सहायक ग्रेड-2 का पद स्वीकृत नहीं, फिर भी दिनेश कुमार शर्मा वहीं पदस्थ; अफसरों के जवाब पर उठे सवाल
गणेश पाण्डेय, भोपाल। वन विभाग में पदोन्नति के बाद कर्मचारियों की नई पदस्थापना को लेकर ओबेदुल्लागंज वन मंडल का मामला सवालों के घेरे में है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक हाल की पदोन्नति प्रक्रिया में सहायक ग्रेड-3 से सहायक ग्रेड-2 बने करीब 90 प्रतिशत कर्मचारियों को नई जगह पदस्थ किया गया, लेकिन दिनेश कुमार शर्मा को पदोन्नति के बाद भी ओबेदुल्लागंज वन मंडल में ही रखा गया। खास बात यह है कि ओबेदुल्लागंज वन मंडल में सहायक ग्रेड-2 का पद स्वीकृत नहीं होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पदोन्नति के बाद शर्मा की पदस्थापना किस स्वीकृत पद के विरुद्ध की गई और उनका वेतन किस पद से आहरित किया जाएगा। मामले में प्रभारी वन संरक्षक भोपाल क्षितिज कुमार से पूछे जाने पर उन्होंने पहले संभावना जताई कि संबंधित कर्मचारी ने पदोन्नति लेने से मना किया होगा। जब उन्हें बताया गया कि कर्मचारी को पदोन्नति दी जा चुकी है और इसके बावजूद उसे वहीं रखा गया है, तो उन्होंने मामले को दिखवाने की बात कही।
विभागीय सूत्रों का आरोप है कि वन विभाग की प्रशासन-2 शाखा में लंबे समय से सक्रिय कुछ कर्मचारियों के प्रभाव के कारण पदोन्नति और पदस्थापना में अलग-अलग मापदंड अपनाए जाने की शिकायतें हैं। फील्ड स्तर के कुछ कर्मचारियों ने दिनेश कुमार शर्मा की कार्यप्रणाली को लेकर भी आपत्ति जताई है और आरोप लगाया है कि वे सप्लायरों तथा ठेकेदारों के बीच भोपाल में पदस्थ वरिष्ठ अधिकारियों के नाम का प्रभाव दिखाते हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित कर्मचारी का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए। फिलहाल मुख्य सवाल पदोन्नति के बाद पदस्थापना की प्रक्रिया और स्वीकृत पद की उपलब्धता को लेकर है। यदि ओबेदुल्लागंज वन मंडल में सहायक ग्रेड-2 का पद स्वीकृत नहीं है, तो विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि शर्मा को वहां किस आधार पर पदस्थ रखा गया और उनके वेतन का आहरण किस स्वीकृत पद से किया जाएगा।
90 प्रतिशत कर्मचारियों की नई जगह पदस्थापना का दावा
विभागीय सूत्रों के अनुसार हाल की पदोन्नति में सहायक ग्रेड-3 से सहायक ग्रेड-2 बने अधिकांश कर्मचारियों को पदोन्नति के बाद नई जगह पदस्थ किया गया। सूत्रों का दावा है कि करीब 90 प्रतिशत कर्मचारियों को पदोन्नति के बाद स्थानांतरित किया गया, जबकि दिनेश कुमार शर्मा को ओबेदुल्लागंज में ही रखा गया। इसी अंतर को लेकर विभागीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।
स्वीकृत पद नहीं होने पर वेतन आहरण पर सवाल
पदोन्नति के बाद कर्मचारी को जिस पद पर पदस्थ किया जाता है, उसके लिए स्वीकृत पद और पदस्थापना आदेश महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में यदि ओबेदुल्लागंज वन मंडल में सहायक ग्रेड-2 का पद स्वीकृत नहीं है, तो शर्मा की पदस्थापना और वेतन आहरण की स्थिति स्पष्ट करना विभाग के लिए जरूरी होगा। इसी बिंदु पर विभागीय अधिकारियों से स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठ रही है।
प्रभारी वन संरक्षक ने जांच कराने की बात कही
मामले में प्रभारी वन संरक्षक भोपाल क्षितिज कुमार ने कहा कि संभव है कि संबंधित कर्मचारी ने पदोन्नति लेने से मना कर दिया हो। उन्होंने बताया कि कुछ कर्मचारियों ने ऐसा किया भी है। जब उन्हें बताया गया कि कर्मचारी को पदोन्नति मिल चुकी है और इसके बावजूद उसे उसी स्थान पर रखा गया है, तो उन्होंने कहा कि यदि पदोन्नति हुई है और वहां संबंधित पद नहीं है तो वे मामले को दिखवाएंगे।
कार्यप्रणाली को लेकर भी लगाए गए आरोप
फील्ड स्तर के कुछ कर्मचारियों ने दिनेश कुमार शर्मा की कार्यप्रणाली को लेकर असहजता जताने का दावा किया है। सूत्रों ने आरोप लगाया है कि वे सप्लायरों और ठेकेदारों के बीच भोपाल में पदस्थ वरिष्ठ अधिकारियों के नाम का प्रभाव दिखाते हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित कर्मचारी का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना आवश्यक होगा।
विभाग को इन सवालों के देने होंगे जवाब
पदोन्नति के बाद शर्मा को ओबेदुल्लागंज में ही रखने का आधार क्या है? वहां सहायक ग्रेड-2 का स्वीकृत पद है या नहीं? यदि पद स्वीकृत नहीं है तो वेतन किस पद के विरुद्ध आहरित होगा? अन्य कर्मचारियों के तबादले और इस मामले में अलग व्यवस्था क्यों की गई? इन सवालों पर विभाग की ओर से स्पष्ट स्थिति सामने आने के बाद ही पदस्थापना की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।
इनका कहना
उसने पदोन्नति लेने से मना कर दिया होगा। ऐसा कुछ लोगों ने किया भी है। हां, यदि पदोन्नति हुई और वह पद नहीं है तो इसे मैं दिखवाता हूं।
— क्षितिज कुमार, प्रभारी वन संरक्षक, भोपाल
