर्ष में उसकी जान चली गई।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने बताया कि सोमवार की सुबह लगभग 6:30 बजे खितौली परिक्षेत्र की पश्चिम बगदरी बीट के ढमढमा कैंप के सुरक्षा श्रमिकों ने बाघों के आपस में लड़ने की तेज आवाजें सुनीं। इसके तुरंत बाद गश्ती दल को सतर्क किया गया और ढमढमा क्षेत्र की सघन छानबीन शुरू की गई। छानबीन के दौरान घने जंगल में एक बाघ मृत अवस्था में मिला। बाघ के शरीर पर हमले के स्पष्ट निशान पाए गए हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि मौत किसी दूसरे बाघ के साथ हुए संघर्ष में हुई है।
पुजारा बांधवगढ़ के उन चुनिंदा बाघों में शामिल था, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से सैलानी आते थे। अपनी दबंग छवि और विशाल टेरिटरी के लिए मशहूर इस बाघ की मौत से वन्यजीव प्रेमियों में गहरा दुख है। जिस क्षेत्र में पुजारा की मौत हुई, वहां युवा और ताकतवर टाइगर डीएम और डी-1 का लगातार मूवमेंट रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि टेरिटरी पर अधिकार को लेकर इन बाघों के बीच पहले भी तनाव की स्थिति रही होगी और सोमवार को यह संघर्ष घातक साबित हो गया।

घटनास्थल की घेराबंदी, हाथी गश्ती और डॉग स्क्वाड तैनात
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और दूर से प्राथमिक परीक्षण किया गया। परीक्षण में प्रथम दृष्टया बाघ की मौत आपसी संघर्ष से होना पाया गया। प्रथम दृष्टया समस्त अंग मौके पर सुरक्षित पाए गए हैं, जो यह संकेत देता है कि यह किसी शिकारी की करतूत नहीं बल्कि प्राकृतिक टेरिटरी संघर्ष का परिणाम है। घटनास्थल की तत्काल घेराबंदी कर दी गई और किसी को भी उस क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।
आगे की जांच और विवेचना के लिए हाथी गश्ती दल, डॉग स्क्वाड और मेटल डिटेक्टर दल को तुरंत सूचित किया गया। इसके साथ ही वन्यजीव चिकित्सकों की टीम को भी बुलाया गया ताकि मौत के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके। समस्त कार्रवाई राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी NTCA द्वारा जारी गाइडलाइन और एसओपी के आधार पर की जा रही है।
हर महीने 8 बाघों की मौत, चिंताजनक है आंकड़ा
पुजारा की मौत ऐसे समय में हुई है जब मध्यप्रदेश में बाघों की मौत का आंकड़ा चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुका है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में हर महीने औसतन 8 बाघों की मौत हो रही है। टाइगर स्टेट का दर्जा हासिल करने वाले मध्यप्रदेश में बाघों की इस तरह लगातार हो रही मौतें वन प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। टेरिटरी संघर्ष, जंगल में आगजनी, अतिक्रमण और अवैध उत्खनन जैसी समस्याओं के बीच बाघों का प्राकृतिक आवास लगातार सिकुड़ रहा है, जो इस तरह के संघर्षों की एक बड़ी वजह मानी जा रही है।
