रांची
झारखंड में शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाई देने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल वित्तीय संकट में फंस गई है। राज्य में 100 नए सीएम स्कूल आफ एक्सीलेंस (एसओई) खोलने की तैयारी पूरी होने के बावजूद करीब 400 करोड़ रुपये की जरूरत के कारण योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जनवरी 2026 में ही इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी थी, लेकिन अब तक इसे कैबिनेट की स्वीकृति नहीं मिल सकी है। ऐसे में इन स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2027-28 से पढ़ाई शुरू होने की संभावना नहीं है।
शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी 24 जिलों में 100 नए सीएम स्कूल आफ एक्सीलेंस के लिए विद्यालयों का चयन कर लिया है। इन स्कूलों को सीबीएसइ पैटर्न पर विकसित किया जाना है। हालांकि योजना को धरातल पर उतारने के लिए अभी कैबिनेट की मंजूरी, वित्तीय स्वीकृति, सीबीएसई संबद्धता, भवन और अन्य आधारभूत संरचनाओं का विकास तथा शिक्षकों की व्यवस्था जैसे कई महत्वपूर्ण चरण बाकी हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव को कैबिनेट तक पहुंचने में अभी दो से तीन माह का समय लग सकता है। इसके बाद वित्तीय स्वीकृति मिलने और निर्माण व अन्य प्रक्रियाओं को पूरा करने में कम से कम एक वर्ष का समय लगेगा। यही वजह है कि अगले शैक्षणिक सत्र से इन विद्यालयों का संचालन संभव नहीं दिख रहा है।
रांची में खुलेंगे सबसे ज्यादा 10 नए एसओई
100 नए सीएम स्कूल आफ एक्सीलेंस में रांची जिले को सबसे अधिक 10 विद्यालय मिले हैं। वर्तमान में जिले में पांच एसओई संचालित हैं। इसके अलावा धनबाद, गिरिडीह और पलामू में आठ-आठ, गढ़वा और पूर्वी सिंहभूम में सात-सात, बोकारो, हजारीबाग और पश्चिमी सिंहभूम में छह-छह तथा देवघर में पांच नए विद्यालय प्रस्तावित हैं।
एक स्कूल पर तीन से पांच करोड़ रुपये खर्च का अनुमान
शिक्षा विभाग के अनुमान के अनुसार एक सीएम स्कूल आफ एक्सीलेंस को विकसित करने में औसतन तीन से पांच करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें भवन उन्नयन, स्मार्ट क्लासरूम, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, खेल सुविधाएं और अन्य बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है। 100 नए विद्यालयों पर कुल खर्च करीब 400 करोड़ रुपये आंका गया है।
80 से बढ़कर 180 होगी एसओई की संख्या
राज्य में वर्तमान में 80 एसओई संचालित हैं, जिन्हें सीबीएसइ बोर्ड से संबद्धता प्राप्त है। इनके बेहतर शैक्षणिक परिणामों को देखते हुए सरकार इनकी संख्या बढ़ाकर 180 करने की योजना पर काम कर रही है। हालांकि वित्तीय स्वीकृति मिलने तक 100 नए विद्यालयों का सपना कागजों से जमीन पर उतरने का इंतजार करता रहेगा।
