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ज्योतिष शास्त्र में राहु को एक मायावी, तीव्र और छाया ग्रह माना जाता है. राहु की चाल या नक्षत्र में बदलाव का प्रभाव व्यक्ति के जीवन में अचानक बदलाव, मानसिक उथल-पुथल और अप्रत्याशित घटनाएं लेकर आता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, 2 अगस्त 2026 को राहु देव अपने ही नक्षत्र शतभिषा से निकलकर मंगल के स्वामित्व वाले धनिष्ठा नक्षत्र में गोचर करने जा रहे हैं. धनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं, जिन्हें अग्नि तत्व, उग्रता और साहस का कारक माना जाता है.

ऐसे में मंगल के नक्षत्र में राहु का प्रवेश कुछ राशियों के लिए बेहद सतर्क रहने वाला समय लेकर आ सकता है. विशेष रूप से 3 राशियों के जातकों को इस गोचर काल के दौरान आर्थिक, मानसिक और करियर के मोर्चे पर सावधान रहने की जरूरत होगी. आइए जानते हैं कि 2 अगस्त से किन 3 राशियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं और उन्हें क्या सावधानियां बरतनी चाहिए:

वृषभ राशि (Taurus)
वृषभ राशि के जातकों के लिए राहु का यह नक्षत्र गोचर कार्यक्षेत्र और आर्थिक मामलों में उतार-चढ़ाव ला सकता है. नौकरी या व्यापार में अचानक सहकर्मियों या साझेदारों (Partners) के साथ मतभेद उत्पन्न हो सकते हैं. फिजूलखर्ची बढ़ने से बजट बिगड़ सकता है. कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार की राजनीति या बहसबाजी से दूर रहें. पैसों के लेन-देन में लिखापढ़ी जरूर करें और बिना सोचे-समझे बड़ा निवेश न करें.

सिंह राशि (Leo)
सिंह राशि के जातकों को इस अवधि में अपने पारिवारिक जीवन और सेहत पर खास ध्यान देने की आवश्यकता होगी. मंगल के नक्षत्र में राहु का प्रभाव आपके स्वभाव में चिड़चिड़ापन या गुस्सा बढ़ा सकता है, जिससे जीवनसाथी या परिवार के सदस्यों के साथ तनाव बढ़ सकता है. अपनी वाणी और क्रोध पर नियंत्रण रखें. वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें और जल्दबाजी में कोई भी बड़ा पारिवारिक निर्णय न लें.

वृश्चिक राशि (Scorpio)
वृश्चिक राशि के जातकों के लिए राहु का धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करियर और मानसिक शांति में रुकावटें डाल सकता है. कड़ी मेहनत के बावजूद मनचाहा परिणाम मिलने में देरी हो सकती है, जिससे मानसिक तनाव और चिंता बनी रह सकती है. गुप्त शत्रु या विरोधी आपको नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं. अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज और व्यावसायिक योजनाएं किसी के साथ साझा न करें. धैर्य बनाए रखें और किसी के बहकावे में आकर कोई कदम न उठाएं.

राहु के अशुभ प्रभावों से बचने के उपाय
– मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें. मंगल के नक्षत्र में राहु का गोचर होने के कारण हनुमान जी की आराधना सबसे श्रेष्ठ फल देगी.
– नियमित रूप से भगवान शिव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें और ऊं नमः शिवाय मंत्र का जाप करें.
– शनिवार के दिन जरूरतमंदों को काले तिल, उड़द की दाल या सात प्रकार के अनाज का दान करें.
– ऊं रां राहवे नमः मंत्र का रोजाना 108 बार जाप करें

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