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नीमच तेंदुआ हत्याकांड की जांच पर छह माह बाद भी सवाल बरकरार

गणेश पाण्डेय, भोपाल। नीमच जिले के चर्चित तेंदुआ हत्याकांड की जांच घटना के छह माह बाद भी किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है। शिकायतकर्ता ने तत्कालीन डीएफओ एस.के. अटोदे, एसडीओ प्रदीप कछावा और रेंजर शाश्वत द्विवेदी की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि मामले के वास्तविक आरोपी को बचाने के लिए जांच की दिशा बदल दी गई। शिकायत में कहा गया है कि शुरुआती बयानों में जिस व्यक्ति की भूमिका सामने आई थी, बाद में कथित तौर पर गवाहों के बयान बदलवाकर पूरा मामला मजदूरों पर केंद्रित कर दिया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच अभी जारी है।

मामला मनासा तहसील के ग्राम परवानी का है, जहां 3 जनवरी 2026 को एक खेत में करंट प्रवाहित अवैध बाड़ में तेंदुआ फंसने का आरोप है। शिकायत के अनुसार तेंदुआ पूरी तरह मृत नहीं था, बल्कि अर्धमूर्छित अवस्था में था और बाद में उसकी हत्या कर शव को ठिकाने लगा दिया गया। 5 जनवरी को वन अपराध प्रकरण दर्ज हुआ और तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, लेकिन शिकायतकर्ता का दावा है कि मुख्य आरोपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। मामले में एपीसीसीएफ एल. कृष्णमूर्ति द्वारा गठित दो सदस्यीय एसआईटी को एक माह में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन छह माह बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी है।

शुरुआती बयान और बाद के बयान में क्या बदला?

शिकायत के अनुसार प्रारंभिक बयान में सह-आरोपी अंबालाल ने खेत मालिक जगदीश बिंदल उर्फ बाबू सेठ की मौजूदगी तथा तेंदुए के शव को ठिकाने लगाने का उल्लेख किया था। बाद में दर्ज बयानों में कथित रूप से तीनों मजदूरों ने पूरी जिम्मेदारी स्वयं पर ले ली। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह बदलाव दबाव, धमकी और आर्थिक सहायता के आश्वासन के कारण कराया गया। साथ ही मूल बयान, केस डायरी, कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन, डिजिटल साक्ष्य और बैंक लेनदेन की फोरेंसिक जांच कराने की मांग भी की गई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

एक माह की समय-सीमा, छह माह बाद भी रिपोर्ट नहीं

26 मई 2026 को मिली शिकायत के बाद एपीसीसीएफ एल. कृष्णमूर्ति ने जितेंद्र बंसल (स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, भोपाल) और शरद जाटव (स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, इंदौर) की दो सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति को एक माह में जांच प्रतिवेदन सौंपने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन छह माह बाद भी रिपोर्ट लंबित है। जांच समिति का कहना है कि कुछ लोगों के बयान अभी दर्ज किए जाने बाकी हैं और जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट विभाग को सौंप दी जाएगी। विभागीय सूत्रों में यह भी चर्चा है कि जांच में मुख्य आरोपी को क्लीन चिट दिलाने की कोशिश हो रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

डीएफओ ने आरोपों को बताया निराधार

डीएफओ एस.के. अटोदे ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि मुख्य आरोपी को बचाने का आरोप सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि बयानों के संबंध में एसडीओ प्रदीप कछावा और रेंजर शाश्वत द्विवेदी ही बेहतर जानकारी दे सकते हैं, क्योंकि बयान दर्ज करने की कार्रवाई उन्हीं के स्तर पर हुई थी।

जांच पूरी होने तक कई सवालों के जवाब बाकी

वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत तेंदुआ अनुसूची-1 का संरक्षित वन्यजीव है और उसकी हत्या अत्यंत गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है। जांच लंबित रहने से कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। क्या शुरुआती बयानों की दोबारा जांच होगी? क्या कथित मुख्य आरोपी की भूमिका की स्वतंत्र पड़ताल होगी? क्या कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन और डिजिटल साक्ष्य खंगाले जाएंगे? और क्या जांच समिति तय समय से हुई देरी का कारण स्पष्ट करेगी? इन सभी प्रश्नों के उत्तर अब अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आ सकेंगे।