ड्रोन और 12 ट्रैप कैमरों से निगरानी, मूवमेंट की पुष्टि का इंतजार
गणेश पाण्डेय, भोपाल। कटारा हिल्स के लहारपुर इकोलॉजिकल पार्क के आसपास तेंदुए की गतिविधि की सूचना के बाद वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। संभावित मूवमेंट वाले क्षेत्रों में 10 से 12 ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं, जबकि ड्रोन की मदद से तेंदुए की सटीक लोकेशन तलाशने का प्रयास किया जा रहा है। वन विभाग की टीमें करीब 20 से 25 किलोमीटर के दायरे में संभावित रास्तों और वन क्षेत्रों में तलाश कर रही हैं। हालांकि, फिलहाल तेंदुए की वास्तविक लोकेशन और लगातार मूवमेंट की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सुरक्षा के मद्देनजर पार्क में सुबह और शाम की वॉक पर रोक लगाई गई है। आसपास के रहवासियों को भी सतर्क रहने और वन क्षेत्र की ओर अकेले नहीं जाने की सलाह दी गई है। वन अमला संभावित क्षेत्रों में लगातार गश्त कर रहा है।
अब वन विभाग की निगाहें ट्रैप कैमरों से मिलने वाले साक्ष्यों पर हैं। कैमरों में तेंदुए की तस्वीर या गतिविधि दर्ज होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वह किस क्षेत्र में सक्रिय है और उसका मूवमेंट किस दिशा में है। लहारपुर इकोलॉजिकल पार्क पहले से हरित क्षेत्र और प्राकृतिक ट्रेल के लिए जाना जाता है। वर्ष 2023 की एक रिपोर्ट में यहां हिरण सहित शाकाहारी वन्यजीवों की मौजूदगी का उल्लेख किया गया था। ऐसे में तेंदुए की संभावित गतिविधि शहर के आसपास मौजूद प्राकृतिक वन क्षेत्रों के महत्व को भी सामने लाती है। हालांकि, केवल तेंदुए की मौजूदगी के आधार पर इकोसिस्टम के बेहतर होने का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके लिए क्षेत्र की जैव विविधता, शिकार प्रजातियों, वनस्पति और अन्य पर्यावरणीय संकेतकों का वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी होगा।
20 से 25 किलोमीटर के दायरे में तलाश

वन विभाग की टीमें करीब 20 से 25 किलोमीटर के क्षेत्र में तेंदुए के संभावित मूवमेंट की तलाश कर रही हैं। जंगल से जुड़े रास्तों, झाड़ियों और संभावित आवाजाही वाले स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई है। ड्रोन के साथ मैदानी गश्त भी जारी है। तेंदुए की लोकेशन मिलने के बाद ही उसकी गतिविधियों के अनुरूप आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
12 ट्रैप कैमरों से सामने आएगी तस्वीर
संभावित मूवमेंट वाले क्षेत्रों में 10 से 12 ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों का उद्देश्य तेंदुए की मौजूदगी की पुष्टि करने के साथ उसके आने-जाने के रास्ते और गतिविधियों की जानकारी जुटाना है। कैमरा ट्रैप से मिलने वाली तस्वीरें वन विभाग के लिए आगे की रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण होंगी।

ड्रोन से भी तलाश, पार्क में वॉक पर रोक
तेंदुए की सूचना के बाद वन विभाग ड्रोन के माध्यम से भी संभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है। एहतियात के तौर पर पार्क में सुबह और शाम की वॉक पर रोक लगाई गई है। स्थानीय लोगों से वन क्षेत्र के आसपास सावधानी बरतने और तेंदुए की तलाश में खुद जंगल में नहीं जाने की अपील की गई है।
प्राकृतिक ट्रेल और वन्यजीवों के लिए जाना जाता है पार्क
लहारपुर इकोलॉजिकल पार्क कटारा हिल्स के हरित क्षेत्र में स्थित है और प्राकृतिक ट्रेल के लिए जाना जाता है। यहां पहले भी हिरण जैसे शाकाहारी वन्यजीवों की मौजूदगी सामने आती रही है। शहर के नजदीक ऐसे वन क्षेत्र वन्यजीवों के लिए आवास और आवाजाही का माध्यम बन सकते हैं। इसी कारण वन्यजीवों की गतिविधि सामने आने पर निगरानी और मानव सुरक्षा दोनों महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

तेंदुआ खाद्य-श्रृंखला का प्रमुख शिकारी
तेंदुआ वन पारिस्थितिकी तंत्र में प्रमुख शिकारी प्रजातियों में शामिल है। किसी क्षेत्र में उसकी गतिविधि सामने आने का अर्थ यह हो सकता है कि वहां उसे आश्रय या शिकार की उपलब्धता जैसी परिस्थितियां मिल रही हों। हालांकि, केवल तेंदुए की मौजूदगी को बेहतर इकोसिस्टम का प्रमाण मानना वैज्ञानिक रूप से पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए क्षेत्र में जैव विविधता, शिकार प्रजातियों, वनस्पति और अन्य पर्यावरणीय संकेतकों का अध्ययन जरूरी है।
अभी तलाश पर टिकी नजर
कटारा हिल्स में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल तेंदुए के दिखने से ज्यादा उसकी वास्तविक मौजूदगी और सक्रिय क्षेत्र को लेकर है। ट्रैप कैमरों और ड्रोन निगरानी से मिलने वाली जानकारी के बाद ही तेंदुए के मूवमेंट का वास्तविक पैटर्न सामने आएगा। तब तक वन विभाग की निगरानी और स्थानीय लोगों की सतर्कता मानव-वन्यजीव संघर्ष की किसी भी संभावित स्थिति को रोकने में महत्वपूर्ण रहेगी।
