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गणेश पाण्डेय, भोपाल। भिंड वन मंडल के अटेर वन परिक्षेत्र में रेंजर कृतिका शुक्ला और उप वनमंडल अधिकारी के बीच विवाद अब विभागीय पत्राचार तक पहुंच गया है। वर्तमान एसडीओ रामकुमार ने वनमंडलाधिकारी को पत्र लिखकर रेंजर पर अभद्र व्यवहार करने और महिला उत्पीड़न के मामले में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाया है। इससे पहले तत्कालीन एसडीओ बहादुर सिंह गौड़ भी रेंजर के खिलाफ शिकायत कर चुके हैं।

एसडीओ रामकुमार की ओर से रेंजर कृतिका शुक्ला के खिलाफ की गई शिकायत
एसडीओ रामकुमार की ओर से रेंजर कृतिका शुक्ला के खिलाफ की गई शिकायत

रामकुमार के अनुसार, 7 अगस्त को गोरमी में मुख्यमंत्री जनविश्वास शिविर में रेंजर के देर से पहुंचने का कारण पूछने पर विवाद हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि रेंजर ने अपने गृह क्षेत्र में पदस्थ होने का हवाला देते हुए उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और धमकी दी। उन्होंने रेंजर की पदस्थापना बदलने तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।

मामले में वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायतें मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप है। दस्तावेजों के अनुसार, शिकायतों पर सीएफ ग्वालियर की ओर से रेंजर से स्पष्टीकरण भी मांगा गया था।

पुराने एसडीओ ने भी लगाया था धमकी का आरोप

तत्कालीन प्रभारी एसडीओ बहादुर सिंह गौड़ ने 7 अप्रैल 2026 को वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत भेजी थी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि नवंबर 2025 में अवैध लकड़ी परिवहन के एक वाहन को पकड़ने की कार्रवाई के बाद रेंजर कृतिका शुक्ला ने उन्हें महिला उत्पीड़न के मामले में फंसाने की धमकी दी। शिकायत में कहा गया कि कार्रवाई के दौरान वाहन को वन अपराध प्रकरण में दर्ज किया गया था। गौड़ ने इस पूरे घटनाक्रम की जांच और संबंधित कार्रवाई की मांग की थी।

सीएफ ने मांगा था सात दिन में स्पष्टीकरण

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रेंजर कृतिका शुक्ला से आरोपों पर सात दिन में स्पष्टीकरण मांगता वन विभाग का नोटिस।

शिकायत के आधार पर वन संरक्षक ग्वालियर लवित भारती ने 2 जून 2026 को कृतिका शुक्ला को नोटिस जारी किया। इसमें शिकायत में लगाए गए महिला उत्पीड़न के मामले में फंसाने की धमकी, वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और अन्य आरोपों पर सात दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा गया था। बाद में डीएफओ स्तर से भी स्पष्टीकरण नहीं देने को लेकर पत्र जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि इसके बाद भी कोई अंतिम कार्रवाई नहीं हुई।

टीपी जारी करने में कमी का भी आरोप

वर्तमान एसडीओ रामकुमार ने अपने पत्र में दावा किया कि रेंजर द्वारा अटेर एवं भिंड के अतिरिक्त प्रभार संभालने के बाद अभिवहन पत्र (टीपी) जारी होने की संख्या में कमी आई, जिससे शासकीय राजस्व प्रभावित हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर प्रभाव का इस्तेमाल कर अधिकारियों और कर्मचारियों पर दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की विभागीय स्तर पर अंतिम पुष्टि होना बाकी है।

जप्त वाहन अगले दिन ही छोड़ने पर उठे सवाल

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जप्त आयशर वाहन को जांच के बाद मुक्त करने के लिए थाना प्रभारी को भेजा गया पत्र।

एक अन्य दस्तावेज में अटेर रेंजर कार्यालय की ओर से 22 फरवरी 2026 को आयशर वाहन क्रमांक एमपी33जी1227 को जब्त किए जाने का उल्लेख है। पत्र के अनुसार वाहन को जब्त लकड़ी सहित पुलिस अभिरक्षा में दिया गया था। अगले दिन थाना प्रभारी को भेजे पत्र में जांच के बाद वन अपराध सिद्ध नहीं होने का हवाला देते हुए वाहन को मुक्त करने और चालक को सौंपने का अनुरोध किया गया। एसडीओ ने इस घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि वन अपराध नहीं बनता था तो वाहन को जब्त कर पुलिस अभिरक्षा में क्यों दिया गया और प्रकरण दर्ज कर राजसात की कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

गृह क्षेत्र में पदस्थापना भी बनी विवाद का कारण

विभागीय पत्राचार में रेंजर कृतिका शुक्ला की अटेर में पदस्थापना को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि गृह क्षेत्र में पदस्थ होने के कारण स्थानीय स्तर पर उनका प्रभाव बढ़ा है। इसी आधार पर कार्य आवंटन आदेश निरस्त कर अन्यत्र पदस्थापना की मांग की गई है। दूसरी ओर, इन आरोपों पर रेंजर का पक्ष उपलब्ध नहीं है।

एक ही अधिकारी के खिलाफ लगातार शिकायतों का मामला

दस्तावेजों से यह भी सामने आता है कि कृतिका शुक्ला के खिलाफ अलग-अलग समय में वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायतें भेजी गई हैं। पूर्व एसडीओ बहादुर सिंह गौड़ की शिकायत के बाद वर्तमान एसडीओ रामकुमार ने भी कार्रवाई की मांग की है। अब विभाग के सामने मुख्य सवाल यही है कि शिकायतों और दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच कब होगी और आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदारी किसकी तय होगी।

दस्तावेज क्या बताते हैं

पहले पत्र में वर्तमान एसडीओ ने 7 अगस्त की घटना का उल्लेख करते हुए कार्रवाई की मांग की है। दूसरे पत्र में पूर्व एसडीओ ने नवंबर 2025 की कार्रवाई और कथित धमकी का विवरण दिया है। तीसरे दस्तावेज में जब्त वाहन को जांच के बाद मुक्त करने का अनुरोध दर्ज है, जबकि चौथे पत्र में रेंजर से शिकायतों पर सात दिन में स्पष्टीकरण मांगा गया था। इन दस्तावेजों में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित विभागीय जांच के बाद ही होगी।