अब डीएफओ -कार्य आयोजना अधिकारी को CF सर्किल सिवनी का प्रभार देने पर सवाल बरकरार
वरिष्ठ अधिकारियों की कमी के नाम पर चल रहे प्रभारों की समीक्षा कब होगी
गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश वन विभाग में वरिष्ठ पदों पर अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था को लेकर उठ रहे प्रशासनिक सवालों के बीच जबलपुर में एक और बदलाव किया गया है। 18 सितंबर 2026 के विभागीय आदेश के अनुसार, नर्मदापुरम वृत्त के मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) अशोक कुमार को उनके वर्तमान दायित्वों के साथ कार्य आयोजना-आंचलिक, जबलपुर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। अशोक कुमार के कार्यभार ग्रहण करने के बाद वन संरक्षक संध्या को कार्य आयोजना-आंचलिक, जबलपुर के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया जाएगा। विभाग ने आदेश में एपीसीसीएफ और सीसीएफ स्तर के अधिकारियों की कमी को इस व्यवस्था का आधार बताया है। आदेश के अनुसार, जबलपुर में कार्य आयोजना से जुड़े कार्यों को गति देने के लिए यह व्यवस्था अगले आदेश तक अस्थायी रूप से लागू रहेगी।
इससे पहले वन विभाग के सिवनी वृत्त में भी अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था बदली गई थी। संध्या को सिवनी वृत्त के सीसीएफ पद के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर वरिष्ठ डीएफओ स्तर के अधिकारी एए अंसारी को यह जिम्मेदारी दी गई। संध्या की मौजूदा पदस्थापना कार्य आयोजना, बालाघाट में वन संरक्षक के पद पर है। लगातार प्रभारों में हो रहे बदलाव के बीच सवाल यह है कि क्या विभाग के पास वरिष्ठ पदों को भरने के लिए कोई स्पष्ट समयबद्ध योजना है। अधिकारियों की कमी के कारण अस्थायी व्यवस्था की जा सकती है, लेकिन लंबे समय तक अतिरिक्त प्रभार जारी रहने पर कैडर प्रबंधन, वरिष्ठता और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े प्रश्न उठते हैं।
DFO और WPO को सीएफ वृत्त का प्रभार देने पर सवाल
वन विभाग में वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) और कार्य आयोजना अधिकारी (डब्ल्यूपीओ) की अपनी निर्धारित प्रशासनिक भूमिकाएं हैं। वहीं, मुख्य वन संरक्षक (सीएफ) और मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) वृत्तीय स्तर के वरिष्ठ पद हैं। ऐसे में जब डीएफओ या डब्ल्यूपीओ स्तर के अधिकारियों को सीएफ वृत्त का अतिरिक्त प्रभार दिया जाता है, तो इस व्यवस्था के औचित्य और कैडर प्रबंधन नीति के अनुरूप होने को लेकर सवाल उठते हैं। मुख्य प्रश्न यह है कि अतिरिक्त प्रभार देने के लिए विभाग में वरिष्ठता, पद की संवर्गीय स्थिति, अनुभव और प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर कोई समान मानक लागू हैं या नहीं।
कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से अतिरिक्त प्रभार में
विभागीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि सिवनी वृत्त और पन्ना टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर, संजय टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर तथा रीवा, भोपाल, ग्वालियर और शहडोल वृत्तों में सीसीएफ के पद लंबे समय से अतिरिक्त प्रभार के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं। इन दावों की अवधि और वर्तमान स्थिति की पुष्टि संबंधित विभागीय आदेशों से की जानी आवश्यक है। यदि महत्वपूर्ण पदों पर अतिरिक्त प्रभार लंबे समय तक जारी रहता है, तो विभाग को इसकी समय-सीमा, समीक्षा प्रक्रिया और प्रभार देने के आधार को स्पष्ट करना होगा।
अतिरिक्त प्रभार के लिए पारदर्शी मानक की जरूरत
अधिकारी उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में अतिरिक्त प्रभार देना प्रशासनिक रूप से संभव है। हालांकि, ऐसी व्यवस्था को अस्थायी बनाए रखने के लिए नियमित समीक्षा और स्पष्ट समय-सीमा जरूरी है। वन विभाग में अतिरिक्त प्रभार देने की प्रक्रिया में वरिष्ठता, संबंधित पद की संवर्गीय स्थिति और अधिकारी की प्रशासनिक जिम्मेदारियों को लेकर पारदर्शी मानक तय किए जाने की मांग उठ रही है। विभाग की ओर से अधिकारियों की कमी को आधार बताया गया है, इसलिए यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि वरिष्ठ पदों को नियमित रूप से भरने और अतिरिक्त प्रभार समाप्त करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
