बाघों के दुश्मन पर STSF का वार

पत्नी के मोबाइल से मिला सुराग, कई राज्यों में फैले वन्यजीव अपराध नेटवर्क की खुलने लगी कड़ियां

गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश में बाघों के शिकार और उनके अंगों की कथित अंतरराष्ट्रीय तस्करी के खिलाफ स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) को बड़ी सफलता मिली है। शहडोल जिले के ब्यौहारी से कथित बाघ शिकारी शेरु पारधी उर्फ शेरु सिंह को उसकी पत्नी बिनौरी बाई के साथ गिरफ्तार किया गया है। दोनों को 4 सितंबर को उस समय पकड़ा गया, जब वे कथित तौर पर वन्यजीव के शिकार की तैयारी में थे। उनके कब्जे से छुरी, चाकू, कुल्हाड़ी और पक्षी पकड़ने का जाल बरामद किया गया। दोनों को 5 सितंबर को विशेष न्यायालय, जबलपुर में पेश किया गया, जहां से पांच दिन की फॉरेस्ट रिमांड मिली है।

इस गिरफ्तारी का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि शेरु का नाम केवल मध्यप्रदेश के एक मामले तक सीमित नहीं है। वन विभाग के रिकॉर्ड में उसके खिलाफ कर्नाटक में 2002 और महाराष्ट्र में 2013 के वन अपराध प्रकरण दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इनमें से एक मामले की जांच सीबीआई द्वारा किए जाने का भी उल्लेख है। महाराष्ट्र वन विभाग ने उसे फरार घोषित किया था।

पत्नी के मोबाइल ने पहुंचाया शेरु तक

ताजा जानकारी में गिरफ्तारी की एक अहम कड़ी सामने आई है। महाराष्ट्र के लोकसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार, STSF ने शेरु की पत्नी बिनौरी के मोबाइल से मिली जानकारी के आधार पर उसकी गतिविधियों का पता लगाया और फिर ब्यौहारी क्षेत्र में कार्रवाई की। STSF अधिकारियों ने बताया कि महाराष्ट्र वन विभाग के साथ भी समन्वय किया जा रहा है और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद महाराष्ट्र में दर्ज मामलों को लेकर कार्रवाई की जा सकती है।

आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद शेरु तक पहुंची जांच

यह गिरफ्तारी उस जांच की अगली कड़ी है, जो 18 फरवरी 2025 को MPSTSF की जबलपुर क्षेत्रीय इकाई में दर्ज वन अपराध प्रकरण के बाद शुरू हुई थी। जांच में बाघों के शिकार और उनके अंगों की तस्करी से जुड़े संगठित नेटवर्क के सक्रिय होने की बात सामने आई। अब तक मध्यप्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, मिजोरम और मेघालय से आठ आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है।

जांच एजेंसियों के मुताबिक कथित नेटवर्क में पंजाब के होशियारपुर, हरियाणा के सोनीपत, हिमाचल प्रदेश के बद्दी और मध्यप्रदेश के कटनी से जुड़े लोग शामिल बताए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि 2024-25 के दौरान महाराष्ट्र, तेलंगाना, उत्तराखंड और मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों में बाघों के शिकार की घटनाओं से इस नेटवर्क को जोड़कर देखा जा रहा है।

बहेलिया परिवार की कई कड़ियां जांच के दायरे में

ताजा महाराष्ट्र रिपोर्ट में शेरु के पारिवारिक नेटवर्क को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक अजित, केरु और कुट्टू नाम के उसके परिवार के सदस्यों का नाम भी वन विभाग के रिकॉर्ड में बहेलिया शिकारियों के रूप में दर्ज है। केरु और अजित के बेटे सूर्या तथा गटैया के फरार होने का भी उल्लेख किया गया है। इन दावों की पुष्टि के लिए आगे की जांच महत्वपूर्ण होगी।

शेरु को कथित कुख्यात बाघ शिकारी अजीत पारधी का भाई भी बताया गया है। वन विभाग के अनुसार वह संगठित गिरोह के साथ वन्यजीव शिकार में सक्रिय रहा है और कई राज्यों की एजेंसियां उसकी तलाश कर रही थीं।

बाघ के अंगों से म्यांमार और आगे विदेशी बाजार तक कनेक्शन?

जांच का सबसे गंभीर पहलू कथित अंतरराष्ट्रीय सप्लाई नेटवर्क है। जांच एजेंसियों के अनुसार, बाघों से प्राप्त हड्डियां और अन्य अंग मेघालय, असम और मिजोरम के कुछ तस्करों तक पहुंचाए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद इनकी कथित तस्करी म्यांमार स्थित एक सरगना के माध्यम से आगे किए जाने की आशंका जताई जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या वन्यजीव अंगों को चीन और अन्य देशों के अवैध बाजारों तक पहुंचाया जाता था।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने वाली पूरी सप्लाई चेन अभी जांच का विषय है। इसलिए इसे स्थापित तथ्य के बजाय जांच में सामने आई आशंका के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और कर्नाटक के मामलों को जोड़ा जा रहा

ताजा रिपोर्ट के अनुसार शेरु को महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और कर्नाटक में दर्ज पुराने बाघ शिकार मामलों से जोड़ा जा रहा है। लोकसत्ता ने रिपोर्ट किया है कि महाराष्ट्र के दो, मध्यप्रदेश के दो और कर्नाटक के एक बाघ शिकार प्रकरण में उसका नाम सामने आया है। वहीं अन्य रिपोर्टों में फिलहाल कर्नाटक 2002 और महाराष्ट्र 2013 के मामलों की पुष्टि की गई है।

यही वजह है कि शेरु की गिरफ्तारी को केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय वन्यजीव अपराध नेटवर्क की पुरानी कड़ियों को जोड़ने के अवसर के तौर पर देखा जा रहा है।

पांच दिन की रिमांड में खुलेंगे कई राज?

जबलपुर की विशेष अदालत से मिली पांच दिन की फॉरेस्ट रिमांड अब जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है। STSF शेरु से उसके पुराने मामलों, संपर्कों, गिरोह के सदस्यों, संभावित शिकार स्थलों और वन्यजीव अंगों की कथित सप्लाई चेन के बारे में पूछताछ कर सकती है।

सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि शेरु के पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे, अलग-अलग राज्यों में शिकार और तस्करी की कड़ियां कैसे जुड़ी थीं और क्या इस नेटवर्क का अंतरराष्ट्रीय स्तर तक कोई संगठित संपर्क है। पांच दिन की पूछताछ और आगे की जांच से इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।

वन्यजीव अपराध की अंतरराज्यीय कड़ी

मामले की मौजूदा जानकारी से इतना स्पष्ट है कि जांच का दायरा ब्यौहारी की गिरफ्तारी से कहीं आगे महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पूर्वोत्तर राज्यों और कथित तौर पर म्यांमार तक जा रहा है। हालांकि इनमें से प्रत्येक कड़ी की कानूनी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

अब STSF की जांच की दिशा यह तय करेगी कि शेरु एक बड़े नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी है या उसके खिलाफ पुराने मामलों के साथ-साथ वर्तमान प्रकरण में भी अलग-अलग स्तर की भूमिका सामने आती है।