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 उज्जैन
 धार्मिक और सां
स्कृतिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध उज्जैन में मंगलवार को स्वतंत्रता दिवस का अनूठा आयोजन देखने को मिला। महाकाल मंदिर के समीप स्थित प्राचीन बड़े गणेश मंदिर में श्रावण कृष्ण चतुर्दशी के अवसर पर तिथि के अनुसार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। भगवान गणपति की विशेष पूजा-अर्चना के बाद मंदिर परिसर से तिरंगा यात्रा निकाली गई। इस दौरान धर्म और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम नजर आया।

सुबह मंदिर के पुजारियों ने भगवान बड़े गणेश का विशेष अभिषेक और पूजन किया। इसके बाद भगवान को नवीन वस्त्र और आभूषण धारण कराकर आकर्षक शृंगार किया गया। वेदपाठी बटुकों ने गणपति अथर्वशीर्ष का सस्वर पाठ किया। भगवान गणेश को सवा लाख दूर्वा, सवा लाख लाल पुष्प और लड्डुओं का भोग अर्पित किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा।

पूजन के बाद झांझ और डमरू की मंगल ध्वनि के बीच मंदिर परिसर में तिरंगा यात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं और मंदिर से जुड़े लोगों ने देशभक्ति के भाव के साथ इसमें सहभागिता की। इसके बाद दोपहर 12 बजे राष्ट्रीय ध्वज को भगवान गणेश के समक्ष विराजित कर विधि-विधान से उसका पूजन किया गया। देश की रक्षा, सुरक्षा और समृद्धि के लिए विशेष प्रार्थना भी की गई।

गणपति को माना जाता है गणतंत्र का देवता
पंचांगकर्ता एवं ज्योतिषविद आनंद शंकर व्यास के अनुसार बड़े गणेश मंदिर में राष्ट्रीय पर्वों को तिथि के आधार पर मनाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। भारतीय सनातन परंपरा में पर्व और उत्सव पंचांग की तिथि के अनुसार मनाए जाते हैं। भगवान गणपति को गणतंत्र का देवता माना गया है। इसी मान्यता के चलते स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भगवान गणेश के समक्ष तिरंगा रखकर राष्ट्र की स्वतंत्रता, सुरक्षा और समृद्धि के लिए प्रार्थना की जाती है।

उन्होंने बताया कि मंदिर में गणतंत्र दिवस भी तिथि के अनुसार मनाया जाता है। 26 जनवरी 1950 को भारत गणतंत्र बना था और उस दिन माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि थी। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए बड़े गणेश मंदिर में राष्ट्रीय पर्वों का आयोजन पंचांग की तिथि के अनुरूप आज भी किया जाता है।

 

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