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 रांची
 विकसित भारत जीरामजी योजना से रोजगार की गारंटी के साथ ही काम नहीं मिलने पर मुआवजे का भी प्रविधान किया गया है। आवेदन देने के बाद ऐसे श्रमिकों को पांच किमी के दायरे में ही काम देना होगा और इससे अधिक दूरी पर काम मिलने की स्थित में दस प्रतिशत अधिक मानदेय मिलेगा। केंद्र प्रायोजित इस योजना के तहत श्रमिकों को मुआवजा देने का भी प्रविधान है।

एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि कृषि कार्यों के वक्त लोगों को रोजगार नहीं मिलेगा ताकि कृषि क्षेत्र में श्रमिकों की कमी नहीं हो। फसल बुआई के दौरान अन्य योजनाओं के लिए श्रमिकों को रोजगार देने पर पाबंदी प्रभावी होगी। साल में कुल 60 दिनों की पाबंदी प्रभावी होगी।

झारखंड में वीबी जीरामजी योजना की अधिसूचना के साथ ही यह योजना प्रभावी हो गई है। योजना के तहत अभी काम मिलना मुश्किल है। इसके पीछे का कारण यह है कि अभी धान बुआई का समय चल रहा है और केंद्र प्रायोजित इस योजना में कृषि मौसम के दौरान श्रमि योजनाओं पर पाबंदी रहेगी। हां, जिन इलाकों में कृषि कार्य नहीं हो रहे होंगे वहां श्रमिकों को रोजगार मिल सकता है।

राज्य सरकार तय करेगी कब-कब बंद रहेगा काम
इस योजना के तहत राज्यों को यह छूट दी गई है कि वह कृषि कार्यों के लिए कृषि मौसम में काम बंद करा सके। राज्य सरकार चाहे तो एक बार में 60 दिनों के लिए काम रोक सकती है अथवा 15-15 दिनों के लिए चार बार काम बंद करना होगा। इस प्रकार 60 दिन के लिए इस योजना के तहत काम बंद ही रहेगा। इसका निर्धारण होने के बाद अधिसूचना जारी होगी।

विशेष श्रमिकों के लिए अलग रंग का होगा कार्ड
वीबी जीरामजी योजना एकल महिला, दिव्यांग, 60 वर्ष से अधिक के व्यक्ति एवं बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराए गए लोगों को विशेष रंग का ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड दिया जाएगा। इसका रंग और योजना का लोगो अभी फाइनल नहीं हुआ है। इसके फाइनल होने में अभी कम से कम 15 दिन और लगेंगे।

श्रमिकों के लिए बनेगा स्मार्ट कार्ड
वीबी जीरामजी योजना के तहत श्रमिकों के लिए स्मार्ट कार्ड बनाया जाएगा ताकि मजदूरों के काम करने को लेकर वास्तविक जानकारी मिल सके। स्मार्ट कार्ड में लगे चिप से इस योजना के तहत गड़बड़ियों पर नियंत्रण पाने में सफलता मिलेगी।

योजना की मुख्य विशेषताएं

  • परिवार के प्रत्येक वयस्क सदस्य को 125 दिनों का गारंटीकृत रोजगार मिलेगा।
  • मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर किया जाएगा और कार्य पूरा होने की तिथि से अधिकतम 15 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
  • यदि 15 दिनों के भीतर काम नहीं मिलता है, तो आवेदक बेरोजगारी भत्ते का हकदार होगा।
  • मजदूरी में देरी होने पर 16वें दिन से 0.05% प्रतिदिन की दर से मुआवजा दिया जाएगा।
  • यह एक केंद्र प्रायोजित योजना होगी, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार 60:40 के अनुपात में वित्त पोषण करेंगे।

 

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