Jangal Ki Aag

गणेश पाण्डेय, भोपाल। गर्मियों के मौसम में जंगलों में आग लगने की घटनाएं आम हो जाती हैं, जिन पर काबू पाना वन विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होता है। इस समस्या से निपटने के लिए दक्षिण पन्ना के डीएफओ अनुपम शर्मा ने भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा-79 का उल्लेख करते हुए पन्ना कलेक्टर को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में स्पष्ट किया कि इस धारा के तहत सरकार द्वारा नियुक्त हर व्यक्ति जंगल की आग बुझाने या इसे फैलने से रोकने में वन कर्मियों की सहायता करने के लिए बाध्य है।

डीएफओ शर्मा ने पत्र में आग के दुष्प्रभावों पर जोर देते हुए लिखा कि यह न केवल वनस्पति और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि मृदा पर भी गंभीर असर डालती है। सीमित संसाधनों के कारण कई बार वन विभाग के लिए आग पर काबू पाना मुश्किल हो जाता है। पहली बार किसी डीएफओ ने इस अधिनियम का हवाला देते हुए राजस्व विभाग और अन्य सरकारी संस्थाओं से मदद मांगी है।

सहायता न करने पर दंड का प्रावधान

भारतीय वन अधिनियम की धारा-79 में यह भी प्रावधान है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी, वन अधिकारियों के अनुरोध के बावजूद जंगल की आग बुझाने में सहायता नहीं करता या आग को फैलने से रोकने में लापरवाही बरतता है, तो उसे कारावास या जुर्माने अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है। यह पहली बार है जब डीएफओ ने इस अधिनियम के तहत सभी सरकारी कर्मचारियों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराने का प्रयास किया है।

डीएफओ के पत्र पर कलेक्टर ने दिया त्वरित जवाब

डीएफओ के पत्र को गंभीरता से लेते हुए पन्ना कलेक्टर ने अपर कलेक्टर नीलांबर मिश्रा को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। इसके तहत अपर कलेक्टर ने जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार, जनपद पंचायत के सीईओ, नगर पालिका अधिकारी, पटवारी, पंचायत सचिव, शिक्षक, रोजगार सहायक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता और कोटवार सहित सभी मैदानी शासकीय कर्मचारियों को निर्देश जारी किए हैं।

इन निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि जंगल की आग बुझाने में अब केवल वन विभाग ही नहीं, बल्कि सभी शासकीय कर्मचारी भी जिम्मेदार होंगे और उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान करनी होगी।

जंगल की आग पर नियंत्रण के लिए प्रशासनिक कदम

यह कदम जंगलों में लगने वाली आग को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब देखना होगा कि सरकारी कर्मचारी इस निर्देश का कितना पालन करते हैं और वन विभाग को वास्तविक सहायता कितनी मिलती है।