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भोपाल 

प्रदेश में राहुल गांधी के बालाघाट दौरे के ठीक अगले दिन केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह भोपाल पहुंचेंगे। शाह करीब 23 घंटे राजधानी में रहेंगे। उनका दौरा मुख्य रूप से डेयरी, सहकारिता, पशुपालन, पुलिस और उच्च शिक्षा से जुड़े कार्यक्रमों पर केंद्रित रहेगा। तीन अक्तूबर को भेल दशहरा मैदान में होने वाला राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन उनके दौरे का प्रमुख कार्यक्रम होगा, जिसमें 35 हजार से ज्यादा गोपालक और दुग्ध सहकारी समितियों से जुड़े सदस्य जुटेंगे। शाह दो अक्तूबर की रात करीब नौ बजे भोपाल पहुंचेंगे और होटल ताज में रात्रि विश्राम करेंगे। अगले दिन दिनभर अलग-अलग कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद रात करीब आठ बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगे। 

35 हजार गोपालकों के बीच बड़ा आयोजन
भेल दशहरा मैदान में होने वाले सम्मेलन में पशुपालकों को बोनस राशि और गौशालाओं के लिए सहायता दी जाएगी। गोपालक दीदियों का सम्मान होगा और डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना के स्वीकृति पत्र भी बांटे जाएंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार की ओर से कृषक कल्याण वर्ष के दौरान किए गए कामों और बलराम कृषि महोत्सव की गतिविधियों का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। गृह, पशुपालन एवं डेयरी, सहकारिता, लोक निर्माण और परिवहन विभाग भी अपनी योजनाओं की जानकारी देंगे। भोपाल और इंदौर दुग्ध संघ से जुड़े पशुपालकों को बोनस तथा गौशालाओं के लिए सहायता देने के कार्यक्रम भी होंगे। 

सांची के कारोबार को दूध से आगे ले जाने की तैयारी
शाह भोपाल सहकारी दुग्ध संघ परिसर में तैयार फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट का शुभारंभ भी करेंगे। 16.80 करोड़ रुपये की लागत से बने इस प्लांट में केंद्र सरकार का छह करोड़ रुपये का अनुदान और भोपाल सहकारी दुग्ध संघ का 10.80 करोड़ रुपये का अंशदान है। प्लांट में रोज 40 हजार लीटर दूध के प्रसंस्करण की क्षमता है।   

उज्जैन की 255 करोड़ की परियोजना भी एजेंडे में
उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में डेयरी कारोबार को बढ़ावा देने के लिए 255 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक डेयरी प्लांट बनाया जाएगा। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 3 अक्टूबर 2026 को भोपाल से इस प्लांट का डिजिटल भूमिपूजन करेंगे। मध्यप्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ की ओर से बनाए जा रहे इस प्लांट से दूध के प्रसंस्करण और उससे बनने वाले उत्पादों की क्षमता बढ़ेगी। परियोजना की कुल लागत में से 170 करोड़ रुपये राज्य सरकार अनुदान के रूप में देगी, जबकि 85 करोड़ रुपये दुग्ध संघ ऋण के माध्यम से जुटाएगा। प्लांट को अगले दो साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

रोज तीन लाख लीटर दूध होगा प्रोसेस
उज्जैन के प्रस्तावित प्लांट में शुरुआत में रोज तीन लाख लीटर दूध के प्रसंस्करण की क्षमता होगी। भविष्य में इसे बढ़ाकर पांच लाख लीटर प्रतिदिन किया जा सकेगा। इससे उज्जैन और आसपास के इलाकों में बढ़ रहे दूध उत्पादन को स्थानीय स्तर पर प्रोसेस करने में मदद मिलेगी।

दूध, दही, छाछ और घी का होगा उत्पादन
प्लांट में कई तरह के डेयरी उत्पाद तैयार किए जाएंगे। यहां रोजाना 1.50 लाख लीटर पैक्ड मिल्क, 25 हजार लीटर दही और 10 हजार लीटर लस्सी-छाछ बनाने की क्षमता होगी। इसके साथ ही रोज 10 मीट्रिक टन घी बनाने का प्लांट भी लगाया जाएगा।

नए कानूनों से लेकर IISER तक कार्यक्रम
शाह भेल मैदान में पुलिस मुख्यालय की ओर से लगाए गए नए आपराधिक कानूनों पर राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन और अवलोकन करेंगे। इसके बाद भौंरी में IISER के अत्रि परिसर के शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल होंगे। यहां स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण भी प्रस्तावित है। इस तरह राहुल गांधी के बालाघाट दौरे के बाद अमित शाह का भोपाल कार्यक्रम प्रदेश की राजनीति के बीच अलग-अलग सरकारी और संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर चर्चा में है। हालांकि शाह के घोषित कार्यक्रमों में मुख्य जोर डेयरी और सहकारिता क्षेत्र के विस्तार, पशुपालकों को योजनाओं का लाभ और सरकारी परियोजनाओं के उद्घाटन-शिलान्यास पर है। 

 

पशुपालकों को बोनस, गौशालाओं को मदद
कार्यक्रम में शाह भोपाल और इंदौर दुग्ध संघों से जुड़े पशुपालकों को बोनस वितरित करेंगे। गौशालाओं को आर्थिक सहायता दी जाएगी। गोपालक दीदियों का सम्मान होगा और डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना के स्वीकृति पत्र भी वितरित किए जाएंगे।

डेयरी क्षेत्र में भी कई घोषणाएं
दौरे के दौरान प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और डेयरी प्रसंस्करण से जुड़ी परियोजनाओं की सौगात भी प्रस्तावित है। इनमें उज्जैन में 255 करोड़ रुपए का डेयरी प्लांट और भोपाल में फॉर्म्युलेटेड/फर्मेंटेड मिल्क प्रोडक्ट से जुड़ी सुविधा शामिल है।

भोपाल दुग्ध संघ परिसर में तैयार फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट पर 16.80 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इससे दही, छाछ, लस्सी, श्रीखंड और मावा जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों की प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने की योजना है।

किसान फोकस क्यों?
मध्यप्रदेश विधानसभा में 2026 में दिए गए सरकारी जवाब के अनुसार 30 जून 2026 तक प्रदेश में 1,11,88,295 किसानों की फार्मर आईडी बन चुकी थी। सरकार ने विधानसभा में कहा कि जिलावार फार्मर आईडी की जानकारी परिशिष्ट में दी गई है और शेष किसानों की आईडी बनाने की प्रक्रिया जारी है।

यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि फार्मर आईडी की संख्या को किसान वोटरों की संख्या नहीं माना जा सकता। मतदाता सूची में मतदाताओं को किसान या गैर-किसान के आधार पर वर्गीकृत नहीं किया जाता। इसलिए किसी जिले में कितने किसान मतदाता हैं, इसका अलग आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

केंद्र सरकार के मार्च 2026 तक के आंकड़ों में भी मध्यप्रदेश में 1.04 करोड़ से अधिक किसान आईडी बनने की जानकारी दी गई थी। जून तक राज्य सरकार का आंकड़ा बढ़कर 1.11 करोड़ से अधिक हो गया।

शाह के हालिया कार्यक्रमों और बयानों में भी किसान-सहकारिता का जिक्र
अमित शाह के इस दौरे का किसान-सहकारिता से जुड़ाव उनके हालिया राष्ट्रीय कार्यक्रमों से भी दिखाई देता है। 23 जून 2026 को सहकारिता मंत्री के तौर पर शाह ने NAFED का NAFEX ई-ऑक्शन पोर्टल लॉन्च किया था।

उस कार्यक्रम में उन्होंने NAFED और NCCF को अगले दो वर्षों में दलहन की खरीद सीधे किसानों से करने की दिशा में काम करने को कहा था। उन्होंने किसानों को भुगतान सीधे बैंक खातों में पहुंचाने और बिचौलियों की भूमिका कम करने पर जोर दिया था।

इसके बाद 7 जुलाई 2026 को मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के बीच नर्मदा अवॉर्ड से जुड़े लंबित भुगतान के मुद्दे पर अमित शाह की मौजूदगी में समझौता हुआ। उस मौके पर शाह ने कहा था कि नर्मदा परियोजना से जुड़े राज्यों को पानी और बिजली का लाभ मिला है और नर्मदा का पानी जिन क्षेत्रों तक पहुंचा है, वहां किसानों की स्थिति और जमीन के मूल्य में बदलाव आया है।

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