मैहर में हाथी का आतंक

गोरसरी घाटी से गांवों की ओर पहुंचा हाथी E-5, रातभर वन विभाग ने संभाला मोर्चा

गणेश पाण्डेय, भोपाल। मैहर वनमंडल के अमरपाटन परिक्षेत्र में गोरसरी घाटी के आसपास हाथी E-5 की मौजूदगी से कई गांवों में दहशत का माहौल है। 9 सितंबर की रात से 10 सितंबर की सुबह तक हाथी गोरसरी पहाड़ से नीचे उतरकर आबादी वाले इलाकों में पहुंच गया। किरहाई, ओबरा, छिरहाई, चोरखरी, भीषमपुर, पठरा और छांईन समेत आसपास के गांवों में हाथी की आवाजाही से ग्रामीणों को रातभर सतर्क रहना पड़ा। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक हाथी ने ओबरा के पास एक झोपड़ी को भी नुकसान पहुंचाया, हालांकि उस समय झोपड़ी में कोई मौजूद नहीं था।

कच्चे मकानों से ग्रामीणों को निकाला

हाथी के आबादी के करीब पहुंचने के बाद वन विभाग ने पुलिस और प्रशासन के सहयोग से संवेदनशील इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को कच्चे मकानों से निकालकर सुरक्षित पक्के भवनों, पंचायत या सामुदायिक भवनों में पहुंचाने की कार्रवाई की। वन अमले ने रातभर हाथी की गतिविधियों पर नजर रखी और रेडियो कॉलर के जरिए उसकी लोकेशन की निगरानी की। हाथी की निगरानी के लिए बांधवगढ़ से प्रशिक्षित कुमकी हाथियों को भी लगाया गया है।

आज भी कई गांवों में खतरा

वन विभाग ने ग्रामीणों को ओबरा, छिरहाई, चोरखरी, भीषमपुर, पठरा, छांईन सहित आसपास के इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। हाथी के नजदीक जाने, उसका पीछा करने या उसे खेत से भगाने की कोशिश नहीं करने की अपील की गई है। ग्रामीणों से कम से कम 200 मीटर की सुरक्षित दूरी बनाए रखने तथा फोटो-सेल्फी के लिए हाथी के पास नहीं जाने को कहा गया है। तेज रोशनी या टॉर्च डालकर हाथी को उकसाने से भी बचने की सलाह दी गई है।

कच्चे मकानों में रात न बिताने की सलाह

जंगल से लगे इलाकों में कच्चे मकानों में रहने वाले ग्रामीणों को हाथी की मौजूदगी के दौरान वहां रात नहीं बिताने की सलाह दी गई है। विभाग ने जरूरत पड़ने पर ग्राम पंचायत भवन, सामुदायिक भवन या अन्य सुरक्षित पक्के भवनों में शरण लेने को कहा है। वन विभाग के अनुसार हाथी के व्यवहार और मूवमेंट की लगातार निगरानी की जा रही है तथा मानव और वन्यप्राणी दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।

फसल नुकसान का मिलेगा मुआवजा

हाथी द्वारा खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाए जाने की स्थिति में नियमानुसार क्षतिपूर्ति का प्रावधान है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि फसल बचाने या हाथी को भगाने के लिए उसके नजदीक जाकर अपनी जान जोखिम में न डालें। नुकसान की सूचना संबंधित अमले को दें, ताकि नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।

बाणसागर पार कर मैहर पहुंचा था E-5

रिपोर्टों के मुताबिक E-5 बांधवगढ़ क्षेत्र से निकलने के बाद करीब 5 किलोमीटर चौड़े बाणसागर जलभराव को तैरकर पार कर मैहर पहुंचा था। इसके बाद वह अमरपाटन क्षेत्र की गोरसरी घाटी में पहुंचा। हाथी के आबादी के करीब आने के बाद मैहर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई और वन विभाग की टीमें लगातार उसकी निगरानी में जुटी हैं।

ताजा रिपोर्टों में E-5 से एक किसान की मौत की भी जानकारी सामने आई है, इसलिए इस पूरे घटनाक्रम में मानव सुरक्षा को लेकर प्रशासन की सतर्कता और बढ़ गई है।