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निगम को वित्तीय संकट से उबरने उठाए कई कदम

गणेश पाण्डेय, भोपाल। वन विकास निगम के प्रबंध संचालक बीएन अम्बाड़े ने निगम को वित्तीय संक्रमण कॉल से उबारने के लिए प्रशासनिक कसावट के साथ-साथ फिजूल खर्ची पर रोक लगा दी है। कॉस्ट कटिंग के आधार पर अपने कार्यों के प्रति उदासीन और लापरवाह 75 वनकर्मियों की सेवाएं वन विभाग को लौटा दी है।

1988 बैच के आईएफएस अधिकारी बीएन अम्बाड़े ने वन विकास निगम की वर्किंग स्टाइल में कई फेरबदल किए है। मसलन, अब मार्केट की डिमांड के अनुसार ही बल्लियों की कटाई करने के निर्देश दिए है। अभी तक निगम के अधिकारी मार्केट की मांग के अनुसार कटाई नहीं करते आ रहे थे, जिसकी वजह से निगम की लकड़िया नहीं बिक पा रही थी। अंबानी ने सभी रीजनल मैनेजर और डिविजनल मैनेजर की बैठक बुलाई और निर्देश दिए कि बाजार की डिमांड के अनुसार ही कटाई की जाए।

पहली बार छिंदवाड़ा में हुई नीलामी

निगम छिंदवाड़ा की लकड़ियों को बैतूल डिपो में ले जाकर बेचता रहा। इसके कारण निगम को परिवहन पर अनावश्यक खर्च करना पड़ता था। निगम एमडी अम्बाड़े ने छिंदवाड़ा का दौरा किया। उन्होंने अधिकारियों की बैठक लिया और निर्देश दिए कि अब बैतूल डिपो से बिक्री न करके यहीं पर छोटे-बड़े व्यापारियों को बुलाकर नीलामी की जाए। एमडी के निर्देश का असर यह रहा कि छिंदवाड़ा में ही 84 लाख की बिक्री हुई।

फंड की हेरा-फेरी पर लगाया ब्रेक

एमडी अम्बाड़े ने निगम के कंपनी सचिव समेत अन्य अधिकारियों के उस कृत्य पर रोक लगा दी, जिसमें वे फंड की हेरा-फेरी किया करते आ रहे थे। यानि जिस मद की राशि होती थी, उस पर ख़र्च न करके किसी पर व्यय किया करते थे। वित्तीय कसावट लाते हुए मदवार खर्च करने के सख्त निर्देश दिए।

अब विभाग रूट-शूट निगम से खरीदेगा

एमडी अम्बाड़े ने वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव को पत्र लिखकर यह आग्रह किया है कि एक सरकुलर जारी कर रूट-शूट निगम से खरीदने की अनिवार्य करें। अम्बाड़े का तर्क है कि फील्ड के अफसरों द्वारा अन्य राज्यों से अधिक कीमत पर रूट-शूट खरीदते है, जो अत्यंत कमजोर और रोपण की मानक पर खरे नहीं उतरते है। बकौल अम्बाड़े, वन बल प्रमुख श्रीवास्तव ने सरकुलर जारी करने पर अपनी सहमति दे दी है। अम्बाड़े ने 2027 में साढ़े तीन लाख रूट-शूट निगम तैयार करेगा। इसके लिए सगोन के बीज का संग्रहण करवाना शुरू कर दिया है।