खंडवा वन सर्कल में पदोन्नति पर विवाद

पदोन्नति सूची पर उठे सवाल, खंडवा वन वृत्त में कर्मचारियों ने दर्ज कराई आपत्तियां

गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश वन विभाग के खंडवा वन वृत्त में जारी पदोन्नति सूची को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पहली सूची के बाद शुरू हुआ असंतोष दूसरी सूची जारी होने के बाद और बढ़ गया है। वनरक्षकों और वनपालों ने आरोप लगाया है कि पदोन्नति प्रक्रिया में मध्यप्रदेश लोक सेवा (पदोन्नति) नियम, 2025 तथा उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। कर्मचारियों ने वन संरक्षक (सीएफ) खंडवा को लिखित आपत्तियां सौंपते हुए पदोन्नति सूची की समीक्षा की मांग की है। विवाद खंडवा, खरगोन, बड़वाह और बुरहानपुर वन मंडलों तक पहुंच गया है।

कर्मचारियों का आरोप है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों को केवल आरक्षित कोटे तक सीमित रखा गया, जबकि अनारक्षित कोटे का लाभ केवल सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के कर्मचारियों को दिया गया। उनका कहना है कि नियमों के अनुसार योग्यता और वरिष्ठता के आधार पर अनारक्षित पदों पर सभी वर्गों के पात्र कर्मचारियों को अवसर मिलना चाहिए था। कर्मचारियों का दावा है कि इससे बड़ी संख्या में वरिष्ठ कर्मचारी पदोन्नति से वंचित रह गए।

वरिष्ठ कर्मचारियों की अनदेखी का आरोप

वनकर्मियों का कहना है कि करीब 50 वरिष्ठ वनरक्षकों को नजरअंदाज कर उनसे 10 से 12 वर्ष जूनियर कर्मचारियों को वनपाल पद पर पदोन्नत कर दिया गया। उनका दावा है कि प्रदेश की अधिकांश अन्य कंजरवेंसी में पदोन्नति प्रक्रिया नियमों के अनुरूप अपनाई गई, जबकि खंडवा वृत्त में पारदर्शिता और वरिष्ठता के सिद्धांतों का पालन नहीं हुआ। इस संबंध में कई कर्मचारियों ने औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं होने का दावा

अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों ने 13 जुलाई 2026 को जारी पदोन्नति आदेश पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि मध्यप्रदेश लोक सेवा (पदोन्नति) नियम, 2025 और उच्च न्यायालय के निर्देशों की अनदेखी की गई। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि इससे एसटी-एससी वर्ग के करीब 80 वरिष्ठ कर्मचारी अपने से 10-12 वर्ष जूनियर अधिकारियों के अधीन कार्य करने को मजबूर होंगे। उन्होंने बैतूल वन वृत्त में जारी पदोन्नति आदेश का हवाला देते हुए खंडवा में भी उसी प्रक्रिया को अपनाने की मांग की है।

333 पदोन्नतियों के बाद बढ़ा विवाद

मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) वासु कनोजिया द्वारा जारी दो आदेशों में 250 वनरक्षकों को वनपाल तथा 83 वनपालों को उप वनक्षेत्रपाल (डिप्टी रेंजर) पद पर पदोन्नति दी गई। कुल 333 कर्मचारियों की पदोन्नति के बाद यह विवाद सामने आया है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्ष 2003 बैच के कई पात्र कर्मचारी अब भी पदोन्नति से वंचित हैं। फिलहाल विभाग की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।