सिवनी सर्किल के अतिरिक्त प्रभार को लेकर वन विभाग में नई प्रशासनिक चर्चा
गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश वन विभाग में सिवनी सर्किल के वन संरक्षक (सीएफ) का अतिरिक्त प्रभार डीएफओ स्तर के वर्किंग प्लान अधिकारी ए.ए. अंसारी को सौंपे जाने के बाद विभागीय प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विभागीय जानकारों के अनुसार, अतिरिक्त प्रभार दिए जाने की सामान्य परंपरा में समीपस्थ सर्किल के सीएफ अथवा सीसीएफ स्तर के अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाती रही है। ऐसे में सिवनी से करीब 70 किलोमीटर दूर छिंदवाड़ा में पदस्थ सीसीएफ कमल अरोरा, पेंच टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक देवा प्रसाद और बालाघाट के सीएफ गौरव चौधरी जैसे वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद डीएफओ स्तर के अधिकारी को जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर चर्चा तेज है।
यह निर्णय ऐसे समय हुआ है जब सिवनी सर्किल का सीएफ पद करीब दो वर्ष से रिक्त बताया जा रहा है और अतिरिक्त प्रभार के जरिए व्यवस्था संचालित की जा रही है। इससे पहले सिवनी सर्किल का अतिरिक्त प्रभार वर्किंग प्लान अधिकारी संध्या के पास था। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, कुछ डीएफओ की शिकायतों के बाद उनसे यह प्रभार वापस लिया गया। हालांकि शिकायतों की प्रकृति और उन पर हुई कार्रवाई के संबंध में विभाग की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
अब संध्या को सिवनी वर्किंग प्लान अधिकारी के साथ आंचलिक कार्य आयोजना, जबलपुर का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। वहीं सिवनी सर्किल की जिम्मेदारी ए.ए. अंसारी को मिलने से विभाग के भीतर यह सवाल उठ रहा है कि तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण वर्किंग प्लान का काम संभाल रहे अधिकारी को एक बड़े प्रशासनिक सर्किल का अतिरिक्त दायित्व देने का आधार क्या है।
वरिष्ठ सीएफ-सीसीएफ अधिकारी उपलब्ध, फिर डीएफओ को जिम्मेदारी क्यों?
सिवनी सर्किल की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए आसपास वरिष्ठ स्तर के अधिकारी उपलब्ध हैं। छिंदवाड़ा में सीसीएफ कमल अरोरा, पेंच टाइगर रिजर्व में क्षेत्र संचालक देवा प्रसाद और बालाघाट में सीएफ गौरव चौधरी पदस्थ हैं। ऐसे में विभागीय हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि अतिरिक्त प्रभार देने के लिए वरिष्ठ सीएफ या सीसीएफ स्तर के अधिकारी के बजाय डीएफओ स्तर के अधिकारी को क्यों चुना गया।
हालांकि, अतिरिक्त प्रभार सौंपने के पीछे विभाग का कोई विशेष प्रशासनिक कारण है या नहीं, इसकी जानकारी आदेश में स्पष्ट नहीं होने से इस पर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
संध्या से प्रभार वापस लेने के बाद नई जिम्मेदारी
सिवनी वर्किंग प्लान अधिकारी संध्या के पास पहले सिवनी सर्किल का अतिरिक्त प्रभार भी था। विभागीय सूत्रों के अनुसार, उनके कामकाज को लेकर कुछ डीएफओ ने वरिष्ठ स्तर पर शिकायतें की थीं। इसके बाद सर्किल का प्रभार उनसे वापस लिया गया।
नए आदेश में उन्हें आंचलिक कार्य आयोजना, जबलपुर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इस बदलाव ने भी विभागीय स्तर पर चर्चा को जन्म दिया है कि एक तरफ सर्किल का प्रभार वापस लिया गया, वहीं दूसरी ओर वर्किंग प्लान से संबंधित अतिरिक्त जिम्मेदारी बढ़ा दी गई।
कई सर्किलों में पद रिक्त
वन विभाग में भोपाल, रीवा, शहडोल, सिवनी और ग्वालियर सहित कई सर्किलों में सीएफ स्तर के पद रिक्त बताए जा रहे हैं। सिवनी का पद लंबे समय से खाली होने के कारण अतिरिक्त प्रभार से काम चलाया जा रहा है।
विभागीय अधिकारियों के बीच चर्चा यह भी है कि यदि नियमित पदस्थापना नहीं की जाती है तो अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था लंबे समय तक जारी रह सकती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या विभाग जल्द ही रिक्त सर्किलों में नियमित सीएफ की पदस्थापना करेगा।
वर्किंग प्लान और सर्किल प्रशासन की दोहरी जिम्मेदारी
वर्किंग प्लान वन प्रबंधन की दीर्घकालीन योजना तैयार करने की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसमें वन क्षेत्र के प्रबंधन, संरक्षण, उत्पादन और भविष्य की कार्ययोजना से जुड़े कई पहलुओं का अध्ययन किया जाता है। विभागीय जानकारों के अनुसार एक गुणवत्तापूर्ण वर्किंग प्लान तैयार करने में लंबा समय और लगातार मैदानी अध्ययन की आवश्यकता होती है।
ऐसे में वर्किंग प्लान अधिकारी को सर्किल प्रशासन का अतिरिक्त दायित्व दिए जाने से दोनों जिम्मेदारियों के बीच समय और प्राथमिकता का संतुलन चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव संबंधित अधिकारी के कार्यभार, उपलब्ध स्टाफ और प्रशासनिक व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
वर्किंग प्लान अधिकारियों की सर्किल पदस्थापना की चर्चा
विभागीय गलियारों में कुछ वर्किंग प्लान अधिकारियों के सर्किल स्तर की पदस्थापना की संभावनाओं को लेकर भी चर्चा है। इनमें क्षितिज कुमार, लवित भारती, महेंद्र प्रताप सिंह, बृजेन्द्र श्रीवास्तव और अनुराग कुमार के नाम लिए जा रहे हैं।
हालांकि इन अधिकारियों की ओर से सर्किल पदस्थापना के लिए किसी कथित प्रयास या दबाव की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल विभागीय चर्चा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
भोपाल सीएफ की पदस्थापना भी सवालों में
भोपाल सर्किल के सीएफ क्षितिज कुमार की पदस्थापना को लेकर भी विभागीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। चर्चा के अनुसार उनकी मूल पदस्थापना वर्किंग प्लान अधिकारी के पद पर प्रस्तावित थी, लेकिन आदेश सीएफ भोपाल सर्किल के रूप में जारी हुआ।
यदि पदस्थापना प्रस्ताव और अंतिम आदेश में अंतर था, तो इसके पीछे प्रशासनिक कारण क्या रहे—यह भी स्पष्ट होना बाकी है। इस संबंध में विभाग की ओर से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं है।
मुख्य सवाल
- डीएफओ स्तर के अधिकारी को सीएफ सिवनी का अतिरिक्त प्रभार देने का आधार क्या है?
- क्या अतिरिक्त प्रभार देने के लिए वरिष्ठ सीएफ/सीसीएफ अधिकारियों की उपलब्धता पर विचार किया गया?
- वर्किंग प्लान अधिकारी को सर्किल प्रशासन की अतिरिक्त जिम्मेदारी देने से मूल कार्य प्रभावित होगा या नहीं?
- सिवनी समेत रिक्त सर्किलों में नियमित सीएफ की पदस्थापना कब होगी?
- अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था को लेकर विभाग की कोई स्पष्ट नीति है या नहीं?
फैसला एक अधिकारी का, सवाल पूरी व्यवस्था पर
सिवनी में ए.ए. अंसारी को अतिरिक्त प्रभार दिया जाना फिलहाल एक प्रशासनिक आदेश है, लेकिन इसने वन विभाग में अतिरिक्त प्रभार देने की प्रक्रिया, वरिष्ठता, प्रशासनिक प्राथमिकता और वर्किंग प्लान जैसे तकनीकी कार्यों के प्रबंधन को लेकर बहस शुरू कर दी है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सिवनी सीएफ का पद लंबे समय से रिक्त है। इसलिए अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था के बजाय नियमित पदस्थापना होने पर ही इस तरह के सवालों का स्थायी समाधान हो सकेगा। फिलहाल विभागीय आदेश के पीछे प्रशासनिक आधार और आगे की पदस्थापना पर सबकी नजर रहेगी।
