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जादवपुर यूनिवर्सिटी (JU) ने अपनी काउंसलिंग के जरिए बीटेक की 182 खाली सीटों को भरने के लिए पश्चिम बंगाल राज्य संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) में सामान्य श्रेणी (जनरल कैटेगरी) के उम्मीदवारों के लिए 12000 की कट-ऑफ रैंक तय की है। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक यूनिवर्सिटी ने खाली इंजीनियरिंग सीटों को भरने के लिए 27 अक्टूबर से अपनी खुद की JEE काउंसलिंग शुरू की है जो 30 अक्टूबर तक चलेगी। द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार JEE बोर्ड द्वारा आयोजित काउंसलिंग के कई दौर के बाद भी बीटेक की 182 सीटें खाली रह गई थीं जिसके चलते यह कदम उठाया गया है। इसमें आगे बताया गया है कि कुल खाली सीटों में से 33 सीटें सिविल इंजीनियरिंग विभाग में और 11 सीटें इलेक्ट्रिकल ब्रांच में हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, बची हुई खाली सीटों को भरने के लिए, JU ने JEE में 12,000 तक की रैंक वाले सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों को आमंत्रित किया है।

BTech दाखिले के लिए जादवपुर यूनिवर्सिटी की काउंसलिंग
जेयू के कुलपति चिरंजीब भट्टाचार्य ने रिपोर्ट में कहा कि खाली सीटों को भरने के लिए यूनिवर्सिटी JEE मेरिट लिस्ट में कम रैंक वाले उम्मीदवारों को बुला रही है। कुलपति ने रिपोर्ट में कहा कि दाखिले में देरी होने से छात्रों के लिए सिलेबस को कवर करना मुश्किल हो सकता है।

भट्टाचार्य ने कहा, 'अगर आप काउंसलिंग में देरी करते हैं तो जाहिर है कि आपको कम रैंक वाले छात्र ही मिलेंगे। किसी भी संस्थान के लिए यह अच्छी बात नहीं है। JU में इस साल BTech की कक्षाएं 12 अक्टूबर से शुरू हुईं, जो IIT और NIT की तुलना में काफी देर से हैं। मैं एक ऐसे उम्मीदवार को जानता हूं जिसने JU में काउंसलिंग में देरी होने के कारण ओडिशा के कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (KIIT) में दाखिला ले लिया। KIIT में तो अब तक मिड-टर्म (मध्य-सत्र) परीक्षाएं भी पूरी हो चुकी हैं।'

उन्होंने आगे कहा कि दाखिले में देरी के कारण यूनिवर्सिटी को छात्र गंवाने पड़ रहे हैं और कम रैंक वाले उम्मीदवारों से खाली सीटों को भरना संस्थान के लिए अच्छा नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार 13 अक्टूबर को राज्य सरकार ने JU और कलकत्ता यूनिवर्सिटी को यह अनुमति दी थी कि वे केंद्रीय प्रक्रिया के बाद खाली रह गई BTech सीटों को भरने के लिए अपनी खुद की काउंसलिंग आयोजित कर सकते हैं।

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