राज्यपाल की नियुक्ति में देरी पर संवैधानिक सवाल
गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल का पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद नए राज्यपाल की नियुक्ति में देरी का मामला मध्यप्रदेश हाई कोर्ट पहुंच गया है। जबलपुर स्थित हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका में मांग की गई है कि नए राज्यपाल की नियुक्ति होने तक पद का प्रभार हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को सौंपा जाए। मंगलवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद युगलपीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
याचिका में उठाया गया संवैधानिक प्रश्न
सेवानिवृत्त कृषि वैज्ञानिक डॉ. एमए खान ने यह जनहित याचिका दायर की है। याचिका के अनुसार मंगुभाई पटेल ने जुलाई 2021 में मध्यप्रदेश के राज्यपाल पद की शपथ ली थी और उनका पांच वर्ष का सामान्य कार्यकाल जुलाई 2026 में पूरा हो गया। इसके बाद नए राज्यपाल की नियुक्ति नहीं होने की स्थिति को लेकर संवैधानिक व्यवस्था पर सवाल उठाया गया है।
याचिका में कहा गया है कि नए राज्यपाल की नियुक्ति होने तक किसी अन्य संवैधानिक पदाधिकारी को प्रभार सौंपने की व्यवस्था पर अदालत को स्पष्टता देनी चाहिए।
केंद्र ने अनुच्छेद 156 का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने याचिका में की गई मांग का विरोध किया। केंद्र की ओर से संविधान के अनुच्छेद 156 का हवाला देते हुए कहा गया कि राज्यपाल का कार्यकाल सामान्य रूप से पांच वर्ष का होता है, लेकिन अवधि पूरी होते ही पद स्वतः रिक्त नहीं माना जाता।
केंद्र के अनुसार मौजूदा राज्यपाल अपने उत्तराधिकारी के पदभार ग्रहण करने तक पद पर बने रह सकते हैं। इसी प्रावधान के आधार पर सरकार ने कहा कि पांच वर्ष की अवधि पूरी होना और राज्यपाल का पद रिक्त होना अलग-अलग संवैधानिक स्थितियां हैं।
जिस मुख्य न्यायाधीश को प्रभार देने की मांग, उन्हें राज्यपाल ने ही दिलाई थी शपथ
याचिका में मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे को राज्यपाल का प्रभार सौंपने की मांग की गई है। न्यायमूर्ति कोगजे ने हाल ही में मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली है। शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने ही उन्हें पद की शपथ दिलाई थी।
फैसला सुरक्षित, अब न्यायिक आदेश का इंतजार
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने की। अदालत के फैसले से यह स्पष्ट हो सकता है कि राज्यपाल का पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा होने के बाद उत्तराधिकारी की नियुक्ति तक संवैधानिक व्यवस्था किस प्रकार लागू होगी।
फिलहाल हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है। अदालत का निर्णय ही यह तय करेगा कि याचिका में की गई मांग पर न्यायिक हस्तक्षेप की गुंजाइश है या अनुच्छेद 156 के तहत मौजूदा राज्यपाल के उत्तराधिकारी के पदभार ग्रहण करने तक पद पर बने रहने की व्यवस्था लागू रहेगी।
