आरटीआई मामलों में सूचना आयोग सख्त, चीता प्रोजेक्ट से जुड़ी सूचनाएं नहीं देने का आरोप
गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग ने चीता प्रोजेक्ट से जुड़े तीन आरटीआई प्रकरणों में कूनो चीता प्रोजेक्ट के डायरेक्टर उत्तम शर्मा को तलब किया है। राज्य सूचना आयुक्त राजेश भट्ट ने शुक्रवार को एक्टिविस्ट अजय दुबे की शिकायत पर सुनवाई करते हुए मामले को गंभीर मानते हुए डायरेक्टर को आयोग के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2024 से अब तक सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई कई महत्वपूर्ण जानकारियां नियमों के विपरीत रोकी गईं और अधिनियम की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
अजय दुबे ने आयोग के समक्ष बताया कि उन्होंने चीतों को बेहोश करने की अनुमति, ब्लड टेस्ट रिपोर्ट, घायल चीतों के ऑपरेशन के बाद की रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कूनो नेशनल पार्क में निर्माण कार्यों में उपयोग की गई खनिज सामग्री, चीता प्रोजेक्ट पर बनी डॉक्यूमेंट्री की अनुमति तथा चीता अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों और चिकित्सकों की जानकारी मांगी थी। उनका आरोप है कि निर्धारित समय में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई और कई मामलों में सूचना देने से इनकार कर दिया गया।
आरटीआई अधिनियम के उल्लंघन का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उत्तम शर्मा ने स्वयं ही लोक सूचना अधिकारी (पीआईओ) और प्रथम अपीलीय अधिकारी की भूमिका निभाते हुए आदेश पारित किए, जबकि यह प्रक्रिया आरटीआई अधिनियम के अनुरूप नहीं है। आयोग के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों में दावा किया गया कि इससे अधिनियम की पारदर्शिता और निष्पक्षता प्रभावित हुई।
धारा 8 का हवाला देकर रोकी गई जानकारी
अजय दुबे के अनुसार विभाग ने आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(a) (देश की सुरक्षा और संप्रभुता) तथा धारा 8(1)(j) (व्यक्तिगत जानकारी) का हवाला देकर कई सूचनाएं देने से इनकार किया। वहीं कुछ मामलों में सूचना उपलब्ध कराने के लिए अनुचित शुल्क मांगे जाने का भी आरोप लगाया गया।
जुर्माना और विभागीय जांच की मांग
याचिकाकर्ता ने सूचना आयोग से उत्तम शर्मा पर आरटीआई अधिनियम के तहत जुर्माना लगाने, विभागीय जांच कराने तथा क्षतिपूर्ति दिलाने की मांग की है। फिलहाल आयोग ने मामले की सुनवाई जारी रखते हुए संबंधित पक्षों को तलब किया है। मामले में अंतिम निर्णय आगामी सुनवाई के बाद होगा।
