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नई दिल्ली
 भारत मंडपम् में होने वाले 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और हाई-प्रोफाइल डेलिगेशंस पहुंच रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां सिर्फ वीवीआईपी रूट और होटलों तक ही मुस्तैद नहीं रहेंगी, बल्कि कई टीमें इस दौरान हवाई गश्त पर भी रहेंगी। सिक्योरिटी असेसमेंट ने इंटर-स्टेट कोऑर्डिनेशन में ड्रोन, पैराग्लाइडर और दूसरे रिमोट कंट्रोल्ड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट्स से जुड़े खतरे को भी प्रमुखता से शामिल किया है।

  • मौजूदा वैश्विक तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए सुरक्षा का फोकस सबसे ज्यादा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को लेकर है।
  • वीवीआईपी नेताओं के काफिले में शामिल सभी गाड़ियों में जीपीएस डिवाइस लगाए गए हैं, जिससे कंट्रोल रूम से उनकी रियल-टाइम लोकेशन ट्रैक की जा सके।
  • मुख्य कार्यक्रम स्थल और होटलों में एंट्री के लिए हाईटेक फेशियल रिकग्निशन और बायोमीट्रिक सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है।
  • एंटी-ग्राफिटी गश्त, पिकेट चेकिंग और स्टैटिक तैनाती से पूरे इलाके को कवर किया गया है।

30 हजार जवानों के घेरे में दिल्ली, 100 से ज्यादा NSG कमांडो तैनात
सेंट्रल एजेंसियों के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पूरी दिल्ली में करीब 30 हजार सुरक्षाकर्मियों और 100 से ज्यादा NSG कमांडो की तैनाती की गई है। इसके अलावा प्रोग्राम स्थल और होटलों की सुरक्षा में 7 हजार जवानों को लगाया गया है। 11 प्रमुख होटलों से भारत मंडपम् तक वीवीआईपी काफिलों के लिए अलग-अलग रूट तैयार किए गए हैं। अलग-अलग मेहमानों के लिए एंट्री गेट और ड्रॉप पॉइंट भी अलग रखे गए हैं, ताकि दो देशों के काफिले एक साथ सामने न आएं।

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