कूनो में संवेदनशील वन्यजीव जानकारी साझा करने पर सतर्क रहने की सलाह
गणेश पाण्डेय, भोपाल। कूनो नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर एवं प्रोजेक्ट चीता से जुड़े वरिष्ठ वन अधिकारी उत्तम कुमार शर्मा की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद शुरू हो गया है। 17 अगस्त को एक्स पर की गई पोस्ट में शर्मा ने वन्यजीवों की निगरानी से जुड़ी संवेदनशील जानकारी, खासकर ट्रैक किए जा रहे जानवरों की लोकेशन, केवल अधिकृत और जरूरतमंद लोगों के साथ साझा करने की सलाह दी। इसी पोस्ट के दूसरे हिस्से में उन्होंने “There are ‘Dimagi Naxals’ everywhere. This is what we are up against… Stay alert.” लिखा। इसका अर्थ है—“हर जगह ‘दिमागी नक्सल’ हैं। हम इसी चुनौती का सामना कर रहे हैं… सतर्क रहें।”
पोस्ट में किसी व्यक्ति, संस्था या वन्यजीव संगठन का नाम नहीं लिया गया है। इसलिए यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि शर्मा ने किसी खास कार्यकर्ता या संगठन को ‘दिमागी नक्सल’ कहा। विवाद इस बात को लेकर है कि इस शब्द का इस्तेमाल किस संदर्भ में किया गया और सरकारी अधिकारी की सोशल मीडिया पोस्ट में इसका आशय क्या था।

पोस्ट के पहले हिस्से में लोकेशन गोपनीय रखने की सलाह
शर्मा ने वन्यजीव संरक्षण में लगे कर्मचारियों को आगाह करते हुए कहा कि ट्रैक किए जा रहे वन्यजीवों की लोकेशन जैसी संवेदनशील जानकारी केवल उन्हीं अधिकृत लोगों के साथ साझा की जाए, जिन्हें इसकी वास्तविक आवश्यकता है। उन्होंने यह भी लिखा कि वन्यजीव संरक्षण में मदद करने का दावा करने वाला हर व्यक्ति जरूरी नहीं कि मैदानी परिस्थितियों को समझता हो या उसके उद्देश्य विभाग के समान हों।
यह हिस्सा मुख्य रूप से वन्यजीवों की निगरानी से जुड़ी सूचनाओं की गोपनीयता और मैदानी अमले को सतर्क रहने की सलाह से संबंधित है।
‘दिमागी नक्सल’ शब्द पर उठा सवाल

विवाद पोस्ट के दूसरे हिस्से में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर है। पोस्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि शर्मा इस शब्द से किन लोगों या किस वर्ग का उल्लेख कर रहे थे। न ही पोस्ट में किसी वन्यजीव कार्यकर्ता, संस्था या संगठन का नाम है।
इसलिए इस टिप्पणी को किसी विशेष व्यक्ति अथवा संगठन से जोड़ना बिना अतिरिक्त प्रमाण के उचित नहीं होगा।
अजय दुबे ने मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग की
वन्यजीव विशेषज्ञ एवं आरटीआई कार्यकर्ता अजय दुबे ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र भेजकर शर्मा की पोस्ट पर आपत्ति जताई है। दुबे ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि वन्यजीव संरक्षण और प्रोजेक्ट चीता में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाने वाले कार्यकर्ताओं तथा नागरिकों के संदर्भ में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल अनुचित है।
दुबे ने पत्र में आधिकारिक कदाचार, पद के कथित दुरुपयोग और सार्वजनिक रूप से बदनाम करने जैसे आरोप लगाते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की है। ये आरोप शिकायतकर्ता के हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।
आरटीआई मामलों में भी शर्मा को आयोग ने किया था तलब
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग ने 31 जुलाई 2026 को प्रोजेक्ट चीता के फील्ड डायरेक्टर उत्तम शर्मा को तीन आरटीआई मामलों में तलब किया था। इन मामलों में चीता परियोजना से जुड़ी जानकारी उपलब्ध नहीं कराने अथवा उससे संबंधित विवादों पर सुनवाई हुई थी।
आरटीआई कार्यकर्ता अजय दुबे ने चीतों के ट्रैंक्विलाइजेशन, ब्लड टेस्ट, घायल चीतों की ऑपरेशन के बाद की रिपोर्ट और पोस्टमार्टम जैसी जानकारियां मांगे जाने का दावा किया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार आयोग के समक्ष इन सूचनाओं को लेकर शिकायतें रखी गई थीं।
आरटीआई मामले को सोशल मीडिया विवाद से अलग रखना जरूरी
आरटीआई प्रकरण और सोशल मीडिया पोस्ट दो अलग घटनाक्रम हैं। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि आरटीआई विवाद के कारण ही शर्मा ने ‘दिमागी नक्सल’ वाली पोस्ट की। इसी तरह यह भी नहीं कहा जा सकता कि पोस्ट आरटीआई कार्यकर्ताओं को निशाना बनाकर की गई थी, क्योंकि पोस्ट में किसी व्यक्ति या संगठन का नाम नहीं है।
दो मुद्दे, जिन पर अब चर्चा
पूरे घटनाक्रम में एक तरफ वन्यजीवों की लोकेशन जैसी संवेदनशील जानकारी को सुरक्षित रखने का सवाल है। दूसरी तरफ सरकारी पद पर बैठे अधिकारी द्वारा सोशल मीडिया पर ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्द के इस्तेमाल की उपयुक्तता पर सवाल उठ रहे हैं।
फिलहाल उपलब्ध सामग्री के आधार पर इतना ही स्पष्ट है कि शर्मा ने यह शब्द अपनी पोस्ट में इस्तेमाल किया, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि उनका निशाना कौन था। वहीं अजय दुबे ने इसे आपत्तिजनक मानते हुए मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग की है। आगे इस मामले में संबंधित अधिकारी या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण आता है तो तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

