गणेश पाण्डेय, भोपाल। रातापानी टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में बसे नीलगढ़ और धुंधवानी गांवों के परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से कोर क्षेत्र में मानवीय गतिविधियों को कम करना महत्वपूर्ण माना जाता है। रातापानी को दिसंबर 2024 में देश का 57वां और मध्यप्रदेश का आठवां टाइगर रिजर्व अधिसूचित किया गया था। रिजर्व का कोर क्षेत्र 763.8 वर्ग किलोमीटर और कुल क्षेत्रफल 1,271.4 वर्ग किलोमीटर है।
नीलगढ़ और धुंधवानी के पुनर्वास की प्रक्रिया पहले भी शुरू की जा चुकी थी। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार नीलगढ़ में 65 परिवार और धुंधवानी में 67 परिवार बताए गए थे। उस समय दोनों गांवों के परिवारों के पुनर्वास के लिए प्रति परिवार 15 लाख रुपये के पैकेज का उल्लेख किया गया था।
कोर क्षेत्र में घटेगा मानवीय दबाव
गांवों के पुनर्वास के बाद इन क्षेत्रों में खेती, घरेलू पशुओं की आवाजाही और अन्य मानवीय गतिविधियों का दबाव कम होने की उम्मीद है। इससे बाघों सहित अन्य वन्यजीवों के लिए आवास और आवाजाही का क्षेत्र अधिक निर्बाध हो सकता है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) भी बाघ अभयारण्यों के कोर क्षेत्रों से गांवों के स्वैच्छिक पुनर्वास को संरक्षण व्यवस्था का हिस्सा मानता है।
दो हेक्टेयर जमीन की व्यवस्था का क्या आधार?
पुनर्वास के संबंध में दो हेक्टेयर कृषि भूमि का प्रावधान राष्ट्रीय पुनर्वास पैकेज में भी शामिल रहा है। एनटीसीए के अनुसार पुनर्वास विकल्प के तहत कृषि भूमि की खरीद और विकास के लिए दो हेक्टेयर तक भूमि का प्रावधान किया गया है। वहीं केंद्र की संशोधित टाइगर रिजर्व गाइडलाइन में गांव पुनर्वास पैकेज को 10 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये प्रति परिवार किए जाने का उल्लेख है।

हालांकि, नीलगढ़ और धुंधवानी के प्रत्येक परिवार को वर्तमान प्रक्रिया में दो हेक्टेयर भूमि और 15 लाख रुपये किस स्वरूप में दिए जाएंगे, इसकी अंतिम स्थिति संबंधित प्रशासनिक आदेश और पुनर्वास दस्तावेजों से स्पष्ट होगी। इसलिए इसे स्थानीय पुनर्वास पैकेज के रूप में ही देखा जाना उचित होगा।
सिर्फ मुआवजा नहीं, पूरी पुनर्वास व्यवस्था जरूरी
गांवों को बाहर बसाने की प्रक्रिया केवल जमीन और आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। विस्थापित परिवारों के लिए आवास, पेयजल, बिजली, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा और आजीविका की व्यवस्था भी जरूरी होगी। एनटीसीए के पुनर्वास ढांचे में भी सड़क, सिंचाई, पेयजल, स्वच्छता, बिजली और सामुदायिक सुविधाओं जैसी व्यवस्थाओं को शामिल किया गया है।
सहमति और अधिकारों की प्रक्रिया भी अहम
टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र से गांवों का पुनर्वास संरक्षण के उद्देश्य से किया जा सकता है, लेकिन प्रक्रिया में प्रभावित परिवारों के अधिकार और सहमति महत्वपूर्ण हैं। अगस्त 2026 में केंद्र सरकार ने भी बाघ अभयारण्य क्षेत्रों से अनुसूचित जनजातियों के विस्थापन से जुड़े मामलों में उनके अधिकारों और सुरक्षा उपायों की निगरानी की भूमिका राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के संदर्भ में स्पष्ट की है।
इसलिए नीलगढ़ और धुंधवानी के पुनर्वास की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होगी कि परिवार जंगल से बाहर चले गए, बल्कि यह भी देखना होगा कि उन्हें तय लाभ, भूमि और बुनियादी सुविधाएं समय पर मिलती हैं या नहीं। रातापानी के कोर क्षेत्र को वन्यजीवों के लिए अधिक सुरक्षित और निर्बाध बनाने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन इसके साथ प्रभावित परिवारों का पारदर्शी और समुचित पुनर्वास भी उतना ही जरूरी रहेगा।
