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केनाइन डिस्टेंपर वायरस से लगातार हो रही मौतों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए — सिस्टम की नाकामी या जानबूझकर की गई अनदेखी?

विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व से एक और दर्दनाक खबर सामने आई है। टी-220 (महावीर) के नाम से जाने जाने वाले नर बाघ की मौत ने एक बार फिर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले भी केनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) से एक बाघिन और तीन शावकों की मौत हो चुकी है।

📍घटना की जानकारी

कान्हा नेशनल पार्क के मुक्की परिक्षेत्र अंतर्गत मोहगांव बीट के कक्ष क्रमांक 156 में महावीर बाघ गंभीर अवस्था में मिला। सुबह गश्ती दल ने बाघ को तड़पते देखा और तत्काल पार्क प्रबंधन को सूचना दी। कुछ ही देर में बाघ ने दम तोड़ दिया। “बीते दो महीनों में 7 से 8 बाघों की मौत ने पूरे सिस्टम की गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया है।”
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🔬 जांच और पोस्टमार्टम

  • एनटीसीए प्रोटोकॉल के तहत डॉग स्क्वॉड से मौके का निरीक्षण कराया गया।
  • तीन डॉक्टरों की टीम ने शव का पोस्टमार्टम किया।
  • प्रारंभिक जांच में फेफड़ों में संक्रमण और चोट के निशान पाए गए।
  • फॉरेंसिक जांच के लिए सैंपल एकत्र किए गए।
  • बाघ के सभी अंग — केनाइन दांत, नाखून और मूंछ के बाल सुरक्षित मिले।

🐯 कौन था महावीर?

महावीर की उम्र करीब 5–6 वर्ष बताई जा रही है। वह अपने विशाल शरीर और शांत स्वभाव के कारण पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय था। उसके दीदार अक्सर किसली और मुक्की जोन में होते थे। वह कान्हा आने वाले पर्यटकों और वन्यजीव फोटोग्राफरों का पसंदीदा बाघ था।

🦠 सीडीवी वायरस — मौत का सिलसिला

हाल ही में सरही और किसली रेंज सहित कई क्षेत्रों में बाघों के शव मिले हैं। जांच में अधिकांश मामलों में फेफड़ों का संक्रमण और केनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) को मौत का कारण बताया गया है।

🚨विशेषज्ञों की चेतावनी

कान्हा में बाघों की मौत अब सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक खतरनाक संकेत है। CDV वायरस का तेज़ी से फैलाव और वन विभाग की सुस्त प्रतिक्रिया — दोनों मिलकर इस संकट को और गहरा कर रहे हैं। वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद होगा।