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अमिता केबी और सौरभ जैन के खिलाफ शिकायत, लोकायुक्त ने जांच कर मांगा तथ्यात्मक प्रतिवेदन

गणेश पाण्डेय, भोपाल। टीकमगढ़ वन मंडल में चिंकारा शिकार से जुड़े मामलों और जब्त वाहनों की राजसात प्रक्रिया को लेकर की गई शिकायत अब लोकायुक्त कार्यालय तक पहुंच गई है। लोकायुक्त कार्यालय मध्यप्रदेश, भोपाल के विधि सलाहकार-तीन की ओर से 17 जून 2026 को जारी पत्र में शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर तथ्यात्मक प्रतिवेदन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में शिकायत के साथ दस्तावेजों की प्रतियां भी संबंधित अधिकारियों को भेजी गई हैं।

दस्तावेज के अनुसार शिकायत शिशुपाल अहिरवार की ओर से की गई है। शिकायत में टीकमगढ़ वन विभाग की तत्कालीन एसडीओ अमिता केबी तथा रेंजर सौरभ जैन के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं। लोकायुक्त कार्यालय के पत्र में शिकायतकर्ता से प्राप्त शिकायत और संलग्न दस्तावेजों का उल्लेख करते हुए आरोपों की जांच कर 14 अगस्त 2026 तक तथ्यात्मक प्रतिवेदन संगठन को उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।

शिकायत में क्या आरोप लगाए गए

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लोकायुक्त द्वारा जारी किया गया पत्र

शिकायत से संबंधित उपलब्ध जानकारी के अनुसार मामला चिंकारा शिकार से जुड़े वन अपराध प्रकरणों और उनमें जब्त वाहनों की राजसात प्रक्रिया से संबंधित है। शिकायतकर्ता ने कार्रवाई में कथित अनियमितताओं और प्रक्रिया को प्रभावित किए जाने जैसे आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

यही वजह है कि फिलहाल मामले को आरोपों की जांच के स्तर पर ही देखना उचित होगा। लोकायुक्त कार्यालय के पत्र में भी संबंधित अधिकारियों से तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगा गया है।

लोकायुक्त पत्र में किन अधिकारियों का उल्लेख

लोकायुक्त कार्यालय से जारी पत्र में शिकायत के संदर्भ में अमिता केबी, एसडीओ तथा सौरभ जैन, रेंजर, वन विभाग, जिला टीकमगढ़ का उल्लेख किया गया है। पत्र संबंधित वरिष्ठ वन अधिकारियों को भी भेजा गया है, जिनसे शिकायत में वर्णित आरोपों की जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया है।

अब जांच में किन दस्तावेजों की भूमिका अहम

मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए संबंधित वन अपराध प्रकरणों की केस डायरी, जब्ती पंचनामे, जब्त वाहनों के दस्तावेज, राजसात संबंधी आदेश, अपील या निर्मुक्ति से जुड़े रिकॉर्ड और अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई महत्वपूर्ण हो सकती है। जांच के दौरान इन्हीं अभिलेखों के आधार पर शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि या खंडन किया जा सकेगा।

अभी आरोप साबित नहीं हुए

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि लोकायुक्त कार्यालय द्वारा तथ्यात्मक जांच और रिपोर्ट मांगी गई है। इसलिए शिकायत में लगाए गए आरोपों को अभी सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। संबंधित अधिकारियों का पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

फिलहाल लोकायुक्त की कार्रवाई का दस्तावेजी तथ्य इतना है कि शिकायत के आरोपों की जांच कर तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगा गया है। अब देखना होगा कि जांच में वन अपराध प्रकरणों और जब्त वाहनों की राजसात प्रक्रिया को लेकर लगाए गए आरोपों पर क्या तथ्य सामने आते हैं।