कटारा हिल्स के इकोलॉजिकल पार्क में तेंदुए की मौजूदगी से दहशतलाहरपुर इकोलॉजिकल पार्क क्षेत्र में झाड़ियों के बीच नजर आया तेंदुआ।

तेंदुए को पकड़ने के बजाय विचरण करने दें, बेहतर इकोसिस्टम का संकेत है इसकी मौजूदगी: सुहास कुमार

गणेश पाण्डेय, भोपाल। कटारा हिल्स के लाहरपुर इकोलॉजिकल पार्क में तेंदुए की मौजूदगी के बाद वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। सोमवार दोपहर ग्रामीणों ने पार्क क्षेत्र में तेंदुआ देखा था। इसके बाद वन विभाग ने आसपास के लोगों को सतर्क रहने और कुछ दिनों तक पार्क में नहीं जाने की सलाह दी है। वन विभाग की टीमें पिछले दो दिनों से करीब 20 से 25 किलोमीटर के दायरे में तेंदुए की तलाश कर रही हैं। तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 10 से 12 स्थानों पर ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। सुबह और शाम पार्क में घूमने पर रोक लगाई गई है। आसपास के रिहायशी क्षेत्रों में भी लोगों को सतर्क किया गया है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, तेंदुए की लोकेशन मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी सुहास कुमार ने तेंदुए को पकड़ने के बजाय उसके प्राकृतिक विचरण की निगरानी करने की बात कही है। उन्होंने सेवानिवृत्त अधिकारियों के समूह में साझा संदेश में कहा कि लाहरपुर इकोलॉजिकल पार्क का वन क्षेत्र रायसेन के जंगलों से जुड़ा है और इस क्षेत्र में तेंदुए की आवाजाही पहले से होती रही है। उनका कहना है कि यदि तत्काल मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति नहीं है तो तेंदुए को अनावश्यक रूप से पकड़ने के बजाय स्वाभाविक रूप से विचरण करने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि तेंदुए की मौजूदगी बेहतर इकोसिस्टम का संकेत भी हो सकती है। उनके अनुसार, एपीसीसीएफ वन्यजीव और तत्कालीन भोपाल डीएफओ एल. कृष्णमूर्ति के समय विकसित किए गए इकोलॉजिकल पार्क में वर्ष 2016 से वन्यजीवों की मौजूदगी के संकेत मिलते रहे हैं। उन्होंने क्षेत्र में बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या को भी चिंता का विषय बताया। उनके मुताबिक, कुत्ते जंगली सूअर, तीतर, मोर, उनके अंडों-बच्चों और काले हिरण के शावकों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

20 से 25 किलोमीटर क्षेत्र में तलाश

वन विभाग की टीमें लाहरपुर इकोलॉजिकल पार्क के आसपास करीब 20 से 25 किलोमीटर के क्षेत्र में तेंदुए की तलाश कर रही हैं। तेंदुए की गतिविधियों का पता लगाने के लिए अलग-अलग स्थानों पर ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। अभी तेंदुए की सटीक लोकेशन सामने नहीं आई है। अधिकारियों के अनुसार, लोकेशन मिलने के बाद स्थिति के अनुसार अगली कार्रवाई की जाएगी।

सुबह-शाम पार्क में घूमने पर रोक

ताजा गतिविधि को देखते हुए वन विभाग ने एहतियात के तौर पर पार्क में सुबह और शाम की आवाजाही पर रोक लगाई है। लोगों को रात के समय पार्क के पीछे या वन क्षेत्र की ओर नहीं जाने और तेंदुए की तलाश में खुद जंगल में नहीं जाने की सलाह दी गई है। आसपास के रिहायशी क्षेत्रों में भी लोगों को सावधानी बरतने के लिए कहा गया है।

रायसेन के जंगलों से जुड़ा है लाहरपुर का वन क्षेत्र

सुहास कुमार के अनुसार, लाहरपुर इकोलॉजिकल पार्क का वन क्षेत्र रायसेन के जंगलों से जुड़ा हुआ है। इस कारण यहां वन्यजीवों की आवाजाही स्वाभाविक रूप से हो सकती है। उन्होंने कहा कि यदि तेंदुए की ओर से तत्काल मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति नहीं है तो उसे पकड़ने के बजाय उसकी गतिविधियों पर निगरानी रखी जानी चाहिए।

2016 से दिखते रहे वन्यजीवों की मौजूदगी के संकेत

सुहास कुमार के अनुसार, लाहरपुर क्षेत्र में वर्ष 2016 से तेंदुए समेत अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी के संकेत मिलते रहे हैं। उन्होंने बताया कि तत्कालीन एपीसीसीएफ वन्यजीव और भोपाल डीएफओ एल. कृष्णमूर्ति के समय इकोलॉजिकल पार्क को वन्यजीवों के बेहतर आवास के रूप में विकसित किया गया था। उनके अनुसार, ऐसे क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी इकोसिस्टम की स्थिति का एक संकेत हो सकती है।

आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या भी चिंता

सुहास कुमार ने क्षेत्र में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को वन्यजीवों के लिए चुनौती बताया है। उनके अनुसार, कुत्ते जंगली सूअर, तीतर, मोर और उनके अंडों-बच्चों के साथ काले हिरण के शावकों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने वन क्षेत्र में वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और खाद्य शृंखला को बनाए रखने की जरूरत बताई।

लोकेशन मिलने के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई

वन विभाग की टीमें फिलहाल तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, तेंदुए की वास्तविक लोकेशन और उसकी गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। तब तक लोगों से पार्क और आसपास के वन क्षेत्र में सावधानी बरतने की अपील की गई है।