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लखनऊ

यूपी के लखनऊ, कानपुर और आगरा में मेट्रो यात्रियों की संख्या बढ़ाने और सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुगम बनाने की दिशा में शासन ने बड़े कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मण्डलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में हुई बैठक में कनेक्टिविटी और सुविधाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

यात्रियों की सबसे बड़ी समस्या ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ (अंतिम मील संपर्क) को दूर करने के लिए लखनऊ में 29, कानपुर में 50 और आगरा में 27 नए ऑटो एवं टेम्पो सर्कुलर रूट तय किए गए हैं। इन रूटों पर नए स्टॉपेज भी बनाए जाएंगे ताकि यात्रियों को स्टेशन तक पहुंचने में भटकना न पड़े। इसके अतिरिक्त, मेट्रो स्टेशनों के पास वाहनों को खड़ा करने की समस्या को हल करने के लिए लखनऊ में 71, कानपुर में 24 और आगरा में 19 नए पार्किंग स्थलों को अंतिम रूप दिया गया है, जिनके लिए नगर निगम जल्द ही निविदा प्रक्रिया शुरू करेगा।

शटल बस सेवा और डिजिटल मोबिलिटी
सरकारी कर्मचारियों और आम नागरिकों की सुविधा के लिए प्रमुख आवासीय कॉलोनियों और कार्यालयों को नजदीकी मेट्रो स्टेशनों से जोड़ने के लिए चरणबद्ध तरीके से शटल बस सेवाएं शुरू की जाएंगी। यूपीएमआरसी ऐप-आधारित सेवाओं जैसे यूटीयू मोबिलिटी के साथ-साथ ओला, उबर और रैपिडो के साथ भी समन्वय बढ़ा रहा है ताकि यात्रियों को घर से स्टेशन तक निर्बाध परिवहन मिले।

पार्किंग और कनेक्टिविटी अनिवार्य
बैठक में यूपीएमआरसी के एमडी सुशील कुमार ने स्पष्ट किया कि मेट्रो को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पार्किंग और कनेक्टिविटी अनिवार्य है। मण्डलायुक्त ने निर्देश दिए कि सार्वजनिक परिवहन के लाभों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए डिजिटल बोर्ड और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक अभियान चलाया जाए। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ इन योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की सख्त हिदायत दी है। इस पहल से न केवल ट्रैफिक जाम कम होगा, बल्कि प्रदूषण पर भी लगाम लगेगी।

मेट्रो के 21 स्टेशनों के सामने से गुजरेंगी इलेक्ट्रिक सिटी बसें
वहीं लखनऊ में निजी वाहनों का लोग कम इस्तेमाल करें। ताकि ईधन की बचत की जा सकें। इसी मकसद से मेट्रो के 21 स्टेशनों को ई सिटी बसों से लिंक किया जाएगा। ताकि लखनऊ शहर में ज्यादा से ज्यादा लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट से सफर कर सकें, इसके लिए मेट्रो के 21 स्टेशनों से एसी इलेक्ट्रिक सिटी बसों को संचालित किया जाएगा। यानी सिटी बसों का संचालन ऐसे रूटों पर किया जाए कि हर मेट्रो स्टेशन के सामने से सिटी बसों का आवागमन हो, जिससे दैनिक यात्री निजी वाहनों को छोड़कर सिटी बसें या मेट्रो से सफर कर सकें।

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