डीजी फॉरेस्ट की दौड़ में आवेदन से पहले पुरानी एफआईआर बनी अड़चन
गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश वन मुख्यालय में पदस्थ पीसीसीएफ भू-अभिलेख एवं प्रबंध संचालक, राज्य वन विकास निगम मनोज कुमार अग्रवाल ने केंद्र में डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेस्ट्स (डीजी फॉरेस्ट) पद के लिए आवेदन करने राज्य शासन से अनुमति मांगी है। सूत्रों के अनुसार, उनके खिलाफ दर्ज पुरानी लोकायुक्त एफआईआर की वर्तमान स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने क्वेरी की है। इसके बाद अनुमति की प्रक्रिया फिलहाल आगे नहीं बढ़ी है।
शासन स्तर पर लंबित है अनुमति
अग्रवाल की ओर से केंद्र के शीर्ष वन प्रशासनिक पद के लिए आवेदन से पहले राज्य सरकार से आवश्यक अनुमति मांगी गई है। यह अनुमति वन विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह के स्तर पर लंबित बताई जा रही है। अंतिम निर्णय शासन स्तर पर होना है।
2019 की एफआईआर फिर चर्चा में
अग्रवाल के खिलाफ अक्टूबर 2019 में लोकायुक्त पुलिस द्वारा सीहोर वनमंडल से जुड़े एक पुराने मामले में एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामला प्रकरण से संबंधित फाइलों और साक्ष्यों में शामिल जेसीबी मशीन के गायब होने के आरोपों से जुड़ा बताया जाता है।
अब डीजी फॉरेस्ट पद के लिए आवेदन की अनुमति के संदर्भ में इस एफआईआर की वर्तमान जांच स्थिति, आरोपपत्र दाखिल होने और न्यायालय में प्रकरण की स्थिति की जानकारी महत्वपूर्ण हो गई है। एफआईआर दर्ज होना अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है और मामले की अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी।
30 सितंबर को खाली होगा डीजी फॉरेस्ट पद
केंद्र में वर्तमान डीजी फॉरेस्ट सुशील कुमार अवस्थी हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनका कार्यकाल सितंबर के अंत में सेवानिवृत्ति के कारण समाप्त होगा। ऐसे में शीर्ष पद पर नई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होने के बीच मध्यप्रदेश के अधिकारी की दावेदारी और राज्य सरकार की अनुमति महत्वपूर्ण हो गई है।

