वन भवन भोपाल मप्र

पदोन्नति नियम 2025 का पालन नहीं करने पर उच्च स्तरीय जांच की मांग

वन कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष पंकज पाण्डेय ने की पीएस और हॉफ से चर्चा

गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश वन कर्मचारी संघ ने रीवा, छतरपुर और जबलपुर में वनरक्षक से वनपाल पद पर हुई पदोन्नति में कथित अनियमितताओं को लेकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। संघ का आरोप है कि वरीयता सूची तैयार करते समय जिला कैडर, सेवा पुस्तिका, आरक्षण रोस्टर और पदोन्नति नियम 2025 के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। इसके चलते कनिष्ठ कर्मचारियों को वरिष्ठ दर्शाकर पदोन्नति देने और पात्र वरिष्ठ कर्मचारियों को लाभ से वंचित करने की स्थिति बनी। प्रांताध्यक्ष पंकज पाण्डेय के नेतृत्व में संघ के प्रतिनिधिमंडल ने प्रमुख सचिव वन राघवेंद्र सिंह और वन बल प्रमुख शुभ रंजन सेन से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। संघ ने वरीयता सूची की उच्च स्तरीय जांच कराने और नियमों के अनुसार नई सूची तैयार करने की मांग रखी है।

मंगलवार को भोपाल में संघ की प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक हुई। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने पदोन्नति में कथित गड़बड़ी के साथ स्वयं के व्यय पर जिला बदलने वाले वनरक्षकों की वरिष्ठता और रिक्त पदों पर प्रतीक्षा सूची से पदोन्नति का मुद्दा उठाया। संघ ने 17 जुलाई 2023 के शासन आदेश का हवाला देते हुए कहा कि स्वयं के व्यय पर जिला बदलने वाले वनरक्षक को नए जिले में सबसे कनिष्ठ माना जाता है। संगठन ने पुलिस विभाग के 18 मार्च 2025 के आदेश की तर्ज पर वन विभाग में भी व्यवस्था लागू करने की मांग की, जिसमें कर्मचारी की वरिष्ठता उसी भर्ती वर्ष के बैच के अंत में निर्धारित करने का प्रस्ताव है। अधिकारियों ने वरीयता सूची की जांच कर नियमानुसार शीघ्र निराकरण और जिला परिवर्तन से जुड़े मामलों में न्यायपूर्ण व्यवस्था के प्रस्ताव पर विचार करने का आश्वासन दिया।

पदोन्नति में कथित गड़बड़ी की जांच

संघ के अनुसार, रीवा, छतरपुर और जबलपुर में वनरक्षक से वनपाल पद पर पदोन्नति के लिए तैयार वरीयता सूची में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। संगठन का आरोप है कि कनिष्ठ कर्मचारियों को वरिष्ठ दर्शाकर पदोन्नति दी गई, जिससे वरिष्ठ पात्र कर्मचारी प्रभावित हुए। संघ ने संबंधित जिलों की वरीयता सूची, सेवा पुस्तिका, जिला कैडर और आरक्षण रोस्टर की जांच की मांग की है। इसके साथ ही पदोन्नति नियम 2025 के अनुसार पात्रता और वरिष्ठता का दोबारा परीक्षण कर संशोधित सूची जारी करने की मांग भी रखी गई है।

जिला बदलने वाले वनरक्षकों की वरिष्ठता

स्वयं के व्यय पर जिला बदलने वाले वनरक्षकों को नए जिले में सबसे कनिष्ठ माने जाने की व्यवस्था पर संघ ने आपत्ति जताई है। संघ ने 17 जुलाई 2023 के शासन आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रावधान से संबंधित कर्मचारियों की वरिष्ठता प्रभावित होती है। संगठन ने पुलिस विभाग के 18 मार्च 2025 के आदेश की तर्ज पर वन विभाग में भी व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत स्वेच्छा से जिला बदलने वाले कर्मचारी की वरिष्ठता उसी भर्ती वर्ष के बैच के अंत में निर्धारित करने की मांग की गई है।

प्रतीक्षा सूची से पदोन्नति की मांग

वन कर्मचारी संघ ने रिक्त पदों पर प्रतीक्षा सूची के माध्यम से जल्द पदोन्नति करने की मांग भी उठाई है। संघ का कहना है कि पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ देने के लिए रिक्त पदों की स्थिति और लागू नियमों के अनुसार प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी चाहिए। इस मामले में विभाग को पदों की उपलब्धता, आरक्षण प्रावधान और संबंधित पदोन्नति नियमों के आधार पर निर्णय लेना होगा।

प्रमुख सचिव और हॉफ से मिला प्रतिनिधिमंडल

प्रांताध्यक्ष पंकज पाण्डेय के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने प्रमुख सचिव वन राघवेंद्र सिंह और वन बल प्रमुख शुभ रंजन सेन को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया। संघ के अनुसार, अधिकारियों ने वरीयता सूची से जुड़े मामलों को गंभीरता से सुना और नियमानुसार जल्द निराकरण का आश्वासन दिया। स्वयं के व्यय पर जिला बदलने वाले कर्मचारियों के मामलों में पुलिस विभाग की तरह व्यवस्था बनाने के प्रस्ताव पर भी विचार करने की बात कही गई। हालांकि, जांच समिति के गठन और निर्णय की समय-सीमा के संबंध में अलग से जानकारी सामने नहीं आई है।

जांच में किन बिंदुओं का परीक्षण जरूरी

पदोन्नति विवाद के निराकरण के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति तिथि, जिला कैडर, सेवा पुस्तिका, आरक्षण स्थिति और पदोन्नति पात्रता का परीक्षण आवश्यक होगा। इसके साथ ही वरीयता सूची तैयार करने के समय लागू नियमों, सूची में किए गए संशोधनों और पदोन्नति आदेशों का मिलान किया जाना चाहिए। यदि किसी कर्मचारी को गलत तरीके से वरिष्ठता दी गई है, तो उसके आधार और अनुमोदन प्रक्रिया की भी जांच जरूरी होगी। अंतिम निर्णय विभागीय अभिलेखों और सक्षम स्तर पर की गई जांच के आधार पर ही लिया जा सकेगा।

विभाग के सामने चुनौती

वन विभाग के सामने एक ओर पदोन्नति से जुड़ी शिकायतों की जांच करने और दूसरी ओर जिला बदलने वाले कर्मचारियों की वरिष्ठता के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाने की चुनौती है। पारदर्शी पदोन्नति प्रक्रिया के लिए वरिष्ठता निर्धारण के स्पष्ट मानक, नियमों का पालन और समयबद्ध शिकायत निवारण जरूरी होगा। फिलहाल संघ ने अपनी मांगें रखी हैं और अधिकारियों की ओर से वरीयता सूची की जांच तथा नियमानुसार निराकरण का आश्वासन दिए जाने की जानकारी दी गई है।