गणेश पाण्डेय, भोपाल। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर बफर क्षेत्र में पांच दिवसीय हाथी पुनर्यौवनीकरण कैंप-2026 की शुरुआत हुई। परासी गेट के समीप आयोजित महोत्सव में झमाझम बारिश और हरियाली के बीच कैंप हाथियों की देखभाल, स्वास्थ्य और संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां हुईं। इस दौरान ग्रामीणों, पर्यटकों, पत्रकारों और वन अधिकारियों को हाथियों को करीब से जानने और उनके संरक्षण में भूमिका समझने का अवसर मिला। आयोजन में हाथियों के लिए आराम, पसंदीदा भोजन और विशेष देखभाल की व्यवस्था की गई।
महोत्सव में नन्हे नर हाथी कृष्णा सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहा। कभी उछल-कूद तो कभी अठखेलियों के जरिए उसने मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। कृष्णा का जन्म अक्टूबर 2025 में बांधवगढ़ में हुआ था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 31 दिसंबर 2025 को बांधवगढ़ प्रवास के दौरान उसका नामकरण किया था। आयोजन के दौरान हाथियों की देखभाल के साथ ग्रामीणों को वन्यजीव संरक्षण से जोड़ने और बफर क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।
15 कैंप हाथियों की अलग-अलग जिम्मेदारियां

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वर्तमान में 15 कैंप हाथी कार्यरत हैं। इनमें चार हाथियों का इस्तेमाल रेस्क्यू अभियान और दो हाथियों को अनुश्रवण कार्य में लगाया गया है। इसके अलावा नौ हाथियों को पुनर्यौवनीकरण कैंप में शामिल किया गया है। सहायक संचालक धमोखर मितेन्द्र चिचखेड़े ने कैंप हाथियों के काम और उनकी भूमिका की जानकारी दी। उप संचालक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व योहान कटारा ने कैंप के उद्देश्य और प्रस्तावित गतिविधियों के बारे में बताया।

कलेक्टर सहित अधिकारी और ग्रामीण रहे मौजूद
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि उमरिया कलेक्टर राखी सहाय ने हाथी महोत्सव को विशेष अनुभव बताया। आयोजन में उमरिया के डीएफओ विवेक सिंह, संभागीय प्रबंधक कारपोरेशन अमित पटौदी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभय सिंह ओहरिया, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप संचालक योहान कटारा सहित वन विभाग के अधिकारी, पत्रकार, ईडीसी अध्यक्ष और बड़ी संख्या में स्थानीय रहवासी मौजूद रहे।

हाथियों के स्वास्थ्य और देखभाल पर जोर
हाथी पुनर्यौवनीकरण कैंप का उद्देश्य हाथियों को आराम देने के साथ उनके स्वास्थ्य और देखभाल पर ध्यान देना है। कैंप के दौरान हाथियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। उन्हें पसंदीदा भोजन उपलब्ध कराया जाता है और उनकी विशेष देखभाल की जाती है। इस अवधि में महावतों और चारा-कटरों को भी विश्राम का अवसर मिलता है। आयोजन के जरिए हाथियों के प्रति संवेदनशीलता और संरक्षण की जिम्मेदारी के बारे में लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया गया।
बफर क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल
परासी गेट के समीप महोत्सव आयोजित करने का उद्देश्य बफर क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना और स्थानीय ग्रामीणों को वन्यजीव संरक्षण से जोड़ना है। कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों और पर्यटकों को हाथियों की कार्यप्रणाली, उनके संरक्षण और वन विभाग की जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी दी गई। ऐसे आयोजनों से स्थानीय समुदाय की वन्यजीव संरक्षण में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

महोत्सव के दौरान मैहर में हाथी रेस्क्यू अभियान
जब धमोखर में हाथी महोत्सव चल रहा था, उसी समय बांधवगढ़ की टीम मैहर वन मंडल के गोरसरी फॉरेस्ट क्षेत्र में हाथी रेस्क्यू अभियान में जुटी थी। क्षेत्र संचालक के नेतृत्व में कैंप हाथी, वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. तोमर और रेस्क्यू दल अभियान में शामिल रहे। रेस्क्यू अभियान में व्यस्त होने के कारण कई महावत, चारा-कटर और टीम के सदस्य उद्घाटन कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके। इससे स्पष्ट हुआ कि कैंप हाथियों की भूमिका केवल नियमित देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर रेस्क्यू और वन्यजीव प्रबंधन में भी उनका इस्तेमाल किया जाता है।

